Last Updated on April 22, 2026 8:05 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / नई दिल्ली

देश के प्रमुख आलू उत्पादक राज्यों में कीमतों में भारी गिरावट ने किसानों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। All India Kisan Sabha (AIKS) ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), नुकसान की भरपाई और पूर्ण कर्ज माफी की मांग उठाई है।

AIKS के अनुसार कई राज्यों में खेत स्तर पर आलू की कीमतें गिरकर ₹3 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जबकि उत्पादन लागत ₹15–18 प्रति किलो के बीच है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, असम और हरियाणा जैसे राज्यों में यह संकट व्यापक रूप से देखा जा रहा है, जिससे लाखों छोटे और सीमांत किसान प्रभावित हो रहे हैं।

संगठन का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित वर्तमान खरीद मूल्य लगभग ₹6.5 प्रति किलो है, जो किसानों की लागत का आधा भी नहीं निकाल पाता। ऐसे में किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में किसान अपनी फसल को औने-पौने दाम पर बेचने या नष्ट करने को मजबूर हैं।

AIKS ने इस संकट के पीछे नीतिगत खामियों, निर्यात प्रतिबंधों और बाजार तंत्र की विफलता को जिम्मेदार ठहराया है। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश को निर्यात पर रोक के कारण भारी मात्रा में आलू बिना बिके रह गया, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। वहीं गुजरात में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ा है।

किसानों की प्रमुख मांगों में ₹27 प्रति किलो का कानूनी MSP लागू करना शामिल है, जो उत्पादन लागत, भंडारण, परिवहन और लाभ को ध्यान में रखकर तय किया गया है। इसके साथ ही National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India (NAFED) जैसी एजेंसियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर सरकारी खरीद शुरू करने की मांग की गई है।

इसके अलावा, किसानों ने मूल्य गिरावट से हुए नुकसान की भरपाई, 2025–26 सीजन के लिए पूर्ण कर्ज माफी, दो साल का ऋण स्थगन और अगले सीजन के लिए बिना ब्याज के ऋण की भी मांग की है।

AIKS ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो देशभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।