Last Updated on May 10, 2026 9:27 pm by INDIAN AWAAZ

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को दशकों से समाज की प्रगति का प्रमुख पैमाना माना जाता रहा है. मगर, GDP के बढ़ते आँकड़ों के बीच, उन राजनैतिक और आर्थिक व्यवस्थाओं के प्रति लोगों में गहरी निराशा भी बढ़ रही है, जिनका उद्देश्य जनता की सेवा करना है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब समय आ गया है कि हम GDP को मापने का नया तरीक़ा खोजें कि वास्तव में क्या पहलू मायने रखते हैं?
सरल शब्दों में कहें तो सकल घरेलू उत्पाद – GDP, किसी देश द्वारा उत्पादित और बेची गई सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल योग है. लेकिन अर्थशास्त्री लम्बे समय से मानते हैं कि यह मापन पूरी तस्वीर नहीं दिखाता है.
उदाहरण के लिए, बच्चों या विकलांग परिजन की देखभाल जैसे बिना वेतन वाले काम, GDP में “सकारात्मक योगदान” के रूप में शामिल नहीं होते, और न ही इसमें असमानता, प्रदूषण की लागत या प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को शामिल किया जाता है.
यह एक समस्या है, क्योंकि इससे नीति-निर्माण के लिए ग़लत प्रोत्साहन और लक्ष्य तय हो सकते हैं. केवल GDP वृद्धि के पीछे भागने से नीति निर्माता उन मुद्दों को नज़रअन्दाज़ कर सकते हैं जो लोगों और पृथ्वी, दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं.
अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के ध्यान में प्रगति को मापने के अधिक सूक्ष्म और व्यापक संकेतकों की कमी लम्बे समय से रही है.
इसी दिशा में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने, एक वर्ष पहले ‘Beyond GDP’ पर उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समूह की शुरुआत की थी.
सही गणना
इस समूह ने, एक वर्ष तक चले परामर्शों के बाद, अपने निष्कर्ष एक रिपोर्ट के रूप में जारी किए हैं, जिसका शीर्षक है “Counting what Counts” और जिसे “लोगों और पृथ्वी के लिए एक मार्गदर्शक” बताया गया है.
यह रिपोर्ट, GDP के सीमित माप से आगे बढ़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से पहला वैश्विक ख़ाका प्रस्तुत करती है.
साथ ही, नीति-निर्माण तथा निर्णय प्रक्रिया को दिशा देने के लिए अधिक व्यापक संकेतकों के उपयोग के लिए मज़बूत हिमायत करती है.
यह रिपोर्ट GDP के प्रयोग का विरोध नहीं करती, बल्कि यह स्पष्ट करती है कि यह आर्थिक उत्पादन मापने के लिए तो ठीक है, लेकिन यह अकेले ही, किसी देश के कल्याण (welfare) का पर्याप्त संकेतक नहीं है.
इसमें अर्थशास्त्री नोबेल पुरस्कार विजेता साइमन कुज़नेट्स का भी हवाला दिया गया है, जिन्होंने इस मीट्रिक की नींव रखी थी यानि जिन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि GDP अकेले किसी राष्ट्र की भलाई को मापने के लिए पर्याप्त नहीं है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरूवार को रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि GDP का उपयोग, आज उन तरीक़ों से हो रहा है, जिनके लिए इसे मूल रूप से बनाया ही नहीं गया था.
उन्होंने कहा, “हम GDP का उपयोग देशों की दीर्घकालिक सफलता को आँकने के लिए करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि GDP जिन चीज़ों को मापता है और लोग जिन चीज़ों को अहमियत देते हैं, उनके बीच एक बड़ा अन्तर है.”
“GDP अन्तरराष्ट्रीय नीति-निर्माण का प्रमुख उपकरण बन गया है, लेकिन यह देशों की कमज़ोरियों, चुनौतियों या सम्भावनाओं को प्रभावी रूप से अलग नहीं कर पाता है.”
यूएन प्रमुख ने, कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence) के बढ़ते प्रभाव का उदाहरण देते हुए यह भी कहा कि अधिक सूक्ष्म और व्यापक संकेतकों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है.
रिपोर्ट का मुख्य आधार एक “डैशबोर्ड” है, जिसमें चार स्तम्भों पर आधारित संकेतकों का सेट शामिल है: मूलभूत सिद्धान्त (जैसे शान्ति, मानवाधिकार और पृथ्वी के प्रति सम्मान), वर्तमान कल्याण, समानता व समावेशन और सततता व लचीलापन.
अगले क़दम…
हालांकि, विशेषज्ञ समूह GDP का कोई ऐसा विकल्प प्रस्तावित नहीं करता, जो देशों को रैंक या स्थान देने के लिए इस्तेमाल हो.
मगर, वह यह सिफ़ारिश करता है कि कुछ सीमित प्रमुख संकेतकों (headline indicators) का एक mwट विकसित किया जाए, जिससे नीति-निर्माताओं और आम जनता को प्रगति को अधिक स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिले.
रिपोर्ट में Beyond GDP एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक क़दम भी शामिल हैं, जैसे कि राष्ट्रीय “प्रगति डैशबोर्ड” को तेज़ी से अपनाना.
ये डैशबोर्ड प्रत्येक देश की प्राथमिकताओं के अनुसार तैयार किए जाएँगे और नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं में सीधे शामिल किए जाएँगे.
साथ ही, एक वैश्विक संयुक्त राष्ट्र रिपोर्टिंग तंत्र (UN global reporting mechanism) का भी प्रस्ताव किया गया है, जिसमें हर वर्ष एक प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की निगरानी से जुड़ी होगी.
इसके अलावा, अकादमिक जगत, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और मीडिया को भी शोध, रिपोर्टिंग और सार्थक भागेदारी के माध्यम से, इस विमर्श को बदलने और GDP से आगे जाकर प्रगति के वास्तविक मापदंडों पर नेताओं को जवाबदेह बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है. UN NEWS
