Last Updated on March 6, 2026 11:13 pm by INDIAN AWAAZ

BIZ DESK

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला दिया है। इस भू-राजनीतिक संकट के असर से भारतीय शेयर बाजार में भी भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांकों ने एक वर्ष से अधिक समय में अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता और निवेशकों की बढ़ती चिंता के कारण पूरे सप्ताह बाजार दबाव में रहा।

सप्ताह के दौरान BSE Sensex करीब 2,370 अंक गिर गया, जबकि Nifty 50 में 2.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 78,918.90 पर बंद हुआ, जो 1,097 अंक (1.37%) की गिरावट दर्शाता है। वहीं निफ्टी 24,450.45 पर बंद हुआ और इसमें 315.45 अंक (1.27%) की गिरावट रही।

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति में संभावित बाधा की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसके चलते बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली।


होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव से तेल बाजार में उछाल

बाजार में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका–ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई चिंताएँ रहीं। रिपोर्टों के अनुसार Strait of Hormuz — जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है — के आसपास जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

इस स्थिति का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि West Texas Intermediate लगभग 8.5 प्रतिशत बढ़कर 81 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह 2020 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी उछाल मानी जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो सकती है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है।


निवेशकों में बढ़ी घबराहट, वोलैटिलिटी में उछाल

बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत India VIX में तेज उछाल से मिला। यह सूचकांक शुक्रवार को 11 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 19.88 पर बंद हुआ, जो निवेशकों के बीच बढ़ती घबराहट को दर्शाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो भारत की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ सकती है, चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है और मौद्रिक नीति को लेकर Reserve Bank of India के लिए भी चुनौती पैदा हो सकती है।


बाजार की चौड़ाई कमजोर

सप्ताह के दौरान बाजार में गिरावट व्यापक रही। Bombay Stock Exchange में गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़त वाले शेयरों से काफी अधिक रही।

  • 2,396 शेयरों में गिरावट
  • 1,812 शेयरों में बढ़त
  • 258 शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर
  • 69 शेयर 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि केवल कुछ बड़े शेयरों तक ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला।


बैंकिंग और पर्यटन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित

क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो अधिकांश सेक्टरों में गिरावट रही।

बैंकिंग क्षेत्र:
Nifty PSU Bank Index में सप्ताह के दौरान 6.5 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। इसके पीछे एक कारण रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक ऋणों के साथ बीमा उत्पादों की बिक्री के नियमों को सख्त करने का प्रस्ताव भी माना जा रहा है।

शुक्रवार को

  • Nifty Private Bank Index में 2.3% गिरावट
  • Nifty Financial Services Index में 2.1% गिरावट
  • PSU बैंक इंडेक्स में लगभग 2% गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान ICICI Bank, State Bank of India और Axis Bank जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों में तेज गिरावट आई।

पर्यटन और यात्रा क्षेत्र:
तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अस्थिरता के कारण India Tourism Index में भी 5.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

रक्षा क्षेत्र में तेजी:
इसके विपरीत, बढ़ते वैश्विक तनाव के कारण रक्षा कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। India Defence Index में सप्ताह के दौरान 4.85 प्रतिशत की बढ़त देखी गई।


किन शेयरों में रही हलचल

निफ्टी 50 में कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों में बढ़त भी दर्ज की गई।

बढ़त वाले शेयर

  • Bharat Electronics Limited: 2.52% बढ़त
  • Oil and Natural Gas Corporation: 1.28% बढ़त
  • Reliance Industries: 1.27% बढ़त
  • NTPC Limited: 0.82% बढ़त
  • Hindalco Industries: 0.59% बढ़त

गिरावट वाले शेयर

  • ICICI Bank: 3.13% गिरावट
  • Shriram Finance: 2.77% गिरावट
  • State Bank of India: 2.54% गिरावट
  • Axis Bank: 2.54% गिरावट

रुपये पर भी दबाव

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। Indian Rupee शुक्रवार को 13 पैसे कमजोर होकर 91.71 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

विश्लेषकों के अनुसार तेल आयात बिल बढ़ने से रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में इसका दायरा 91.25 से 92.50 के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है।


सोने में स्थिरता

अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों पर भी नजर बनाए रखी। घरेलू बाजार में सोना ₹1,59,500 से ₹1,60,000 के दायरे में रहा, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगभग $5,100 प्रति औंस के आसपास बनी रहीं।


आगे क्या?

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार का रुख फिलहाल सतर्क और कमजोर बना हुआ है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि जब तक निफ्टी 25,000 के स्तर को मजबूती से पार नहीं करता, तब तक बाजार में “रैली पर बिकवाली” की रणनीति हावी रह सकती है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि निफ्टी 24,300–24,000 के समर्थन स्तर से नीचे जाता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है।

आने वाले सप्ताह में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक संकेतक भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।