
हमारे बिजनेस संवाददाता
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों पर भारी दबाव डाला। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल, रुपये में कमजोरी, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और कमजोर एशियाई संकेतों ने बाजार की धारणा को और प्रभावित किया।
सेंसेक्स 1,124 अंक यानी 1.52 फीसदी टूटकर 72,771.72 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 360.25 अंक यानी 1.56 फीसदी गिरकर 22,780.25 अंक पर आ गया। इस गिरावट के साथ निफ्टी 22,800 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ।
बाजार में बिकवाली व्यापक रही। सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। बैंकिंग, रियल्टी और मेटल शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। निफ्टी में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे।
बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत इंडिया VIX से भी मिला। निकट अवधि में बाजार की अपेक्षित अस्थिरता को मापने वाला यह सूचकांक 12.54 फीसदी बढ़कर 13.69 पर पहुंच गया।
व्यापक बाजार में भी गिरावट रही। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स और बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स दोनों 1.62 फीसदी टूटे। बीएसई पर 1,271 शेयर बढ़त में रहे, जबकि 3,218 शेयरों में गिरावट आई और 245 शेयर अपरिवर्तित रहे।
कच्चे तेल में उछाल ने बढ़ाई चिंता
बाजार की गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिका-ईरान तनाव और इसका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संभावित असर रहा। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कमोडिटी बाजार में नवंबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 3.54 डॉलर यानी 3.63 फीसदी बढ़कर 100.98 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव पड़ने के साथ महंगाई तथा चालू खाते पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा कई उद्योगों की लागत भी बढ़ सकती है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.23 फीसदी के पार
वैश्विक बॉन्ड बाजार में भी सोमवार को दबाव देखने को मिला। अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 0.93 फीसदी बढ़कर 5.235 फीसदी हो गई।
भारत में भी 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड पिछले कारोबारी सत्र के 7.120 फीसदी से बढ़कर 7.177 फीसदी हो गई।
अमेरिकी यील्ड में तेजी से डॉलर आधारित परिसंपत्तियां निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं। इसका असर उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है। घरेलू स्तर पर ऊंची बॉन्ड यील्ड कंपनियों की पूंजी लागत और शेयरों के मूल्यांकन को भी प्रभावित कर सकती है।
रुपया 96 प्रति डॉलर के करीब
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर भी दबाव रहा। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया 96.01 प्रति डॉलर के आसपास रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.75 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
इस दौरान डॉलर इंडेक्स 0.18 फीसदी बढ़कर 101.15 पर पहुंच गया।
सोने की कीमतों में इसके विपरीत नरमी रही। एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स की कीमत 2.14 फीसदी गिरकर 1,47,490 रुपये रह गई।
बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली
बैंकिंग शेयर सोमवार की गिरावट के प्रमुख केंद्र रहे। निफ्टी बैंक इंडेक्स 1.99 फीसदी गिरकर 54,471.65 अंक पर बंद हुआ।
यस बैंक 5.87 फीसदी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 4.69 फीसदी और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 3.88 फीसदी टूटे। केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक में क्रमश: 3.47 फीसदी और 3.43 फीसदी की गिरावट आई।
बैंक ऑफ बड़ौदा 3.30 फीसदी, एचडीएफसी बैंक 2.25 फीसदी, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक 2.23 फीसदी और भारतीय स्टेट बैंक 2.14 फीसदी नीचे रहे। आईसीआईसीआई बैंक में 1.87 फीसदी की गिरावट आई।
हालांकि फेडरल बैंक 0.93 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ।
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज 2.32 फीसदी, एचडीएफसी बैंक 2.25 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक 1.87 फीसदी नीचे रहे।
औद्योगिक उत्पादन में 8 फीसदी वृद्धि
शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ा औद्योगिक उत्पादन का आंकड़ा सकारात्मक रहा।
भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) अगस्त 2026 में सालाना आधार पर 8 फीसदी बढ़ा, जबकि जुलाई में संशोधित वृद्धि दर 7.4 फीसदी रही थी।
आईआईपी में सबसे अधिक भार रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन अगस्त में 9 फीसदी बढ़ा, जबकि जुलाई में इसकी वृद्धि 8.2 फीसदी थी।
बिजली और गैस आपूर्ति में भी वृद्धि तेज हुई। इस क्षेत्र की वृद्धि दर जुलाई के 8.7 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 12.3 फीसदी हो गई।
