ज़ाकिर हुसैन / ढाका

ढाका: बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बीएनपी ने तीस्ता जल बंटवारे के लंबे समय से लंबित समझौते में देरी के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने राज्य में बीजेपी की जीत का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के बीच संबंध मजबूत होंगे और तीस्ता मुद्दे पर प्रगति संभव हो सकेगी।

बीएनपी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन से तीस्ता समझौते को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने कहा कि पहले ममता बनर्जी इस परियोजना में बाधा बन रही थीं, लेकिन अब बीजेपी सरकार बनने से तीस्ता बैराज समझौते को लागू करने में मदद मिल सकती है।

हेलाल ने कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद बीएनपी और बीजेपी के बीच तीस्ता जैसे मुद्दों पर समान दृष्टिकोण है, जो दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

इस बीच, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खालिलुर रहमान ने भी मंगलवार को कहा कि 2011 में हुए सैद्धांतिक तीस्ता समझौते पर मौजूदा परिस्थितियों में फिर से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अभी नई सरकार का गठन होना बाकी है, इसलिए भविष्य की दिशा को लेकर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।

उन्होंने 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान हुए समझौते का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि उसे वर्तमान हालात में फिर से देखा जा सकता है।

तीस्ता जल बंटवारा समझौता वर्षों से लंबित है, क्योंकि पश्चिम बंगाल ने अपने जल संसाधनों की जरूरतों का हवाला देते हुए इसका विरोध किया है। 2011 के प्रस्ताव के तहत बांग्लादेश को 37.5% और भारत को 42.5% पानी देने की योजना थी, लेकिन राज्य सरकार के विरोध के कारण यह लागू नहीं हो सका। इससे पहले 1983 में एक अस्थायी व्यवस्था के तहत 36% पानी बांग्लादेश, 39% भारत और 25% बाद में तय करने का प्रस्ताव था, जो कभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया।

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, लेकिन अब तक केवल गंगा जल संधि और कुशियारा नदी समझौते पर ही हस्ताक्षर हो सके हैं। तीस्ता और फेनी नदी पर बातचीत अभी जारी है। 1996 की गंगा संधि भी इस वर्ष समाप्त होने वाली है।

खालिलुर रहमान ने चीन यात्रा से पहले कहा कि वह वहां चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ तीस्ता नदी के समग्र प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना पर चर्चा करेंगे। उन्होंने इसे क्षेत्र के लोगों के लिए “जीवन और मृत्यु का सवाल” बताया।

भारत की ओर से कथित “पुश-इन” की रिपोर्टों पर उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाएगा और आवश्यक कदम उठाएगा।

वहीं, विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने बंगाल चुनाव को भारत का “आंतरिक मामला” बताया, जबकि बीएनपी के एक अन्य नेता शैरुल कबीर खान ने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य दोनों में बीजेपी की सरकार होने से ढाका-दिल्ली संबंधों में सकारात्मक प्रगति होगी।

हालांकि, ढाका के कुछ विश्लेषकों ने शुभेंदु अधिकारी के अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों पर दिए गए बयानों और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के समर्थन को लेकर चिंता भी जताई है।