BY Our Business Correspondent

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को प्रभावित किया। ब्रेंट क्रूड के 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर संभावित दबाव को लेकर चिंता बढ़ी।

कारोबार के दौरान बिकवाली का दबाव खासकर एफएमसीजी और मेटल शेयरों में देखा गया, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में चुनिंदा खरीदारी रही। इस दबाव के चलते निफ्टी 50 24,500 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में करीब 400 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 प्रतिशत गिरकर 78,154.25 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 50 में 112.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 24,471.70 अंक पर बंद हुआ।

बड़ी कंपनियों के शेयरों ने बाजार पर डाला दबाव

बाजार में गिरावट के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। महिंद्रा एंड महिंद्रा 1.62 प्रतिशत, भारती एयरटेल 1.43 प्रतिशत और एक्सिस बैंक 1.40 प्रतिशत नीचे रहे। ये शेयर निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।

एफएमसीजी और मेटल शेयरों में कमजोरी ने भी प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया। हालांकि, व्यापक बाजार में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।

बाजार की चौड़ाई यानी मार्केट ब्रेड्थ हालांकि नकारात्मक रही। बीएसई पर कुल 2,033 शेयर बढ़त में और 2,279 शेयर गिरावट में बंद हुए, जबकि 209 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

इस बीच, बाजार में निकट अवधि की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX 3.73 प्रतिशत गिरकर 11.79 पर आ गया। इसका अर्थ है कि प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद निकट अवधि में बाजार की अपेक्षित अस्थिरता में कमी आई।

कच्चा तेल बना बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता

मंगलवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों के लिए प्रमुख चिंता का विषय बनी रहीं। ब्रेंट क्रूड के अक्टूबर 2026 वायदा अनुबंध में 2.14 डॉलर यानी 2.44 प्रतिशत की तेजी आई और यह 89.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत में गतिरोध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके संचालन को लेकर बनी अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ाया है।

अमेरिकी क्रूड वायदा भी बढ़कर 82.42 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। दोनों प्रमुख तेल अनुबंध 31 जुलाई के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। सोमवार को दोनों में करीब 5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी कई मोर्चों पर दबाव पैदा कर सकती है। इससे आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और ईंधन तथा परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

महंगाई के आंकड़ों पर भी बाजार की नजर

तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिकी उपभोक्ता महंगाई के आंकड़े भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य रिपोर्ट बुधवार को जारी होने वाली है।

अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि हेडलाइन उपभोक्ता कीमतों में महीने-दर-महीने 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, जबकि कोर महंगाई 0.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।

यदि महंगाई अनुमान से अधिक रहती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आ सकता है। फिलहाल बाजार में अगले महीने फेड द्वारा दरों में बदलाव को लेकर लगभग बराबर संभावनाएं देखी जा रही हैं।

रुपया कमजोर, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपया कमजोर रहा। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया 95.4450 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.3050 पर बंद हुआ था।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच रुपये में कमजोरी भारत के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है। डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये से आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर खासकर ऊर्जा आयात पर पड़ सकता है।

भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में भी यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई। 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी प्रतिभूति की यील्ड 0.43 प्रतिशत बढ़कर 6.795 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले सत्र में यह 6.766 प्रतिशत थी।

कमोडिटी बाजार में एमसीएक्स गोल्ड के 5 अक्टूबर 2026 निपटान वाले वायदा अनुबंध में 0.50 प्रतिशत की तेजी आई और यह 1,53,869 रुपये पर पहुंच गया।

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.04 प्रतिशत बढ़कर 99.85 पर रहा, जबकि अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 0.79 प्रतिशत बढ़कर 4.735 प्रतिशत हो गई।

वैश्विक बाजारों में भी सतर्कता

वैश्विक बाजारों में भी मंगलवार को मिलाजुला रुख देखने को मिला। अमेरिका-ईरान तनाव और ब्रिटेन के कमजोर खुदरा बिक्री आंकड़ों के कारण यूरोपीय बाजारों के अधिकांश प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे।

