Last Updated on January 8, 2026 7:34 pm by INDIAN AWAAZ

शंकर जालान
कड़ाके की ठंड के बीच वृहस्पतिवार (8 जनवरी) को पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापामारी (रेड) को लेकर माहौल एकाएक गर्मा गया। ईडी की तरफ से जहां इसे बड़ी छापेमारी बताया जा रहा है वहीं तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी छापेमारी को बेवजह करार देते हुए बड़ा बवाल करती नजर आई। जैसे ही ममता को यह पता चला कि ईडी के अधिकारी छापामारी के मकसद से पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई पैक के दफ्तर पहुंचे हैं ममता भी पहुंच गई। ईडी का आरोप है कि ममता ने छापामारी में बाधा उत्पन्न की, जबकि ममता ने कहना कि केंद्र सरकार के इशारे में छापामारी की जा रही है। वैसे यह पहला अवसर नहीं है जब ममता ने छापामारी करने पहुंचे अधिकारियों को रोकने की कोशिश की हो। इससे पहले कोलकाता पुलिस के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार के आवास पर भी छापामारी करने गए केंद्रीय अधिकारियों को ममता ने रोका था।
लाख टके का सवाल है की ईडी की एक छापामारी ने आखिरकार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस कदर नाराज क्यों कर दिया कि वे खुद सड़क पर उतर आईं और तृणमूल समर्थकों से राज्यभर में प्रदर्शन करने तक का आह्वान कर दिया। देखा जाए तो यह मामला सिर्फ छापेमारी का नहीं था, बल्कि उन रहस्यमयी ‘ग्रीन फाइलों’ का है, जिन्हें ममता बनर्जी ने आनन-फानन में अपनी गाड़ी में रखवा लिया। ममता के इस व्यवहार के खिलाफ शिकायत लेकर ईडी उच्च न्यायालय पहुंची, जिसकी सुनवाई शुक्रवार (9 जनवरी) को होगी।
राजनीतिक गलियारों के यह चर्चा जोर-शोर से चल रही है कि जिन फाइलों को ममता ने ईडी अधिकारियों से जबरन छीनकर अपनी गाड़ी में रखवा दिया, क्या उन्हीं फाइलों में तृणमूल के 2026 के चुनावों का कोई बड़ा राज छिपा है ? या फिर उनमें उन उम्मीदवारों के नाम हैं जिन्हें ममता बनर्जी गुप्त रखना चाहती थीं ? ममता ने सीधे-सीधे देश के गृहमंत्री पर हमला बोला और उन्हें एक ऐसा नाम ‘शरारती’ दे दिया, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी।
ममता बनर्जी ने इस छापेमारी के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अमित शाह पर हमला बोलते हुए उन्हें ‘नॉटी’ यानी ‘शरारती’ गृहमंत्री करार दिया। ममता ने कहा कि जो गृहमंत्री देश को सुरक्षित नहीं रख सकता, वह अब विपक्षी पार्टी के कागजात चुराने में लगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब राजनैतिक रणनीति, उम्मीदवारों की सूची और पार्टी की भविष्य की योजना को जब्त करना भी ईडी का काम रह गया है ? ममता का दावा है कि केंद्र सरकार जांच एजंसियों का इस्तेमाल करके तृणमूल के अंदरूनी डेटा तक पहुंचना चाहती है ताकि चुनाव में उन्हें कमजोर किया जा सके। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।
इतना ही नहीं, ममता बनर्जी ने साल्टलेक दफ्तर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए साफ कहा कि ईडी का मकसद कोई वित्तीय जांच नहीं, बल्कि राजनैतिक जासूसी करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके आईटी सेक्टर के कार्यकाल में घुसकर उम्मीदवारों की सूची और चुनावी रणनीति को खंगाला गया।
ममता का कहना है कि एक तरफ उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नाम हटाकर मतदाता सूची से छेड़छाड़ की जा रही है और दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी की ताकत को दस्तावेजों के जरिए समझने की कोशिश हो रही है।
आई पैक वही फर्म है जो ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति तैयार करती है। ईडी ने साल्टलेक स्थित दफ्तर और ममता की टीम के अहम सदस्य प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की। जैसे ही यह खबर ममता बनर्जी तक पहुंची, वे आगबबूला हो गईं। वे खुद मौके पर पहुंच गईं और इसके बाद जो हुआ वह उसे किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं कहा जा सकता। ममता ने आरोप लगाया कि ईडी उनकी पार्टी के जरूरी दस्तावेज ‘चोरी’ करने आई। देखते ही देखते दफ्तर से कुछ हरी फाइलें बाहर निकाली गईं और उन्हें सुरक्षित तरीके से मुख्यमंत्री के काफिले की गाड़ी में रख दिया गया। अब सब यह जानना चाहते हैं कि आखिर फाइलों में क्या था, जिसे बचाने के लिए खुद मुख्यमंत्री को सामने आना पड़ा ?
कहना गलत नहीं होगा इस घटना ने बंगाल की राजनीति में एक नई जंग की शुरुआत कर दी है।
