
हमारे संवाददाता
दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान 19 वर्षीय छात्र प्रदर्शनकारी साहिल लोचब को कथित तौर पर पेलेट गन से लगी चोटों के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के दिल्ली के एक पुलिस थाने के बाहर दिनभर धरने पर बैठने के बाद हुई।
राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब और उसके परिवार के सदस्यों के साथ पुलिस थाने पहुंचे थे। उन्होंने मांग की थी कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल की जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज की जाए।
राहुल गांधी ने पुलिस को चेतावनी दी थी कि जब तक FIR दर्ज नहीं की जाती, वह पुलिस थाने के बाहर धरने से नहीं उठेंगे। उन्होंने कहा था, “अगर FIR दर्ज नहीं हुई तो मैं 30 दिन या छह महीने तक भी पुलिस थाने के बाहर धरने पर बैठूंगा।”
इसके बाद पुलिस ने साहिल की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेज जुटाए तथा उसकी शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की।
FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने इसे न्याय की दिशा में पहला कदम बताया। उन्होंने कहा कि घटना को लगभग एक महीना बीत चुका है और साहिल के शरीर में अभी भी पेलेट के छर्रे मौजूद हैं, जिनमें तीन उसकी आंख में फंसे होने का दावा किया गया है।
राहुल गांधी ने कहा, “यह न्याय की दिशा में पहला कदम है। FIR दर्ज हो गई है। देखिए इसमें कितना समय लगा। पेलेट चलाए जाने को एक महीना हो चुका है। उसके शरीर में पेलेट हैं, उसकी आंख में तीन पेलेट हैं। यह साफ है कि एक युवा के साथ अन्याय हुआ है।”
सात घंटे के धरने के बाद FIR
राहुल गांधी ने FIR दर्ज करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि वह सुबह करीब 11:30 बजे पुलिस थाने पहुंचे थे, जबकि FIR शाम करीब 6:30 बजे दर्ज की गई।
उन्होंने कहा कि यदि नई दिल्ली के बीचोंबीच स्थित एक पुलिस थाने में किसी शिकायत को दर्ज कराने में इतना समय लग सकता है, तो गांवों और छोटे शहरों में आम लोगों को किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि उनका प्रदर्शन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं था, बल्कि एक भारतीय नागरिक और उसके माता-पिता के लिए न्याय की मांग को लेकर था।
उन्होंने कहा, “हमने यहां कुछ गलत नहीं किया है। हमने केवल एक भारतीय नागरिक, उसकी मां और उसके पिता के लिए न्याय मांगा है।”
राहुल गांधी ने प्रदर्शन में शामिल साहिल की मां से भी पूछा कि क्या FIR दर्ज होने के बाद वह संतुष्ट हैं।
साहिल ने जताया भरोसा
साहिल लोचब ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उसे विश्वास था कि यदि विपक्ष के नेता उसके साथ खड़े हैं तो पुलिस को उसकी शिकायत दर्ज करनी पड़ेगी।
साहिल ने कहा कि लोगों को अपना भरोसा बनाए रखना चाहिए और जब तक देश में जननायकों की मौजूदगी है, तब तक लोगों को चुप नहीं कराया जा सकता।
साहिल के परिवार का आरोप है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान उसे पेलेट गन से चोट लगी। इस घटना के बाद उसकी आंख की रोशनी को लेकर भी चिंता जताई गई है।
हालांकि FIR दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं। अब पुलिस जांच के दौरान यह निर्धारित किया जाएगा कि साहिल को चोट किस परिस्थिति में लगी, पेलेट गन का इस्तेमाल किसने किया और क्या बल प्रयोग कानून के अनुरूप था।
पुलिस ने पहले सुप्रीम कोर्ट की समिति का दिया था हवाला
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी को FIR दर्ज करने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी (HPEC) का हवाला दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बलों द्वारा अत्यधिक या असंगत बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की है।
पुलिस ने इसी समिति की जांच का हवाला देते हुए तत्काल FIR दर्ज करने से इनकार किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने पुलिस थाने के बाहर धरना जारी रखा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के सामने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के आरोपों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की भी जांच का मुद्दा है।
पेलेट से चोट को लेकर राहुल गांधी का आरोप
धरने के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे साहिल पर पुलिस ने पेलेट गन का इस्तेमाल किया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि कथित पेलेट फायरिंग के कारण साहिल की एक आंख की रोशनी खतरे में है।
कांग्रेस नेता और साहिल द्वारा लगाए गए आरोप अब FIR का हिस्सा हैं। जांच के दौरान पुलिस को यह पता लगाना होगा कि घटना के समय मौके पर क्या हुआ था और साहिल को चोट कैसे लगी।
राजनीतिक विवाद भी तेज
इस घटना ने छात्र प्रदर्शनों और उन्हें संभालने के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज कर दिया है।
कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया। वहीं सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई करनी पड़ती है।
राहुल गांधी का साहिल के साथ पुलिस थाने पहुंचना और घंटों धरने पर बैठना मामले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना गया है।
कांग्रेस नेता ने FIR दर्ज करने में हुई देरी को पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और आम नागरिकों के न्याय तक पहुंच से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग से जुड़े आरोपों की जांच के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित कर चुका है। ऐसे में समिति की जांच और पुलिस की FIR दोनों ही आगे की कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
फिलहाल FIR दर्ज होना साहिल लोचब और उसके परिवार के लिए न्याय की प्रक्रिया की शुरुआत है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट करना होगा कि 20 जुलाई को वास्तव में क्या हुआ, साहिल को चोट किस तरह लगी, पेलेट गन का इस्तेमाल किसने किया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
मामला आगे भी राजनीतिक और न्यायिक निगरानी में रहने की संभावना है, खासकर तब जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े व्यापक आरोपों की जांच कर रही है।
