Last Updated on February 13, 2026 1:24 am by INDIAN AWAAZ


ज़ाकिर हुसैन, ढाका

लंबे समय तक चली राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, बांग्लादेश एक बार फिर मतपत्रों के माध्यम से लोकतांत्रिक शासन की ओर लौटता दिख रहा है। देश में गुरुवार को 13वें आम चुनाव के लिए उत्सवपूर्ण माहौल में मतदान हुआ। शुरुआती रुझानों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) स्पष्ट बढ़त बनाती दिख रही है, जिससे इस चर्चा को बल मिला है कि पार्टी के चेयरपर्सन तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

मतदान के मुख्य आंकड़े

चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 60 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। देश भर में सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक शांतिपूर्ण तरीके से वोट डाले गए। 300 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में से 299 पर मतदान हुआ, जबकि शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया।

रुझान: BNP का पलड़ा भारी

मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद केंद्रों पर गिनती शुरू हो गई। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार:

  • BNP: 91 सीटों पर आगे।
  • जमात-ए-इस्लामी गठबंधन: 38 सीटों पर बढ़त।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ये केवल शुरुआती रुझान हैं और अंतिम परिणामों तक आंकड़ों में बदलाव संभव है।

“नए बांग्लादेश की शुरुआत” – मुहम्मद युनूस

चुनाव के माहौल को कई मतदाताओं ने “ईद के जश्न” जैसा बताया। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार, नोबेल विजेता मुहम्मद युनूस ने चुनाव प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “यह संभवतः देश के इतिहास का सबसे शांतिपूर्ण और उत्सवपूर्ण चुनाव है। इसके साथ ही एक नए बांग्लादेश की यात्रा शुरू हो गई है।”


पृष्ठभूमि: शेख हसीना के पतन से चुनावों तक

यह चुनाव पिछले एक साल के नाटकीय घटनाक्रमों का परिणाम है:

  1. जुलाई 2024: छात्र आंदोलन के कारण 15 साल से सत्ता में रहीं शेख हसीना की सरकार गिर गई।
  2. तख्तापलट: हसीना ने देश छोड़कर भारत में शरण ली।
  3. अंतरिम शासन: मुहम्मद युनूस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जिसने इन चुनावों की जिम्मेदारी संभाली।

चुनाव की कुछ खास बातें

  • सुधारों पर जनमत संग्रह: संसदीय चुनावों के साथ-साथ राजनीतिक सुधारों पर जनमत संग्रह भी आयोजित किया गया।
  • पोस्टल वोटिंग: पहली बार डाक मतपत्रों (Postal Voting) की शुरुआत हुई।
  • अंतरराष्ट्रीय निगरानी: यूरोपीय संघ सहित दुनिया भर के लगभग 500 पर्यवेक्षक ढाका में मौजूद रहे।
  • अवामी लीग पर प्रतिबंध: शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद, मुख्य मुकाबला BNP और जमात-ए-इस्लामी के गुटों के बीच सिमट गया।

चुनौतियां और हिंसा की छिटपुट घटनाएं

BNP प्रमुख तारिक रहमान ने नतीजों की जल्द घोषणा की मांग की है ताकि जनता के बीच भ्रम न फैले। हालांकि मतदान कुल मिलाकर शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में झड़पों की खबरें भी आईं। चुनाव के दिन BNP नेता मोहिबुज्जमां कोच्चि की हत्या ने सभी का ध्यान खींचा है।

निष्कर्ष: जैसे-जैसे अंतिम नतीजे करीब आ रहे हैं, मुख्य सवाल यही है: क्या 18 महीनों के संघर्ष के बाद बांग्लादेश की राजनीति का पहिया पूरी तरह से नई दिशा में घूम जाएगा? इसका जवाब अगले कुछ घंटों में साफ हो जाएगा।