
हमारे बिजनेस संवाददाता से
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र गिरावट जारी रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा, जिसके चलते निफ्टी 24,100 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। मासिक डेरिवेटिव एक्सपायरी, हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली, अमेरिका में महंगाई के ऊंचे स्तर और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की उम्मीद ने बाजार को कुछ राहत दी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास आपूर्ति में संभावित व्यवधान कम होने की उम्मीदों के बीच तेल की कीमतों पर दबाव रहा। दूसरी ओर, विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशक 26 अगस्त को शुद्ध खरीदार रहे, जिससे बाजार को कुछ समर्थन मिला।
दिन के कारोबार के अंत में एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 539.35 अंक यानी 0.70 प्रतिशत गिरकर 76,933.59 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 50 सूचकांक 116.90 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,090.85 अंक पर आ गया। लगातार दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 0.93 प्रतिशत, जबकि निफ्टी लगभग 1 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल और रिलायंस ने खींचा बाजार
गुरुवार की गिरावट में बड़े भार वाले शेयरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एचडीएफसी बैंक 2.23 प्रतिशत, भारती एयरटेल 1.25 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज 1.22 प्रतिशत टूटे। इन शेयरों में गिरावट का सीधा असर निफ्टी के प्रदर्शन पर पड़ा क्योंकि इन कंपनियों का सूचकांक में महत्वपूर्ण भार है।
हालांकि, व्यापक बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.38 प्रतिशत और बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स केवल 0.04 प्रतिशत नीचे रहा। इससे संकेत मिलता है कि गुरुवार को मुख्य दबाव बड़ी कंपनियों के शेयरों पर केंद्रित रहा और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में तुलनात्मक रूप से बेहतर मजबूती बनी रही।
फिर भी बाजार की चौड़ाई कमजोर रही। बीएसई पर कुल 1,824 शेयर बढ़े, जबकि 2,491 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई और 211 शेयर अपरिवर्तित रहे। यानी गिरावट केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि बाजार के व्यापक हिस्से में भी बिकवाली का दबाव मौजूद था।
बाजार की निकट अवधि की अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स 5.06 प्रतिशत बढ़कर 11.10 पर पहुंच गया। मासिक एक्सपायरी के कारण कारोबार में उतार-चढ़ाव बढ़ने के बीच वीआईएक्स में तेजी ने निवेशकों की बढ़ती सतर्कता को दर्शाया।
एक्सपायरी और मुनाफावसूली का दबाव
गुरुवार के कारोबार में मासिक डेरिवेटिव एक्सपायरी ने बाजार की चाल को प्रभावित किया। एक्सपायरी के दौरान ट्रेडर अपनी पोजीशन को समायोजित करते हैं, जिससे शेयरों और सूचकांकों में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा, हाल की बाजार गतिविधियों के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और महंगाई को लेकर अनिश्चितता ने भी जोखिम लेने की क्षमता को सीमित किया।
अमेरिका से आए महंगाई के आंकड़े भी निवेशकों के लिए राहत देने वाले नहीं रहे। जुलाई में अमेरिका का पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई प्राइस इंडेक्स सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत बढ़ा, जो जून के समान स्तर था और बाजार के 3.6 प्रतिशत के अनुमान से अधिक रहा। महीने-दर-महीने आधार पर इसमें 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर कोर पीसीई महंगाई सालाना आधार पर 3.3 प्रतिशत और मासिक आधार पर 0.2 प्रतिशत बढ़ी।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई की स्थिति का आकलन करने के लिए पीसीई को प्रमुख संकेतकों में शामिल करता है। ऐसे में महंगाई का अपेक्षाकृत ऊंचा स्तर अमेरिकी मौद्रिक नीति में जल्द नरमी की उम्मीदों को प्रभावित कर सकता है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत रह सकते हैं तथा उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी प्रवाह पर दबाव पड़ सकता है।
कच्चे तेल में नरमी से कुछ राहत
ऊर्जा बाजार से भारतीय शेयर बाजार को कुछ राहत मिली। अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 27 सेंट यानी 0.31 प्रतिशत बढ़कर 87.21 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम पर बाजार की नजर बनी हुई है। दुनिया के प्रमुख तेल परिवहन मार्गों में शामिल इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
यदि बातचीत में प्रगति होती है और आपूर्ति बाधित होने का जोखिम कम होता है, तो कच्चे तेल में जोखिम प्रीमियम घट सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अपेक्षाकृत स्थिर या कम तेल कीमतें सकारात्मक होती हैं। इससे आयात बिल, मुद्रास्फीति, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर दबाव कम हो सकता है।
हालांकि, गुरुवार को तेल से मिलने वाली राहत बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
रुपया कमजोर, सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ी
