IT शेयरों की तेजी से बाजार को सहारा, सेंसेक्स-निफ्टी लगातार तीसरे सप्ताह कमजोर

By Sudhir Kumar

भारतीय शेयर बाजार में 24 से 28 अगस्त के बीच कारोबार बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। सप्ताह के अंतिम दिन सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी शेयरों में जोरदार तेजी के कारण सेंसेक्स और निफ्टी ने दो कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया, लेकिन पूरे सप्ताह के आधार पर दोनों प्रमुख सूचकांक नुकसान में रहे। वैश्विक बाजारों के संकेत, अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता, ऊंचे कच्चे तेल के दाम, दिग्गज बैंकिंग शेयरों में दबाव और क्लोजिंग ऑक्शन से जुड़ी अस्थिरता ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।

रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताह के दौरान सेंसेक्स करीब 0.4 प्रतिशत और निफ्टी लगभग 0.3 प्रतिशत कमजोर रहे, जिससे दोनों सूचकांकों की लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट दर्ज हुई। हालांकि, शुक्रवार को बाजार में जोरदार वापसी हुई। सेंसेक्स 330.92 अंक यानी 0.43 प्रतिशत बढ़कर 77,264.51 अंक और निफ्टी 84.80 अंक यानी 0.35 प्रतिशत चढ़कर 24,175.65 अंक पर बंद हुआ।

सोमवार: कमजोर शुरुआत

24 अगस्त को सप्ताह की शुरुआत बाजार में कमजोरी के साथ हुई। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने धातु और प्रौद्योगिकी शेयरों में आई मजबूती का असर कम कर दिया।

सेंसेक्स 171.72 अंक यानी 0.22 प्रतिशत गिरकर 77,369.11 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 32.95 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,219.05 अंक पर रहा।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर सतर्क रुख ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया। ब्रेंट क्रूड करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने से भारत के आयात बिल, मुद्रास्फीति और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता बनी रही।

कारोबार के शुरुआती दौर में बाजार ने मजबूती के संकेत दिए, लेकिन ऊंचे स्तरों पर बिकवाली के कारण तेजी टिक नहीं सकी। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक निचले स्तरों पर खरीदारी तो कर रहे हैं, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन पर आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं।

मंगलवार: बाजार में जोरदार वापसी

25 अगस्त को बाजार ने उल्लेखनीय वापसी की। निचले स्तरों पर खरीदारी और आईटी, स्वास्थ्य सेवा तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में मजबूती ने प्रमुख सूचकांकों को ऊपर पहुंचाया।

सेंसेक्स 286.98 अंक यानी 0.37 प्रतिशत बढ़कर 77,656.09 अंक पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 115.50 अंक यानी 0.48 प्रतिशत चढ़कर 24,334.55 अंक पर बंद हुआ।

निफ्टी ने एक बार फिर 24,300 के महत्वपूर्ण स्तर को पार किया। बीएसई 150 मिडकैप सूचकांक 0.37 प्रतिशत बढ़ा, हालांकि बीएसई 250 स्मॉलकैप सूचकांक 0.17 प्रतिशत कमजोर रहा।

स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और आईटी शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, जबकि निजी बैंकों और कुछ धातु शेयरों पर दबाव बना रहा।

हालांकि, बाजार की तेजी में व्यापक भागीदारी नहीं दिखी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी कर रहे हैं और बाजार में अभी स्थायी तेजी को लेकर पर्याप्त विश्वास नहीं बना है।

बुधवार: फिर लौटी बिकवाली

26 अगस्त को बाजार में एक बार फिर बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स 183.15 अंक यानी 0.24 प्रतिशत गिरकर 77,472.94 अंक पर और निफ्टी 126.80 अंक यानी 0.52 प्रतिशत टूटकर 24,207.75 अंक पर बंद हुआ।

ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता ने बाजार धारणा को प्रभावित किया। इसके अलावा, निवेशकों ने मासिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के जैक्सन होल संबोधन से पहले सतर्क रुख अपनाया।

इस दिन की गिरावट ने यह संकेत दिया कि बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी के बावजूद लगातार तेजी की दिशा स्थापित नहीं हो पा रही है।

गुरुवार: एक्सपायरी और क्लोजिंग ऑक्शन की अस्थिरता

27 अगस्त को बाजार में सप्ताह की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली।

सेंसेक्स 539.35 अंक यानी 0.70 प्रतिशत टूटकर 76,933.59 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 116.90 अंक यानी 0.48 प्रतिशत गिरकर 24,090.85 अंक पर बंद हुआ।

बड़े शेयरों में भारी बिकवाली, विशेष रूप से बैंकिंग क्षेत्र में दबाव, ने बाजार को नुकसान पहुंचाया। मासिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के कारण भी कारोबार में अस्थिरता बढ़ी।

इस सत्र में क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में रही। कारोबार के अंतिम चरण में सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बाजार प्रतिभागियों के बीच यह चिंता बनी हुई है कि बड़ी संस्थागत खरीद-बिक्री के दौरान नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था कहीं कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव तो पैदा नहीं कर रही।

क्लोजिंग कीमतें कई संस्थागत पोर्टफोलियो और वित्तीय उत्पादों के मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए अंतिम मिनटों में बड़े उतार-चढ़ाव का प्रभाव केवल तत्काल कारोबार तक सीमित नहीं रहता।

शुक्रवार: आईटी शेयरों ने बाजार को बचाया

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन 28 अगस्त को बाजार में जोरदार वापसी हुई। वैश्विक प्रौद्योगिकी शेयरों में तेजी और एनवीडिया के मजबूत तिमाही नतीजों ने भारतीय आईटी कंपनियों में खरीदारी को बढ़ावा दिया।

सेंसेक्स 330.92 अंक बढ़कर 77,264.51 अंक और निफ्टी 84.80 अंक चढ़कर 24,175.65 अंक पर बंद हुआ।

सबसे बड़ा योगदान आईटी क्षेत्र का रहा। निफ्टी आईटी सूचकांक 3.51 प्रतिशत उछलकर 31,281.70 अंक पर पहुंच गया।

कोफोर्ज 5.93 प्रतिशत, एलटीआईमाइंडट्री 4.73 प्रतिशत, टीसीएस 4.16 प्रतिशत, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स 3.91 प्रतिशत और टेक महिंद्रा 3.53 प्रतिशत चढ़े। इंफोसिस में 2.99 प्रतिशत और एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 2.66 प्रतिशत की तेजी रही।

एनवीडिया के मजबूत परिणामों और बेहतर राजस्व अनुमान ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े बुनियादी ढांचे पर वैश्विक कंपनियों के खर्च को लेकर आशावाद बढ़ाया। इससे भारतीय आईटी सेवा कंपनियों की मांग को लेकर भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

बैंकिंग और दिग्गज शेयर बने दबाव का कारण

आईटी शेयरों की तेजी के बावजूद सप्ताह के दौरान बैंकिंग और कुछ दिग्गज शेयरों में कमजोरी बाजार के लिए बड़ी चुनौती रही।

एचडीएफसी बैंक विशेष रूप से दबाव में रहा। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारती एयरटेल जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों पर असर डाला।

बाजार में दिग्गज शेयरों का भार अधिक होने के कारण इन कंपनियों में गिरावट का सीधा प्रभाव सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ता है। यही वजह रही कि व्यापक बाजार में कुछ हिस्सों में मजबूती के बावजूद प्रमुख सूचकांक लगातार दबाव में रहे।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बेहतर प्रदर्शन

व्यापक बाजार में तस्वीर अपेक्षाकृत बेहतर रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया।

रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताह के अंतिम दिन मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब 0.5 प्रतिशत तक की बढ़त रही। घरेलू निवेशकों का निरंतर निवेश बाजार में महत्वपूर्ण स्थिरता प्रदान कर रहा है।

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विदेशी निवेशक वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर अधिक संवेदनशील बने हुए हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेश बाजार में खरीदारी का सहारा दे रहे हैं।

कच्चा तेल और वैश्विक ब्याज दरें महत्वपूर्ण जोखिम

पूरे सप्ताह कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी रहीं। सप्ताह के अंत में ब्रेंट क्रूड में मामूली नरमी आई और यह 89.43 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, लेकिन कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं।

भारत के लिए तेल की कीमतें विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लंबे समय तक ऊंची कीमतें आयात बिल बढ़ाने के साथ मुद्रास्फीति और कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव डाल सकती हैं।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी रही। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड सप्ताह के अंत में 4.684 प्रतिशत रही।

अमेरिकी ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की संभावना से उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

रुपये में मामूली मजबूती

भारतीय रुपया सप्ताह के दौरान डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत हुआ। सप्ताह के अंत में रुपया करीब 95.38 प्रति डॉलर के स्तर पर रहा।

रॉयटर्स के अनुसार, सप्ताह के दौरान रुपये में लगभग 0.3 प्रतिशत की मजबूती आई। भारतीय मुद्रा को डॉलर की उपलब्धता और कुछ घरेलू कारकों से सहारा मिला।

हालांकि, मजबूत डॉलर, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव डाल सकते हैं।

प्राथमिक बाजार में जारी रही हलचल

द्वितीयक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद प्राथमिक बाजार में निवेशकों की रुचि मजबूत बनी रही। ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज का आईपीओ 4.82 गुना सब्सक्राइब हुआ। अनु प्रोजेक्ट्स का इश्यू 2.91 गुना सब्सक्राइब हुआ।

प्रायोरिटी ज्वेल्स का इश्यू पहले दिन 1.91 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि ईएसडीएस सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन का आईपीओ 2.08 गुना सब्सक्राइब हुआ।

प्राथमिक बाजार में इन इश्यू को मिली मजबूत प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि अस्थिरता के बावजूद निवेशक चुनिंदा नए कारोबार और कंपनियों में अवसर तलाश रहे हैं।

अगले सप्ताह पर नजर

अगले सप्ताह बाजार के लिए कई महत्वपूर्ण संकेतक निर्णायक रहेंगे। निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों के प्रवाह, रुपये की दिशा और क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था से जुड़े घटनाक्रमों पर रहेगी।

31 अगस्त को होने वाला एमएससीआई इंडेक्स पुनर्संतुलन भी बाजार में महत्वपूर्ण संस्थागत खरीद-बिक्री का कारण बन सकता है।

शुक्रवार की तेजी के बाद निफ्टी के लिए 24,000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं, सेंसेक्स को टिकाऊ तेजी के लिए बैंकिंग और अन्य दिग्गज शेयरों में व्यापक भागीदारी की जरूरत होगी।

कुल मिलाकर, सप्ताह ने भारतीय बाजार की मौजूदा स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। एक ओर घरेलू तरलता, आईटी क्षेत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी वैश्विक उम्मीदें बाजार को सहारा दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरों की आशंका, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक जोखिम और दिग्गज शेयरों में बिकवाली तेजी की राह में बाधा बने हुए हैं।

शुक्रवार की आईटी आधारित तेजी ने सप्ताह का अंत सकारात्मक अंदाज में जरूर किया, लेकिन लगातार तीसरे सप्ताह की गिरावट यह बताती है कि बाजार में अभी स्थायी तेजी के लिए पर्याप्त भरोसा नहीं बना है। आने वाले दिनों में केवल आईटी शेयरों की मजबूती पर्याप्त नहीं होगी; बैंकिंग, वित्तीय, उपभोक्ता और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भी व्यापक खरीदारी जरूरी होगी।