अंदलीब अख्तर / नई दिल्ली

विपक्षी गठबंधन INDIA का अहम घटक कांग्रेस पार्टी इस समय एक नाजुक राजनीतिक मोड़ पर खड़ी है। तमिलनाडु में TVK-नेतृत्व वाली नई सरकार को समर्थन देने या अपने पुराने सहयोगी DMK के साथ बने रहने को लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है। बदले हुए विधानसभा समीकरणों और संसद की जटिल अंकगणित ने इस फैसले को और भी संवेदनशील बना दिया है।

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि TVK के साथ जाने से DMK के साथ उसका दशकों पुराना गठबंधन कमजोर पड़ सकता है। DMK, जिसके पास लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 10 सदस्य हैं, दक्षिण भारत की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ है। वहीं, INDIA गठबंधन की एक अन्य प्रमुख पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी संसद में अपने 29 लोकसभा और 13 राज्यसभा सदस्यों के साथ विपक्ष को मजबूती प्रदान करती है।

संसद की मौजूदा स्थिति कांग्रेस के लिए इस निर्णय को और महत्वपूर्ण बनाती है। NDA गठबंधन लोकसभा में लगभग 293 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत में है, जबकि राज्यसभा में उसके पास करीब 118–120 सदस्य हैं। हालांकि, उच्च सदन में अभी भी उसे महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ती है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि DMK किसी राजनीतिक पुनर्संरेखण के तहत NDA का समर्थन करता है, तो सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। लोकसभा में NDA की संख्या लगभग 315 तक पहुंच सकती है, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 128–130 के करीब पहुंचकर उसे विधायी कार्यों में अधिक सहजता प्रदान करेगा।

ऐसी स्थिति में INDIA गठबंधन की प्रभावशीलता पर बड़ा असर पड़ेगा और कांग्रेस व TMC जैसे दल राजनीतिक रूप से हाशिये पर जा सकते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस अपने हर कदम को बेहद सावधानी से तय करना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इस पूरे मुद्दे को अपनी “धर्मनिरपेक्ष” राजनीति के दायरे में पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी नेतृत्व इसे संवैधानिक मूल्यों और समावेशी शासन के नजरिए से जोड़कर व्यापक विपक्षी एकता बनाए रखने की कोशिश करेगा।

हालांकि, अगर कांग्रेस TVK सरकार में भागीदारी या समर्थन का रास्ता चुनती है, तो DMK के साथ उसके संबंधों में खटास आना तय माना जा रहा है। इससे न केवल तमिलनाडु बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की एकजुटता प्रभावित हो सकती है।

आने वाले दिनों में कांग्रेस का रुख यह तय करेगा कि वह तात्कालिक राजनीतिक अवसर को प्राथमिकता देती है या दीर्घकालिक गठबंधन राजनीति को। यह फैसला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा पर भी गहरा असर डालेगा।