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वैश्विक बाजारों में बढ़ती ब्याज दरों की आशंका, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज उछाल और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने गुरुवार को घरेलू शेयर बाजारों पर भारी दबाव डाला। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और ब्रेंट क्रूड के 102 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई। इसके साथ ही बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में तेज बिकवाली ने प्रमुख सूचकांकों की गिरावट को और बढ़ा दिया।

बीएसई सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 73,580.54 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,063.10 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 23,100 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया।

बाजार में गिरावट व्यापक रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। इससे संकेत मिला कि दबाव केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निवेशकों ने व्यापक स्तर पर जोखिम कम किया।

बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भारी बिकवाली

गुरुवार के कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के शेयर प्रमुख दबाव में रहे। बजाज फाइनेंस 5.87 प्रतिशत टूट गया और निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहा। एक्सिस बैंक में 4.56 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 2.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

बड़े पूंजीकरण वाले शेयरों में बिकवाली का सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। वित्तीय कंपनियों के शेयरों में गिरावट ऐसे समय आई जब वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेज वृद्धि से पूंजी की लागत और ब्याज दरों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

व्यापक बाजार में बीएसई मिडकैप इंडेक्स 2.07 प्रतिशत और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 1.28 प्रतिशत गिर गया।

बीएसई पर बाजार का रुख भी कमजोर रहा। कुल 2,884 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 1,473 शेयरों में तेजी रही। 227 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

बाजार में उतार-चढ़ाव का सूचकांक इंडिया VIX भी तेजी से बढ़ा। एनएसई इंडिया VIX 22.08 प्रतिशत उछलकर 12.63 पर पहुंच गया। VIX में यह वृद्धि निकट अवधि में बाजार में अधिक अस्थिरता की निवेशकों की आशंका को दर्शाती है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई ब्याज दर की चिंता

गुरुवार की बिकवाली के पीछे सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक कारकों में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज वृद्धि रही। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 0.20 प्रतिशत बढ़कर 5.128 प्रतिशत पर पहुंच गई।

यह स्तर 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़ों और एक कमजोर ट्रेजरी नीलामी के बाद बॉन्ड यील्ड में तेजी आई।

सितंबर में अमेरिका के निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधि पांच साल से अधिक समय के सबसे तेज स्तर पर पहुंच गई। इसके साथ ही कीमतों का दबाव भी बढ़ा। एसएंडपी ग्लोबल फ्लैश यूएस कंपोजिट पीएमआई अगस्त के 56.0 से बढ़कर सितंबर में 58.4 हो गया। यह पांच साल से अधिक समय में इसका सबसे ऊंचा स्तर है।

मजबूत आर्थिक गतिविधि और बढ़ते मूल्य दबाव ने बाजार में यह आशंका बढ़ाई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रखना पड़ सकता है। इसी वजह से एक और दर वृद्धि की बाजार उम्मीदों को बल मिला।

करीब 70 अरब डॉलर की पांच-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नीलामी में कमजोर मांग ने भी यील्ड बढ़ाने में भूमिका निभाई।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से वैश्विक बॉन्ड बाजारों पर दबाव बढ़ा और उभरते बाजारों से पूंजी प्रवाह को लेकर भी चिंताएं बढ़ीं।

कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि ने भारतीय बाजार की चिंता और बढ़ा दी। नवंबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 1.65 डॉलर यानी 1.60 प्रतिशत बढ़कर 104.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ीं और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की ऊंची कीमतें आयात बिल, मुद्रास्फीति, चालू खाते और रुपये की विनिमय दर पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा परिवहन, रसायन, पेंट, विमानन और अन्य ईंधन-निर्भर क्षेत्रों की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है।

अगर तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं तो मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं और इसका असर ब्याज दरों की दिशा को लेकर बाजार की अपेक्षाओं पर पड़ सकता है।

भारतीय बॉन्ड यील्ड भी बढ़ी

घरेलू बॉन्ड बाजार में भी गुरुवार को दबाव देखने को मिला। भारत सरकार के 10-वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 0.89 प्रतिशत बढ़कर 7.111 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछला बंद स्तर 7.048 प्रतिशत था।

भारतीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी। वैश्विक ब्याज दरों का माहौल भारतीय वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

ऊंची बॉन्ड यील्ड से कंपनियों और सरकार के लिए कर्ज की लागत प्रभावित हो सकती है तथा ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों पर इसका असर पड़ सकता है।

रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया भी दबाव में रहा। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.9700 के स्तर पर था, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.7300 पर बंद हुआ था।

कच्चे तेल की ऊंची कीमत, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी जैसे कारक उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव डाल सकते हैं।

रुपये में कमजोरी का असर कंपनियों पर उनके कारोबार की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। आयात पर निर्भर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जबकि निर्यातकों को विदेशी मुद्रा में मिलने वाले राजस्व का रुपये में अधिक मूल्य मिल सकता है।

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.10 प्रतिशत बढ़कर 101.24 पर पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को मापता है।

सोने में भी गिरावट

एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना वायदा 0.53 प्रतिशत गिरकर 1,50,469 रुपये पर आ गया।