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया भी दबाव में रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.5500 के आसपास कारोबार करता रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.4400 पर बंद हुआ था।
रुपये की कमजोरी का कंपनियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। निर्यात आधारित कंपनियों को कमजोर रुपये से कुछ लाभ हो सकता है, जबकि आयातित कच्चे माल, ऊर्जा, मशीनरी और अन्य इनपुट पर निर्भर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
बॉन्ड बाजार में भी सतर्कता दिखाई दी। भारत की 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी प्रतिभूति की यील्ड 6.851 प्रतिशत से बढ़कर 6.884 प्रतिशत हो गई।
अमेरिकी बाजार में भी बॉन्ड यील्ड ऊंची रही। अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.673 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि डॉलर इंडेक्स 0.06 प्रतिशत बढ़कर 99.14 रहा।
ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आम तौर पर उभरते बाजारों के लिए चुनौती बनती है, क्योंकि वैश्विक निवेशक विकसित बाजारों में अपेक्षाकृत आकर्षक रिटर्न मिलने पर अपनी पूंजी का पुनर्विन्यास कर सकते हैं।
एशियाई बाजारों में तकनीकी शेयरों की चमक
वैश्विक बाजारों में गुरुवार को मिला-जुला रुख रहा। अधिकांश एशियाई बाजार बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में कमजोरी देखी गई।
एशियाई बाजारों में तकनीकी शेयरों को अमेरिकी चिप निर्माता एनवीडिया के मजबूत तिमाही नतीजों से समर्थन मिला। कंपनी ने दूसरी तिमाही में करीब 96.22 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जो एक साल पहले की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
कंपनी का समायोजित प्रति शेयर लाभ 2.22 डॉलर रहा। डेटा सेंटर कारोबार से राजस्व करीब 89 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर दोगुने से अधिक है।
एनवीडिया ने अगली तिमाही के लिए करीब 108 अरब डॉलर राजस्व, प्लस या माइनस 2 प्रतिशत, का अनुमान दिया। यह वॉल स्ट्रीट के लगभग 104.2 अरब डॉलर के औसत अनुमान से ऊपर है।
नतीजों के बाद विस्तारित कारोबार में एनवीडिया के शेयर लगभग 4.7 प्रतिशत चढ़े। मजबूत मार्गदर्शन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक मांग को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।
इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इसका सकारात्मक असर सीमित रहा। इससे स्पष्ट हुआ कि घरेलू बाजार में फिलहाल वैश्विक तकनीकी तेजी की तुलना में एक्सपायरी, मुनाफावसूली और बड़े शेयरों में बिकवाली अधिक प्रभावी कारक हैं।
वॉल स्ट्रीट में मामूली गिरावट
अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.21 प्रतिशत, एसएंडपी 500 0.02 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट 0.08 प्रतिशत नीचे रहा।
निवेशक अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और एनवीडिया के नतीजों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते रहे। एनवीडिया के नतीजे अमेरिकी बाजार बंद होने के बाद जारी हुए।
बैंक ऑफ कोरिया ने बढ़ाई ब्याज दर
दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दी। यह लगातार दूसरी ब्याज दर वृद्धि है।
बैंक ऑफ कोरिया ने महंगाई के दबाव और वित्तीय स्थिरता से जुड़े जोखिमों को देखते हुए मौद्रिक नीति को कड़ा किया। केंद्रीय बैंक ने 2026 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान भी 2.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.3 प्रतिशत कर दिया।
इस कदम से यह संकेत मिलता है कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई और वित्तीय स्थिरता अब भी केंद्रीय बैंकों के लिए महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है।
उधर, चीन में जुलाई में औद्योगिक कंपनियों का मुनाफा सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि यह इस साल की सबसे धीमी वृद्धि दर रही। जनवरी-जुलाई अवधि में औद्योगिक मुनाफा 17.6 प्रतिशत बढ़ा, जो पहली छमाही में दर्ज 18.7 प्रतिशत की वृद्धि से कम है। इससे चीन के औद्योगिक क्षेत्र में गति कुछ धीमी पड़ने के संकेत मिले।
चुनिंदा शेयरों में तेज हलचल
टाटा पावर कंपनी 3.30 प्रतिशत गिर गई। सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट ने Kleros Capital Partners के साथ विवाद में मध्यस्थता संबंधी फैसलों को चुनौती देने वाली कंपनी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मध्यस्थ न्यायाधिकरण के बहुमत के फैसले में प्राकृतिक न्याय या निष्पक्ष सुनवाई के नियम का उल्लंघन नहीं हुआ।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी 4.03 प्रतिशत गिरकर 3,093 रुपये पर आ गई। शुरुआती कारोबार में बड़े ब्लॉक सौदे के बाद शेयर पर दबाव रहा। कंपनी के प्रवर्तक Prudential Corporation Holdings ने 2 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी।
इसके विपरीत बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग कॉरपोरेशन 11.63 प्रतिशत उछल गया। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की पूर्ववर्ती सिंगमपट्टी चाय संपदा से जुड़ी 4,655.24 करोड़ रुपये की लीज किराया देनदारी के संबंध में अपने पहले के अवलोकन को वापस लेने की अनुमति दी।