ब्रिटेन में जुलाई के दौरान कुल खुदरा बिक्री वृद्धि घटकर सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत रह गई, जबकि एक साल पहले यह 2.5 प्रतिशत और जून 2026 में 1.9 प्रतिशत थी। खाद्य बिक्री में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि गैर-खाद्य बिक्री में 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इसके विपरीत, अधिकांश एशियाई बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, वैश्विक महंगाई के परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता बनी रही।

अमेरिकी बाजार में सोमवार को भी कमजोरी देखने को मिली। एसएंडपी 500 में 0.06 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7,753.12 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.32 प्रतिशत गिरकर 26,605.36 और डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.11 प्रतिशत कमजोर होकर 53,976.04 पर बंद हुआ।

इंटेल सहित कुछ चिप कंपनियों के शेयरों में गिरावट ने अमेरिकी बाजार पर दबाव बनाया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की संभावना को लेकर निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ने से भी बाजार प्रभावित हुआ।

तिमाही नतीजों से इन शेयरों में जोरदार तेजी

कमजोर बाजार के बावजूद कुछ कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने उनके शेयरों में तेज खरीदारी को आकर्षित किया।

इंड-स्विफ्ट लेबोरेटरीज में 20 प्रतिशत की तेजी आई। कंपनी का समेकित समायोजित शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 183.5 प्रतिशत बढ़कर 24.86 करोड़ रुपये हो गया। तिमाही आधार पर भी मुनाफा 28.9 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी की शुद्ध बिक्री 25.3 प्रतिशत बढ़कर 191.45 करोड़ रुपये रही।

फिनोलेक्स केबल्स में 14.64 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 59.4 प्रतिशत बढ़कर 221.28 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन से राजस्व 44.26 प्रतिशत बढ़कर 2,013.15 करोड़ रुपये रहा।

कोल्टे-पाटिल डेवलपर्स का शेयर 11.48 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 146.26 करोड़ रुपये का समायोजित शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 16.99 करोड़ रुपये का समायोजित शुद्ध घाटा था। कंपनी की शुद्ध बिक्री 1,016.5 प्रतिशत बढ़कर 919.54 करोड़ रुपये रही।

मैट्रिमोनी डॉट कॉम में 10.34 प्रतिशत की तेजी आई। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 127.5 प्रतिशत बढ़कर 19.10 करोड़ रुपये हो गया। राजस्व 13.2 प्रतिशत बढ़कर 130.50 करोड़ रुपये रहा।

बॉश में 3.86 प्रतिशत की बढ़त रही। हालांकि कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 36.8 प्रतिशत घटकर 704.90 करोड़ रुपये रहा, लेकिन राजस्व 22 प्रतिशत बढ़कर 5,841.90 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के अनुसार यात्री वाहनों और ऑफ-हाईवे सेगमेंट में मांग बढ़ने से राजस्व को समर्थन मिला।

इन शेयरों में रही गिरावट

त्रिवेणी टर्बाइन में 5.63 प्रतिशत की गिरावट आई। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 20.78 प्रतिशत घटकर 51.1 करोड़ रुपये रहा, हालांकि परिचालन से राजस्व 19.23 प्रतिशत बढ़कर 442.7 करोड़ रुपये हो गया।

भारत फोर्ज 2.01 प्रतिशत नीचे रहा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 89.73 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध घाटा दर्ज किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 283.68 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। हालांकि, राजस्व 18.7 प्रतिशत बढ़कर 4,639.94 करोड़ रुपये रहा।

वोडाफोन आइडिया में 0.23 प्रतिशत की मामूली गिरावट रही। कंपनी का समायोजित समेकित शुद्ध घाटा घटकर 5,361.99 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 6,608.1 करोड़ रुपये था। परिचालन से राजस्व 6 प्रतिशत बढ़कर 11,689 करोड़ रुपये रहा।

आईपीओ बाजार में मजबूत गतिविधि

प्राथमिक बाजार में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही। कई नए सार्वजनिक निर्गमों को निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स का इश्यू 11 अगस्त को शाम 4:30 बजे तक 38.33 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। कंपनी को 83,17,190 शेयरों के मुकाबले 31,88,07,160 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू का मूल्य दायरा 200-212 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 70 शेयरों की है। इश्यू 7 अगस्त को खुला था और 11 अगस्त को बंद हुआ।