सोने की कीमतों पर डॉलर और वैश्विक ब्याज दरों में बदलाव का प्रभाव पड़ता है। गुरुवार को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में मजबूती के बीच सोने पर दबाव देखने को मिला।

वैश्विक बाजारों में भी दबाव

भारतीय बाजार में गिरावट के बीच वैश्विक बाजारों का रुख भी कमजोर रहा। गुरुवार को अमेरिकी डॉव जोन्स इंडेक्स के वायदा कारोबार में 149 अंक की गिरावट थी, जो अमेरिकी बाजारों में कमजोर शुरुआत का संकेत दे रही थी।

ब्रेंट क्रूड की तेजी के बीच अधिकांश यूरोपीय शेयर बाजार भी गिरावट में रहे। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को अपनी प्रमुख ब्याज दर 0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखी।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। निवेशकों की नजर मध्य पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-चीन के बीच प्रस्तावित उच्चस्तरीय वार्ता पर रही।

अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार को भी गिरावट के साथ बंद हुए थे। नैस्डैक कंपोजिट 1.1 प्रतिशत गिरा। इससे पहले वह लगातार दो सत्रों में रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ था। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.7 प्रतिशत और एसएंडपी 500 में 0.8 प्रतिशत की गिरावट रही।

अमेरिका-चीन वार्ता पर बाजार की नजर

वैश्विक निवेशकों का ध्यान अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों पर भी बना रहा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार को तीन दिवसीय राजकीय यात्रा के लिए वाशिंगटन पहुंचे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनका स्वागत किया।

दोनों नेताओं की गुरुवार को होने वाली वार्ता में व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित कई मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चीन के उपप्रधानमंत्री हे लाइफेंग से भी मुलाकात की। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने व्यापारिक संघर्षविराम को दो महीने बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक करने पर सहमति जताई।

अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में किसी भी बदलाव का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, तकनीकी कंपनियों, विनिर्माण और वैश्विक आर्थिक वृद्धि की धारणा पर पड़ सकता है।

बीमा शेयरों में भारी गिरावट

बीमा वितरण से जुड़े नियामकीय प्रस्तावों के बाद गुरुवार को बीमा क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली हुई।

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण से संबंधित नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इनमें प्रबंधन खर्च यानी Expenses of Management की सीमा कम करना, कमीशन पर नियंत्रण कड़ा करना और पॉलिसीधारकों के लिए अधिक पारदर्शिता जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

ऑनलाइन बीमा मार्केटप्लेस पॉलिसीबाजार का संचालन करने वाली पीबी फिनटेक के शेयर 36 प्रतिशत टूटकर 1,207.20 रुपये पर आ गए। एक अन्य बीमा वितरक टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्यूशंस में 20 प्रतिशत की गिरावट आई और शेयर 109.10 रुपये पर बंद हुआ।

एक विदेशी ब्रोकरेज के अनुसार, IRDAI के प्रस्तावित बदलाव पीबी फिनटेक और टर्टलमिंट के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। ब्रोकरेज ने अनुमान लगाया कि नए कारोबार पर कमीशन दरों में 10 प्रतिशत की कटौती से इन कंपनियों की आय में 10-12 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

बीमा कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस 6.16 प्रतिशत, न्यू इंडिया एश्योरेंस 5.65 प्रतिशत और निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस 5.15 प्रतिशत गिर गए। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस में 4.13 प्रतिशत की गिरावट रही।

जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया 1.38 प्रतिशत और स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस 0.40 प्रतिशत नीचे रहे। एलआईसी में 0.37 प्रतिशत तथा केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस में 0.09 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई।

चुनिंदा शेयरों में कंपनी आधारित हलचल

व्यापक बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ शेयरों में कंपनी-विशेष खबरों के कारण तेजी रही।

आईओएल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स 2.27 प्रतिशत गिरा। कंपनी ने बताया कि उसके उत्पाद ट्राईएसिटिन को लागू ईयू REACH व्यवस्था के तहत पंजीकरण मिल गया है।

मैक्स एस्टेट्स 1.55 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने बताया कि उसने गाजियाबाद में करीब 9.76 एकड़ जमीन के लिए प्रस्तावित ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट को लेकर बाध्यकारी समझौता ज्ञापन किया है। पूंजी-कुशल मॉडल पर आधारित इस परियोजना में करीब 15 लाख वर्ग फुट सुपर बिल्ट-अप विकास क्षमता है। परियोजना का अनुमानित सकल विकास मूल्य 2,500-3,000 करोड़ रुपये है।

विक्रान इंजीनियरिंग 9.03 प्रतिशत उछला। कंपनी को पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से करीब 153.76 करोड़ रुपये का नया ऑर्डर मिला है। यह 400 केवी AIS एक्सटेंशन सबस्टेशन पैकेज से संबंधित है।

जगसनपाल फार्मास्युटिकल्स में 9.47 प्रतिशत की तेजी आई। कंपनी ने ग्रुप फार्मास्युटिकल्स के वेलनेस पोर्टफोलियो को स्लंप सेल के जरिए एक चालू कारोबार के रूप में अधिग्रहित करने के लिए बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट किया है।