पाइन लैब्स 1.42 प्रतिशत बढ़कर 169.25 रुपये पर पहुंचा। एक विदेशी ब्रोकरेज ने कंपनी पर कवरेज शुरू करते हुए ‘बाय’ रेटिंग और 200 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया, जो पिछले बंद भाव से लगभग 20 प्रतिशत संभावित बढ़त दर्शाता है।
किटेक्स गारमेंट्स 1.74 प्रतिशत बढ़ा, हालांकि इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने कंपनी की दीर्घकालिक रेटिंग को ‘IND A’ से घटाकर ‘IND BBB+’ कर दिया और आउटलुक नकारात्मक रखा। अल्पकालिक रेटिंग भी ‘IND A1’ से घटाकर ‘IND A2’ कर दी गई।
नाहर स्पिनिंग मिल्स 0.87 प्रतिशत गिरा। क्रिसिल रेटिंग्स ने कंपनी की बैंक सुविधाओं और कमर्शियल पेपर की रेटिंग ‘Crisil A/Stable/Crisil A1’ पर बरकरार रखी।
स्किपर 1.73 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन परियोजनाओं के लिए 1,305 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिलने की घोषणा की।
बजाज फाइनेंस 0.18 प्रतिशत गिरा। कंपनी ने निजी प्लेसमेंट के जरिए 5,000 करोड़ रुपये जुटाए। यह राशि 5 लाख सुरक्षित, रिडीमेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करके जुटाई गई। प्रत्येक डिबेंचर का अंकित मूल्य 1 लाख रुपये है और इन पर सालाना 8.15 प्रतिशत कूपन है। इनकी अवधि 10 वर्ष है और मूलधन का भुगतान 27 अगस्त 2036 को होना है।
रेडटेप 0.48 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी की वार्षिक आम बैठक में शुजा मिर्जा को 1 अप्रैल 2027 से पांच वर्ष के लिए प्रबंध निदेशक के रूप में फिर नियुक्त करने को मंजूरी दी गई।
आईपीओ बाजार में जारी जोरदार गतिविधि
द्वितीयक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद प्राथमिक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है। हालांकि विभिन्न आईपीओ में सब्सक्रिप्शन को लेकर बड़ा अंतर देखने को मिला।
ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज के आईपीओ को 27 अगस्त शाम 4:30 बजे तक 7,98,37,212 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि पेशकश 6,32,05,127 शेयरों की थी। इस तरह इश्यू 1.26 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ की कीमत सीमा 78 से 82 रुपये प्रति शेयर है। न्यूनतम 182 शेयरों के लिए बोली लगाई जा सकती है और इश्यू 31 अगस्त को बंद होगा।
अन्नू प्रोजेक्ट्स का आईपीओ 0.86 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसे 1,52,28,501 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 1,76,83,000 शेयर पेश किए गए हैं। इश्यू 25 अगस्त को खुला था और 28 अगस्त को बंद होगा। कीमत सीमा 94 से 99 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 151 शेयरों की है।
स्काईवेज एयर सर्विसेज का आईपीओ निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा। इसे 70.94 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कुल 2,09,85,50,200 शेयरों के लिए बोलियां आईं, जबकि पेशकश 2,95,83,600 शेयरों की थी। इश्यू की कीमत सीमा 131 से 138 रुपये है और यह 27 अगस्त को बंद हो रहा है।
सिम्बियोटेक फार्मालैब का आईपीओ 71.13 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसे 93,36,33,525 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि पेशकश 1,31,24,929 शेयरों की थी। कीमत सीमा 938 से 988 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 15 शेयरों की है।
सबसे ज्यादा मांग हाई-टेक इंजीनियर्स के आईपीओ में दिखाई दी। इसे 242.98 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। कुल 4,40,88,82,187 शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं, जबकि पेशकश केवल 1,81,45,406 शेयरों की थी। कीमत सीमा 50 से 53 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 283 शेयरों की है। इश्यू 24 अगस्त को खुला था और 27 अगस्त को बंद हो रहा है।
आगे बाजार की दिशा पर नजर
भारतीय शेयर बाजार के लिए निकट अवधि में तीन प्रमुख कारक महत्वपूर्ण रहेंगे—वैश्विक ब्याज दरों की दिशा, संस्थागत निवेशकों का रुख और बाजार के बड़े भार वाले शेयरों का प्रदर्शन।
निफ्टी का 24,100 के नीचे बंद होना तकनीकी और मनोवैज्ञानिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके साथ इंडिया वीआईएक्स में वृद्धि से संकेत मिलता है कि निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी बाजार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित गिरावट यह भी दर्शाती है कि निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी महंगाई, ऊंची ट्रेजरी यील्ड, डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की दिशा भारतीय बाजार के लिए प्रमुख संकेतक बने रहेंगे।
कुल मिलाकर, गुरुवार का कारोबार यह दर्शाता है कि भारतीय शेयर बाजार की दीर्घकालिक बुनियादी तस्वीर भले ही मजबूत बनी हुई हो, लेकिन निकट अवधि में वैश्विक मैक्रो आर्थिक संकेतक, बड़े शेयरों में मुनाफावसूली, डेरिवेटिव एक्सपायरी और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। आने वाले सत्रों में 24,100 के स्तर पर निफ्टी की प्रतिक्रिया और बड़े भार वाले शेयरों में बिकवाली की तीव्रता बाजार की अगली दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी।
