Last Updated on June 25, 2026 4:25 pm by INDIAN AWAAZ

International Day Against Drug Abuse and Illicit Trafficking (26 June 2026)

— ललित गर्ग

मादक पदार्थों का बढ़ता प्रचलन आज पूरी मानवता के सामने एक गंभीर संकट के रूप में खड़ा है। यह अब केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक वैश्विक मुद्दा बन चुका है। नशाखोरी और मादक पदार्थों की अवैध तस्करी करोड़ों लोगों के जीवन को अंधकार की ओर धकेल रही है, जिसमें युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित और संवेदनशील है। इसी चुनौती के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने और नशामुक्त समाज के संकल्प को दोहराने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसंबर 1987 को प्रस्ताव 42/112 के माध्यम से इस दिवस की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों के दुरुपयोग से मुक्त विश्व के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और प्रयासों को सुदृढ़ करना है। यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि नशे की समस्या का समाधान केवल दंडात्मक उपायों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जन-जागरूकता, सामाजिक और पारिवारिक रोकथाम, उपचार, पुनर्वास तथा निरंतर सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता है।

संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) ने वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की थीम “वैश्विक मादक पदार्थ समस्या: निरंतर चुनौतियाँ, नए खतरे और नवाचारी समाधान” निर्धारित की है। यह विषय इस बात पर बल देता है कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को अपराधी नहीं, बल्कि सहायता, उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता वाले व्यक्तियों के रूप में देखा जाना चाहिए। समाज, परिवार, सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों के समन्वित प्रयास ही उन्हें सामान्य जीवन में वापस ला सकते हैं।

विश्व ड्रग रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में नशीले पदार्थों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। अनुमान है कि 30 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन करते हैं। इनमें से लाखों लोग शारीरिक और मानसिक विकारों से जूझ रहे हैं, लेकिन उपचार सुविधाओं तक उनकी पहुँच अत्यंत सीमित है। चिंताजनक तथ्य यह है कि नशे की लत से पीड़ित हर आठ व्यक्तियों में से केवल एक को ही उचित उपचार मिल पाता है। यह स्थिति वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने खड़ी विशाल चुनौती को दर्शाती है।

पिछले कुछ दशकों में वैश्विक मादक पदार्थ बाजार में तेजी से परिवर्तन आया है। अफीम, हेरोइन, गांजा, चरस और कोकीन जैसे पारंपरिक नशीले पदार्थों के साथ-साथ सिंथेटिक ड्रग्स, फेंटेनिल, मेथामफेटामिन और अन्य रासायनिक रूप से निर्मित मादक पदार्थों का प्रसार तेजी से बढ़ा है। कम उत्पादन लागत, तस्करी के कम जोखिम और अत्यधिक मुनाफे ने इस अवैध कारोबार को पहले से कहीं अधिक संगठित और खतरनाक बना दिया है।

आज मादक पदार्थों के तस्कर आधुनिक तकनीक, डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर नए उपभोक्ताओं, विशेषकर किशोरों और युवाओं को निशाना बना रहे हैं। ऑनलाइन नेटवर्क और गुप्त डिजिटल लेन-देन ने नशीले पदार्थों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुलभ बना दिया है। संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी का यह गठजोड़ वैश्विक शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

नशे का दुष्प्रभाव मानव शरीर के लगभग हर अंग पर पड़ता है। यह हृदय, यकृत, फेफड़ों, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। लंबे समय तक सेवन से अवसाद, मानसिक अस्थिरता, आत्महत्या की प्रवृत्ति, स्मरण शक्ति में कमी और व्यक्तित्व का विघटन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। चिकित्सकों के अनुसार अफीम, हेरोइन, स्मैक, कोकीन और सिंथेटिक ड्रग्स का लगातार सेवन व्यक्ति को मानसिक रूप से अक्षम बना सकता है।

नशे का दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवार टूटते हैं, घरेलू हिंसा बढ़ती है, बेरोजगारी और आर्थिक संकट गहराते हैं तथा अपराध और सामाजिक असुरक्षा में वृद्धि होती है। अनेक शोध यह प्रमाणित कर चुके हैं कि चोरी, हिंसा, मानव तस्करी, यौन अपराध और संगठित अपराधों का एक बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मादक पदार्थों से जुड़ा हुआ है।

भारत भी इस वैश्विक संकट से अछूता नहीं है। भौगोलिक स्थिति, सीमावर्ती चुनौतियों, तीव्र शहरीकरण और युवाओं की बदलती जीवनशैली के कारण देश में नशे की समस्या चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुकी है। पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और महानगरों में यह समस्या विशेष रूप से गंभीर रूप धारण कर चुकी है।

भारत की पश्चिमी सीमा तथाकथित ‘गोल्डन क्रेसेंट’—अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान—से जुड़ी हुई है, जो विश्व के प्रमुख अफीम उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है। परिणामस्वरूप सीमावर्ती राज्यों में मादक पदार्थों की तस्करी एक जटिल चुनौती बन गई है। विशेष रूप से पंजाब लंबे समय से नशाखोरी और तस्करी की समस्या से जूझ रहा है। ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से होने वाली सीमा-पार तस्करी ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है।

जिस प्रकार भारत में आतंकवाद को निर्यात किया गया, उसी प्रकार पाकिस्तान पर बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों के प्रसार को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को कमजोर करना और समाज की संरचना को नुकसान पहुँचाना माना जाता है। इसलिए यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी प्रश्न है। पंजाब सरकार ने हाल के वर्षों में नशे और तस्करी के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया है तथा इस दिशा में कार्रवाई तेज की है।

भारत सरकार भी नशे के खिलाफ अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत 272 से अधिक संवेदनशील जिलों में जन-जागरूकता, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से अभियान चलाए जा रहे हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने में सक्रिय है। स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से भी जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

फिर भी यह स्पष्ट है कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, मीडिया और नागरिक समाज को भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। बच्चों और युवाओं में जीवन-मूल्य, आत्मविश्वास, नैतिक शिक्षा और तनाव-प्रबंधन की क्षमता विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। खेल, योग, ध्यान, सांस्कृतिक गतिविधियाँ और सकारात्मक सामाजिक वातावरण युवाओं को नशे से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

महान दार्शनिकों और आध्यात्मिक चिंतकों ने सदैव आत्मसंयम को स्वस्थ जीवन का आधार माना है। भारतीय संस्कृति का मूल भी अनुशासन, जागरूकता और सदाचार पर आधारित है। यदि समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का पुनर्जागरण हो, तो नशाखोरी सहित अनेक सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि नशे के शिकार लोगों के प्रति घृणा और सामाजिक बहिष्कार का दृष्टिकोण छोड़कर सहानुभूति, उपचार और पुनर्वास की भावना को अपनाया जाए। नशे की जंजीरों को तोड़ने के लिए सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, गैर-सरकारी संगठनों, परिवारों और समुदायों को एक साझा मंच पर आना होगा।

अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि मानव जीवन अनमोल है और इसे नशे के अंधकार में नष्ट नहीं होने दिया जा सकता। यदि हमें स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण करना है, तो नशे के खिलाफ संघर्ष को जनांदोलन का रूप देना होगा। यही इस दिवस का मूल संदेश है और मानवता के उज्ज्वल भविष्य की अनिवार्य शर्त भी।