Last Updated on August 31, 2026 11:21 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / नई दिल्ली

संविधान की सर्वोच्चता, कानून के समान अनुपालन, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द के मुद्दों को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने देशव्यापी जनआंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। “संविधान और शरीयत के संरक्षण के आंदोलन” के तहत बोर्ड सार्वजनिक सभाओं और शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रमों के साथ कथित भेदभाव और अधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों पर श्वेत पत्र जारी करेगा तथा कानूनी मार्गदर्शिका और मांग-पत्र तैयार करेगा। आंदोलन के अगले चरण में नई दिल्ली में बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की भी योजना है।

बोर्ड ने प्रस्तावित अभियान को “संविधान और शरीयत के संरक्षण का आंदोलन” नाम दिया है। इसकी घोषणा एक संवाददाता सम्मेलन में की गई, जिसमें जमात-ए-इस्लामी हिंद के अमीर और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी तथा बोर्ड के महासचिव मौलाना फज़लुर रहीम मुजद्दिदी समेत कई प्रमुख मुस्लिम नेता मौजूद थे।

बोर्ड के अनुसार, आंदोलन केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले न्यायप्रिय और शांतिप्रिय नागरिकों के अलावा धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

एआईएमपीएलबी ने कहा कि संविधान देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, जीवन और संपत्ति की सुरक्षा, सम्मान और कानून के समान संरक्षण की गारंटी देता है। हालांकि, बोर्ड का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में कमजोर और हाशिये पर मौजूद वर्गों, विशेष रूप से मुसलमानों के सामने धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर दबाव तथा असुरक्षा की स्थिति पैदा हुई है।

बोर्ड ने मॉब हिंसा, कथित “बुलडोजर कार्रवाई” के तहत की गई तोड़फोड़, मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों से जुड़े विवाद, वक्फ संपत्तियों और कब्रिस्तानों पर कथित अवैध कब्जे तथा मुस्लिम युवाओं की कथित मनमानी गिरफ्तारियों को लेकर चिंता जताई है। उसने इन घटनाओं को कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों के लिए चुनौती बताया है।

बोर्ड ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के माध्यम से मुस्लिम पर्सनल लॉ को प्रभावित करने के कथित प्रयासों का भी विरोध किया है। इसके अलावा वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन, शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम में बदलाव तथा शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने वाले उपायों पर भी आपत्ति जताई है।

बोर्ड ने अपने बयान में कहा, “ये केवल किसी एक समुदाय से जुड़े मुद्दे नहीं हैं, बल्कि भारत की संवैधानिक पहचान, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा राष्ट्रीय विरासत से जुड़े प्रश्न हैं।”

प्रस्तावित आंदोलन के संचालन के लिए एक मजलिस-ए-अमल (कार्य समिति) गठित की जाएगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन पूरी तरह संवैधानिक, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण दायरे में चलाया जाएगा। इसके सभी कार्यक्रमों में सांप्रदायिक तनाव, हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा से बचने पर जोर दिया जाएगा।

आंदोलन के तहत देश के प्रमुख शहरों में सार्वजनिक सभाएं और शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें विभिन्न धर्मों के विद्वानों, धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों तथा सामाजिक और राजनीतिक हस्तियों को शामिल किया जाएगा।

बोर्ड एक श्वेत पत्र भी तैयार करेगा, जिसमें उसके अनुसार मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव, संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन और मानवाधिकार हनन से जुड़े मामलों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इसे मीडिया, मानवाधिकार संगठनों, बुद्धिजीवियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों सहित संबंधित संस्थानों तक पहुंचाने की योजना है।

इसके अलावा एक कानूनी मार्गदर्शिका प्रकाशित की जाएगी, जिसमें कथित अवैध तोड़फोड़ और बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपायों तथा वक्फ संपत्तियों, कब्रिस्तानों, मस्जिदों और मदरसों की सुरक्षा से संबंधित कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जाएगी।

मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर भी बोर्ड एक व्यापक घोषणा-पत्र जारी करेगा, जिसमें कानून के शासन, प्रशासन की जिम्मेदारियों और पीड़ितों के कानूनी अधिकारों को रेखांकित किया जाएगा।

बोर्ड एक मांग-पत्र भी तैयार करेगा, जिसे राज्यों में राज्यपालों और जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपने की योजना है। इसमें संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा, घृणा अपराधों की रोकथाम, धार्मिक स्वतंत्रता, कथित अवैध तोड़फोड़ पर रोक, वक्फ और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा तथा कानून के समान अनुपालन जैसे मुद्दे शामिल होंगे।

आंदोलन के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस, मीडिया ब्रीफिंग, वीडियो दस्तावेजीकरण और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की भी योजना है। बोर्ड ने विशेष रूप से एक्स सहित डिजिटल मंचों पर समन्वित अभियान चलाने की बात कही है।

आंदोलन के एक महत्वपूर्ण चरण में नई दिल्ली में बड़े राष्ट्रीय सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न समुदायों, धार्मिक समूहों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। इसी कार्यक्रम में आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा घोषित किए जाने की संभावना है।

एआईएमपीएलबी ने कहा कि उसका प्रस्तावित आंदोलन किसी एक समुदाय का अभियान नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक भाईचारे की रक्षा के लिए व्यापक राष्ट्रीय प्रयास है। बोर्ड ने नागरिकों और संगठनों से शांतिपूर्ण तथा संवैधानिक तरीके से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।