Last Updated on January 21, 2026 1:13 pm by INDIAN AWAAZ

संतोष कुमार पाठक

देश की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी को अब तक का अपना सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रूप में मिल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और जेपी नड्डा समेत कई अन्य दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में नितिन नवीन ने मंगलवार, 20 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यभार संभाला। 

इस मौके पर उनके पैतृक गांव के लोगों ने भी जमकर जश्न मनाया। बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का पैतृक गांव अमांवा है, जो बिहार के नवादा जिले के रजौली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। 

नितिन नवीन का जन्म 23 मई, 1980 को  अविभाजित बिहार के रांची ( जो अब झारखंड की राजधानी है) में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा भाजपा के वरिष्ठ नेता और पटना पश्चिम से बिहार विधानसभा के चार बार विधायक रहे थे। इंटरमीडिएट यानी 12वीं तक पढ़े नवीन की प्रारंभिक शिक्षा सेंट माइकल हाई स्कूल, पटना से पूरी हुई, जहां से उन्होंने 1996 में सीबीएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा को पास किया। इसके बाद उन्होंने सीएसकेएम पब्लिक स्कूल, नई दिल्ली से 1998 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की।

नितिन नवीन के पिता बीजेपी के वरिष्ठ नेता और बिहार के विधायक हुआ करते थे। उनके निधन के बाद वर्ष 2006 में हुए उपचुनाव में बीजेपी ने पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाया। इस उपचुनाव में 65,167 मतों के अंतर से भारी जीत हासिल करने के साथ ही उनके राजनीतिक सफर की शुरूआत हुई। इसके बाद वर्ष 2010, 2015, 2020 और 2025 में बांकीपुर विधानसभा से वह लगातार जीतते रहें। लगातार 5 बार विधायक का चुनाव जीतने वाले नितिन नवीन को पार्टी आलाकमान का भी लगातार साथ मिलता रहा।

वर्ष 2021 में उन्हें नीतीश कुमार की गठबंधन सरकार में बीजेपी के कोटे से मंत्री बनाया गया। उन्होंने बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास और कानून जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला है। 

विधायी भूमिका के साथ ही बीजेपी नेताओं ने संगठन के मामले में भी उन्हें समय-समय पर कई भूमिकाएं दी। वह बीजेपी के यूथ विंग भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मोर्चे के ही बिहार प्रदेश अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। यह कहा जाता है कि सिक्किम और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में राज्य प्रभारी के तौर उनके कामकाज से प्रभावित होकर ही पार्टी आलाकमान ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला किया। पिछले कुछ वर्षों में कई बार छत्तीसगढ़ का दौरा कर चुके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी ग्राउंड जीरो से मिली रिपोर्ट के आधार पर ही उनके नाम पर अपनी मुहर लगाई। 

बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी या यूं कहें कि सबसे पहली चुनौती आगामी विधानसभा चुनाव है। क्योंकि पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के नतीजों के साथ ही नवीन के पास होने या फेल होने की चर्चाएं शुरू हो जाएंगी। दक्षिण भारत के राज्यों में पार्टी का जनाधार बढ़ाना और कर्नाटक में पार्टी को फिर से सत्ता में लाना भी उनके सामने एक बड़ी चुनौती होगी। यह चुनौती उनके पहले दिन के फैसलों में भी साफ-साफ नजर आता है। पार्टी अध्यक्ष का कार्यभार संभालते ही उन्होंने पहले दिन ही केरल, तेलंगाना, बेंगलुरू और चंडीगढ़ के लिए चुनाव प्रभारी और सह प्रभारियों की नियुक्तियों का ऐलान किया।

नवीन ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं बिहार के प्रभारी विनोद तावड़े को केरल विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। तावड़े को चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया गया है। विनोद तावड़े के साथ ही केरल में चुनाव के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे को सह चुनाव प्रभारी बनाया गया है। ग्रेटर बेंगलुरु निगम चुनाव के लिए राम माधव को चुनाव प्रभारी और सतीश पुनिया एवं संजय उपाध्याय को चुनाव सह प्रभारी नियुक्त किया है। तेलंगाना में होने वाले नगर निगम चुनावों को भी पूरी गंभीरता से लेते हुए नवीन ने पहले ही दिन तीन बड़े नेताओं को वहां की जिम्मेदारी थमा दी है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आशीष शेलार को वहां का चुनाव प्रभारी और अशोक परनामी एवं रेखा शर्मा को चुनाव सह प्रभारी बनाया गया है।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।