लीप इंडिया का इश्यू 8.35 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसे 11,49,91,735 शेयरों के मुकाबले 95,97,11,988 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इसका मूल्य दायरा 151-159 रुपये और न्यूनतम लॉट 94 शेयरों का है।

डूट ट्रांसमिशन का इश्यू 3.80 गुना सब्सक्राइब हुआ। 2,49,56,363 शेयरों के मुकाबले 9,47,10,944 शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। इसका मूल्य दायरा 829-871 रुपये और न्यूनतम लॉट 17 शेयरों का है।

मोलबायो डायग्नोस्टिक्स का इश्यू भी 3.01 गुना सब्सक्राइब हुआ। 81,58,529 शेयरों के मुकाबले 2,45,26,836 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इसका मूल्य दायरा 768-807 रुपये और न्यूनतम लॉट 18 शेयरों का है।

वहीं, मिल्की मिस्ट डेयरी फूड को पहले दिन अपेक्षाकृत धीमी प्रतिक्रिया मिली। शाम 4:30 बजे तक इश्यू 0.75 गुना सब्सक्राइब हुआ था। 8,17,98,244 शेयरों के मुकाबले 6,17,02,513 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू का मूल्य दायरा 133-140 रुपये और न्यूनतम लॉट 107 शेयरों का है।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

भारतीय शेयर बाजार की निकट अवधि की दिशा में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव, रुपये की चाल, वैश्विक महंगाई और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति प्रमुख भूमिका निभा सकती है।

कच्चे तेल का 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे आयात लागत बढ़ने, रुपये पर दबाव पड़ने और महंगाई के जोखिम में वृद्धि हो सकती है। वहीं, कंपनियों के लिए ईंधन, परिवहन और कच्चे माल की लागत बढ़ने से मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।

दूसरी ओर, मजबूत तिमाही नतीजे देने वाली कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी यह संकेत देती है कि बाजार में पूरी तरह जोखिम से बचने वाला माहौल नहीं है। निवेशक अब व्यापक बाजार की दिशा के साथ-साथ कंपनियों के विशिष्ट प्रदर्शन पर भी ध्यान दे रहे हैं।

मंगलवार का कारोबार इस लिहाज से भारतीय बाजार की दोहरी तस्वीर पेश करता है। एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की तेजी ने प्रमुख सूचकांकों को दबाव में रखा, वहीं दूसरी तरफ मजबूत नतीजों वाले चुनिंदा शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। आने वाले सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक बने रह सकते हैं।

अलग से: टॉप गेनर्स

कंपनीतेजीप्रमुख वजह
इंड-स्विफ्ट लेबोरेटरीज20.00%पहली तिमाही में समायोजित मुनाफा 183.5% बढ़ा
फिनोलेक्स केबल्स14.64%शुद्ध लाभ 59.4% बढ़ा, राजस्व 44.26% बढ़ा
कोल्टे-पाटिल डेवलपर्स11.48%तिमाही में घाटे से मुनाफे में मजबूत बदलाव
मैट्रिमोनी डॉट कॉम10.34%शुद्ध लाभ 127.5% बढ़ा
बॉश3.86%राजस्व में 22% की वृद्धि

अलग से: टॉप लूजर्स

कंपनीगिरावटप्रमुख वजह
त्रिवेणी टर्बाइन-5.63%पहली तिमाही में शुद्ध लाभ 20.78% घटा
भारत फोर्ज-2.01%पहली तिमाही में 89.73 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा
महिंद्रा एंड महिंद्रा-1.62%निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल
भारती एयरटेल-1.43%दिग्गज शेयरों में बिकवाली
एक्सिस बैंक-1.40%बैंकिंग शेयरों पर दबाव
वोडाफोन आइडिया-0.23%मामूली गिरावट के साथ बंद
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मुख्य निष्कर्ष: मंगलवार को बाजार की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों का 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना और अमेरिका-ईरान तनाव रही। इसके चलते सेंसेक्स 388 अंक और निफ्टी 112 अंक नीचे बंद हुए। हालांकि, मजबूत तिमाही नतीजों वाले कई शेयरों में दोहरे अंकों की तेजी ने यह दिखाया कि कमजोर व्यापक बाजार के बीच भी स्टॉक-विशिष्ट अवसर बने हुए हैं।