इस सौदे के तहत शुरुआत में 23.7 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। वित्त वर्ष 2027-28 में बिक्री के आधार पर 23 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त भुगतान किया जा सकता है। इस तरह कुल सौदे की अधिकतम कीमत 46.7 करोड़ रुपये हो सकती है। लेन-देन 1 नवंबर 2026 या उससे पहले पूरा होने की उम्मीद है।

जीनसिस इंटरनेशनल कॉरपोरेशन 0.49 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी को अहमदाबाद के लिए 283 करोड़ रुपये का विश्व बैंक वित्तपोषित अनुबंध मिला है। इसके तहत करीब 625 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का 3डी डिजिटल मैप और स्पेशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इसमें जमीन के भूखंड, संपत्तियां, सड़कें, जल नेटवर्क, सीवरेज, स्टॉर्मवॉटर ड्रेनेज और अन्य नागरिक सुविधाओं की डिजिटल मैपिंग की जाएगी।

NSE के शेयरों की मजबूत शुरुआत

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया के शेयर बीएसई पर 1,818 रुपये पर बंद हुए, जो 1,785 रुपये के इश्यू मूल्य से 1.85 प्रतिशत अधिक है।

शेयर ने 1,800 रुपये पर शुरुआत की थी, जो इश्यू मूल्य से 0.84 प्रतिशत अधिक था। कारोबार के दौरान यह 1,878 रुपये के उच्चतम और 1,800 रुपये के न्यूनतम स्तर तक गया। बीएसई पर कंपनी के 5.15 करोड़ से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

सोनासेलेक्शन इंडिया के शेयर भी इश्यू मूल्य के मुकाबले प्रीमियम पर बंद हुए। शेयर 107.09 रुपये पर बंद हुआ, जो 99 रुपये के इश्यू मूल्य से 8.17 प्रतिशत अधिक है। शेयर ने 102 रुपये पर कारोबार शुरू किया था। कारोबार के दौरान यह 107.09 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। बीएसई पर 2.54 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

प्राथमिक बाजार में मिला-जुला रुझान

दूसरी ओर, प्राथमिक बाजार में आईपीओ गतिविधि जारी रही, हालांकि अलग-अलग इश्यू में निवेशकों की प्रतिक्रिया अलग रही।

ए-वन स्टील्स इंडिया के आईपीओ को 24 सितंबर शाम 4:48 बजे तक 42,22,958 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 73,84,934 शेयर बिक्री के लिए रखे गए थे। इस तरह इश्यू 0.57 गुना सब्सक्राइब हुआ। इश्यू 24 सितंबर को खुला और 28 सितंबर को बंद होगा। मूल्य दायरा 385-405 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 37 शेयरों की है।

मनीव्यू के आईपीओ को 32,35,61,700 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 23,25,24,175 शेयरों की पेशकश की गई थी। इश्यू 1.39 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 32-34 रुपये और न्यूनतम बोली 441 शेयरों की है। इश्यू 28 सितंबर को बंद होगा।

एलिवेट कैंपसेज को 76,90,657 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 3,36,73,468 शेयर पेश किए गए थे। इश्यू 0.23 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 343-362 रुपये है और न्यूनतम बोली 41 शेयरों की है। इश्यू 25 सितंबर को बंद होगा।

एड्रोइट इंडस्ट्रीज (इंडिया) के इश्यू को सबसे अधिक प्रतिक्रिया मिली। इसे 78,72,900 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 14,02,26,522 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह इश्यू 17.81 गुना सब्सक्राइब हुआ। मूल्य दायरा 126-134 रुपये प्रति शेयर और न्यूनतम बोली 111 शेयरों की है।

स्वास्तिका इंफ्रा को 63,35,001 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 1,03,08,951 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं और इश्यू 1.63 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 175-185 रुपये है तथा न्यूनतम बोली 81 शेयरों की है।

आर्मीक्यू इन्फोटेक को 74,30,356 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 85,91,680 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू 1.16 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 350-375 रुपये और न्यूनतम बोली 40 शेयरों की है।

वर्मोरा ग्रैनिटो को 3,39,02,899 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 5,33,07,295 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू 1.57 गुना सब्सक्राइब हुआ। मूल्य दायरा 140-148 रुपये और न्यूनतम बोली 101 शेयरों की है। इश्यू 24 सितंबर को बंद हो रहा है।

आगे वैश्विक संकेतों पर नजर

गुरुवार की तेज गिरावट ने एक बार फिर दिखाया कि घरेलू शेयर बाजार फिलहाल वैश्विक बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल, डॉलर और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5 प्रतिशत से ऊपर पहुंचने, ब्रेंट क्रूड के 104 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने और रुपये में कमजोरी ने बाजार पर एक साथ दबाव बनाया। इसके साथ ही इंडिया VIX में तेज वृद्धि और बाजार में कमजोर भागीदारी ने व्यापक स्तर पर जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को रेखांकित किया।

आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-चीन संबंधों, मध्य पूर्व के घटनाक्रम और रुपये की चाल पर रहेगी। घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन, नियामकीय फैसले, बॉन्ड यील्ड और आईपीओ गतिविधियां भी बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने रह सकते हैं।