“ऑपरेशन WIPE” भारत की ड्रग विरोधी रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, जो डिजिटल और भौतिक दोनों मोर्चों पर तस्करी के खिलाफ मजबूत कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
Staff Reporter
देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन ड्रग तस्करी के खतरे से निपटने के लिए Narcotics Control Bureau (NCB) ने “ऑपरेशन WIPE” (Web-based Illicit Activities Prevention & Enforcement) की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकना है, जहां NDPS कानून के तहत नियंत्रित दवाओं की अवैध बिक्री और वितरण किया जा रहा है।
यह पहल जुलाई 2025 में चलाए गए “ऑपरेशन MED-MAX” की सफलता पर आधारित है, जिसमें एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया गया था। इस ऑपरेशन में Drug Enforcement Administration (US DEA) और Australian Federal Police (AFP) समेत कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का सहयोग मिला था।
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा
जांच के दौरान पता चला कि यह गिरोह एशिया, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया तक फैला हुआ था। मामला भारत में 3.7 किलोग्राम ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी से शुरू हुआ, जिसने एक बड़े संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
गिरोह कर्नाटक के उडुपी में एक कॉल सेंटर चला रहा था, जहां से वैश्विक ऑर्डर एक प्रमुख ऑनलाइन B2B प्लेटफॉर्म के माध्यम से लिए जाते थे। NDPS कानून के तहत नियंत्रित दवाओं को ऑनलाइन सूचीबद्ध किया जाता था और बिना किसी वैध दस्तावेज के ग्राहकों को सीधे सप्लाई की जाती थी।
भुगतान के लिए क्रिप्टोकरेंसी, PayPal और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि अंतिम डिलीवरी के लिए अंतरराष्ट्रीय री-शिपर्स का सहारा लिया जाता था।
संयुक्त कार्रवाई के तहत कई गिरफ्तारियां हुईं, यूएई में बैठे मुख्य सरगना की पहचान हुई और विदेशों में भी कार्रवाई करते हुए अवैध ठिकानों को ध्वस्त किया गया।
ऑपरेशन WIPE का फोकस
इन अनुभवों के आधार पर “ऑपरेशन WIPE” को और अधिक सक्रिय और तकनीकी बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य इंटरनेट के खुले प्लेटफॉर्म (Surface Web) की निगरानी कर अवैध गतिविधियों को पहले ही रोकना है।
यह अभियान International Narcotics Control Board के SNOOP (Scanning Novel Opioids on Online Platforms) कार्यक्रम से प्राप्त खुफिया जानकारी पर भी आधारित है।
इस अभियान के तहत NCB ने अब तक 122 मामलों की पहचान की है, जिनमें 62 प्रकार के पदार्थ शामिल हैं। इनमें क्लोनाजेपाम, डायजेपाम और फेंटेनाइल जैसी आम तौर पर दुरुपयोग की जाने वाली दवाएं भी शामिल हैं।
इनमें से 58 पदार्थ NDPS कानून के तहत आते हैं, जबकि 4 को नियंत्रित पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को नोटिस, सख्त कार्रवाई
NCB ने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही NDPS के तहत आने वाले पदार्थों की विस्तृत सूची साझा की गई है ताकि ऐसे उत्पादों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके।
जांच के बाद IndiaMART, TradeIndia और Dial4Trade जैसे प्लेटफॉर्म ने संदिग्ध उत्पादों को हटाने और विक्रेताओं को निलंबित करने जैसे कदम उठाए हैं।
NCB की तकनीकी टीमें अत्याधुनिक उपकरणों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया जानकारी के माध्यम से लगातार इंटरनेट की निगरानी कर रही हैं, ताकि नए खतरों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
“ऑपरेशन WIPE” पारंपरिक कार्रवाई से आगे बढ़कर एक सक्रिय रोकथाम रणनीति को दर्शाता है, जिसमें अवैध गतिविधियों को शुरू होने से पहले ही खत्म करने पर जोर दिया गया है।
सरकार की सख्त नीति और जनता की भूमिका
यह पहल भारत सरकार की ड्रग्स के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति को दर्शाती है। NCB ने समाज को नशे के खतरे से बचाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
नागरिकों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की सूचना देने की अपील की गई है।
ऐसी जानकारी MANAS – नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन (टोल-फ्री नंबर 1933) पर दी जा सकती है। लिंक, स्क्रीनशॉट, विक्रेता की जानकारी और लेन-देन के विवरण जैसी सूचनाएं जांच एजेंसियों को तेजी से कार्रवाई करने में मदद करती हैं। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
“ऑपरेशन WIPE” भारत की ड्रग विरोधी रणनीति में एक बड़ा बदलाव है, जो डिजिटल और भौतिक दोनों मोर्चों पर तस्करी के खिलाफ मजबूत कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
यह अभियान न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अवैध कारोबार करना आसान नहीं रहेगा।

