Last Updated on April 22, 2026 1:07 am by INDIAN AWAAZ
आफरीन हुसैन
जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, राज्य का राजनीतिक माहौल लगातार तनावपूर्ण और अनिश्चित होता जा रहा है। एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे या फिर पिछले चुनावों की तरह धांधली के आरोप सामने आएंगे।
भाजपा का रुख
Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने इस मुद्दे पर सबसे आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक केंद्रीय सुरक्षा बलों की बड़े स्तर पर तैनाती नहीं की जाती, तब तक निष्पक्ष मतदान संभव नहीं है।
भाजपा का आरोप है कि उसके कार्यकर्ताओं को कई क्षेत्रों में धमकाया जा रहा है और चुनाव प्रचार में बाधाएं डाली जा रही हैं। पार्टी ने Election Commission of India से बूथ स्तर पर कड़ी निगरानी, वीडियो रिकॉर्डिंग और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग की है।
तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया
इन आरोपों पर All India Trinamool Congress (टीएमसी) ने उन्हें सिरे से खारिज करते हुए राजनीतिक प्रचार बताया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने कहा कि भाजपा पहले से ही अपनी हार के लिए बहाने तैयार कर रही है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार चुनाव आयोग के साथ पूरा सहयोग करेगी और मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण व पारदर्शी होगी। टीएमसी ने भाजपा पर बाहरी लोगों को लाकर माहौल बिगाड़ने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस और CPI(M) की चिंता
Indian National Congress (कांग्रेस) और Communist Party of India (Marxist) (सीपीआई-एम) ने भी हालात को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि उनके जमीनी कार्यकर्ताओं पर दबाव, धमकी और कुछ जगहों पर हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।
दोनों दलों ने सभी के लिए समान अवसर और मतदान केंद्रों पर निष्पक्ष माहौल की मांग की है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा और धांधली के आरोप कोई नई बात नहीं हैं। पिछले चुनावों में झड़प, बूथ कब्जाने और मतदाताओं को डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आई थीं। यही कारण है कि इस बार भी मतदाताओं में चिंता बनी हुई है।
चुनाव आयोग की तैयारियां
Election Commission of India ने आगामी चुनावों के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। इसमें संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, अतिरिक्त बलों की तैनाती, वेबकास्टिंग और माइक्रो-ऑब्जर्वर के जरिए निगरानी शामिल है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके।
जनता का मूड
राज्य के मतदाता फिलहाल मिले-जुले भाव में हैं। जहां एक ओर लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने को उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर हिंसा और धांधली की आशंका भी बनी हुई है।
समग्र परिदृश्य
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के चुनाव बेहद प्रतिस्पर्धी और संवेदनशील होते जा रहे हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दल जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे पर लग रहे गंभीर आरोप माहौल को और गरमा रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे या फिर एक बार फिर विवादों में घिर जाएंगे।