इसके विपरीत खनन एवं उत्खनन क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर रहा। अगस्त में उत्पादन 5.6 फीसदी घटा, जबकि जुलाई में इसमें 0.9 फीसदी की गिरावट आई थी।
इस तरह घरेलू औद्योगिक गतिविधियों के आंकड़े मजबूत बने हुए हैं, लेकिन सोमवार के कारोबार ने दिखाया कि फिलहाल वैश्विक भू-राजनीतिक और वित्तीय जोखिमों का असर भारतीय शेयर बाजार पर अधिक दिखाई दे रहा है।
वैश्विक बाजारों में भी सतर्कता
अमेरिका-ईरान तनाव, तेल की कीमतों और ऊंची बॉन्ड यील्ड के बीच वैश्विक बाजारों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
भारतीय कारोबारी समय के दौरान डॉव जोन्स फ्यूचर्स करीब 303 अंक नीचे थे, जो अमेरिकी बाजारों में कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहे थे।
टेक्नोलॉजी शेयरों को लेकर भी निवेशकों की चिंता बढ़ी। ओपनएआई द्वारा अपने नवीनतम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडलों की ट्रेनिंग रोकने की खबरों का भी बाजार धारणा पर असर पड़ा। कंपनी के एआई एजेंटों से जुड़े कुछ मामलों की जांच की खबरें भी सामने आई हैं।
यूरोपीय शेयर बाजारों में सोमवार को मामूली तेजी रही। ब्रिटिश हाउस बिल्डर्स के शेयरों में उछाल ने बाजार को समर्थन दिया, लेकिन तेल की कीमतों और ऊंची बॉन्ड यील्ड ने तेजी को सीमित रखा।
एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशक अमेरिका-ईरान संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर आगे के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में हालांकि तेजी रही थी। डॉव जोंस 0.93 फीसदी बढ़कर 51,828.62, एसएंडपी 500 0.51 फीसदी बढ़कर 7,743.41 और नैस्डैक कंपोजिट 0.48 फीसदी बढ़कर 27,068.72 पर बंद हुआ था।
इन शेयरों पर रही नजर
सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज का शेयर 9.20 फीसदी उछला। कंपनी ने बताया कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उसके विनिर्माण एक्साइज लाइसेंस के नवीनीकरण का आदेश दिया है। अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को कंपनी को 1 लाख रुपये की लागत देने का भी निर्देश दिया। कंपनी को परिचालन बंद रहने की अवधि से हुए नुकसान के लिए उचित मंच के समक्ष क्षतिपूर्ति का दावा करने का अधिकार भी सुरक्षित रखा गया है।
ल्यूपिन 1.43 फीसदी गिरा। कंपनी ने बताया कि उसे अमेरिकी एफडीए से Apixaban ओरल सस्पेंशन के लिए अपने न्यू ड्रग एप्लीकेशन पर टेंटेटिव अप्रूवल मिला है।
सिल्वर टच टेक्नोलॉजीज 0.40 फीसदी चढ़ा। कंपनी को इसरो के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर से हाई-एंड वर्कस्टेशन की आपूर्ति का ऑर्डर मिला है।
कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल 0.95 फीसदी गिरा। कंपनी को संयुक्त अरब अमीरात में गैस पाइपलाइन परियोजना के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन का लेटर ऑफ अवॉर्ड मिला है। कंपनी के वर्गीकरण के अनुसार यह 4,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य वाली बड़ी परियोजना है।
ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन 1.98 फीसदी गिरा। कंपनी ने राजकोट स्थित अपनी विनिर्माण इकाई की कोटिंग सुविधा में 26 सितंबर को आग लगने की जानकारी दी। कंपनी के अनुसार आग को 30-60 मिनट के भीतर नियंत्रित कर पूरी तरह बुझा दिया गया और विनिर्माण गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहीं।
आईपीओ बाजार में भी सक्रियता
प्राथमिक बाजार में सोमवार को कई आईपीओ में निवेशकों की सक्रियता देखने को मिली।
शाह इन्वेस्टर्स होम को 37.79 लाख शेयरों के मुकाबले 11.72 लाख शेयरों के लिए बोलियां मिलीं और इश्यू 0.31 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 159-167 रुपये प्रति शेयर है और इश्यू 30 सितंबर को बंद होगा।
एसआरआईटी इंडिया को 1.176 करोड़ शेयरों के मुकाबले 1.17 करोड़ शेयरों की बोलियां मिलीं और इश्यू करीब 1 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका प्राइस बैंड 123-130 रुपये है।
ए-वन स्टील्स इंडिया का आईपीओ 11.59 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसे 7.38 करोड़ शेयरों के मुकाबले 85.56 करोड़ शेयरों की बोलियां मिलीं। इसका मूल्य दायरा 385-405 रुपये है।
मनीव्यू का इश्यू 98.44 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसे 23.25 करोड़ शेयरों के मुकाबले करीब 2,288.93 करोड़ शेयरों की बोलियां मिलीं। इसका प्राइस बैंड 32-34 रुपये है और इश्यू 28 सितंबर को बंद हुआ।
एसिवेक्टर को 1.12 गुना, रनवाल एंटरप्राइजेज को 0.70 गुना, जर्मन ग्रीन स्टील एंड पावर को 5.14 गुना और ओरिएंट केबल्स (इंडिया) को 8.21 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।
कुल मिलाकर, सोमवार का कारोबार भारतीय शेयर बाजार के लिए जोखिम से बचने वाले रुख का संकेत रहा। मजबूत औद्योगिक उत्पादन के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिका-ईरान तनाव, ऊंची बॉन्ड यील्ड, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। निकट अवधि में बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, तेल की कीमतों, विदेशी पूंजी प्रवाह और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर निर्भर रहने की संभावना है।
