Last Updated on October 16, 2026 9:26 pm by INDIAN AWAAZ

टेक महिंद्रा, टीसीएस और इन्फोसिस में उछाल से बाजार को सहारा; कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक महंगाई की चिंताओं पर निवेशकों की नजर

बिजनेस संवाददाता

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी और चुनिंदा बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त से सेंसेक्स और निफ्टी ऊंचे स्तर पर बंद हुए। निवेशकों का ध्यान सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों, रुपये की चाल और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर केंद्रित रहा। हालांकि, व्यापक बाजार में तेजी का असर समान रूप से नहीं दिखा और मिडकैप शेयरों में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

बीएसई का सेंसेक्स 413.66 अंक यानी 0.56 प्रतिशत बढ़कर 74,729.27 पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी 50 सूचकांक 148.80 अंक यानी 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,146.15 पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों ने लगातार दो कारोबारी सत्रों में क्रमशः 2.68 प्रतिशत और 2.31 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।

शुक्रवार की तेजी में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों की प्रमुख भूमिका रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का शेयर 4.89 प्रतिशत चढ़ा, जबकि इन्फोसिस में 4.61 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। भारती एयरटेल का शेयर भी 2.75 प्रतिशत मजबूत हुआ। इन शेयरों ने निफ्टी को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

हालांकि, बाजार में तेजी के बावजूद सभी क्षेत्रों में खरीदारी नहीं दिखी। आईटी और धातु कंपनियों के शेयरों में बढ़त रही, जबकि उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और तेल एवं गैस क्षेत्र के शेयरों पर दबाव देखा गया।

व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप 150 सूचकांक 0.09 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 0.06 प्रतिशत की मामूली बढ़त रही। इससे संकेत मिला कि निवेशक चुनिंदा बड़ी कंपनियों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं और छोटे तथा मझोले शेयरों में खरीदारी को लेकर सतर्क हैं।

बीएसई पर कुल 2,404 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,962 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। 263 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। बाजार में कुल मिलाकर सकारात्मक रुख रहा, लेकिन मिडकैप शेयरों की कमजोरी से स्पष्ट हुआ कि तेजी अभी सभी हिस्सों में समान रूप से नहीं फैली है।

आईटी शेयरों में तेजी, तिमाही नतीजों पर नजर

सितंबर तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। निवेशक कंपनियों की आय, मुनाफे, परिचालन मार्जिन और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं। आईटी कंपनियों के मामले में विदेशी ग्राहकों के खर्च, तकनीकी सेवाओं की मांग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर निवेश और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां विशेष महत्व रखती हैं।

टेक महिंद्रा के मजबूत नतीजों और अन्य प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से शुक्रवार को इस क्षेत्र को सहारा मिला। हालांकि, हालिया तेजी को टिकाऊ बनाने के लिए जरूरी होगा कि कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप बने रहें।

ऊंचे कच्चे तेल के दाम, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता अब भी बाजार के लिए जोखिम बने हुए हैं। ऐसे में निवेशकों का रुख कंपनी-विशेष के प्रदर्शन और भविष्य की आय की संभावनाओं पर निर्भर रहने की संभावना है।

रुपये में लगातार छठे कारोबारी सत्र में मजबूती

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले अपनी मजबूती का सिलसिला जारी रखा। रुपया शुक्रवार को 94.9275 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 94.9900 था।

रुपये में लगातार सुधार से आयात लागत पर कुछ राहत मिल सकती है, खासकर कच्चे तेल जैसी वस्तुओं के मामले में। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि रुपये में मजबूती कितनी टिकाऊ रहती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में वस्तुओं की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।

डॉलर सूचकांक 0.42 प्रतिशत गिरकर 101.62 पर आ गया। यह सूचकांक प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाता है।

भारत के 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल पिछले सत्र के 7.389 प्रतिशत से घटकर 7.365 प्रतिशत रह गया। बॉन्ड प्रतिफल पर महंगाई की उम्मीदों, सरकारी उधारी, बाजार में नकदी की उपलब्धता और मौद्रिक नीति की दिशा का प्रभाव पड़ता है।

इस बीच, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 4 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाले सोने के वायदा अनुबंध का भाव 0.62 प्रतिशत बढ़कर 1,48,401 रुपये पर पहुंच गया।

कच्चा तेल 105 डॉलर के ऊपर, भारत की चिंता बरकरार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दिसंबर 2026 वायदा अनुबंध 25 सेंट यानी 0.24 प्रतिशत गिरकर 105.67 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थी।

हालांकि, शुक्रवार की मामूली गिरावट से तेल की कीमतों को लेकर चिंता दूर नहीं हुई। मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल का भाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से देश के आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। परिवहन, विमानन, रसायन और अन्य ऊर्जा-निर्भर उद्योगों की लागत भी इससे प्रभावित हो सकती है।

यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर घरेलू मांग, कंपनियों के मुनाफे और आर्थिक विकास की संभावनाओं पर पड़ सकता है।

अगस्त में भारत के भुगतान संतुलन में 45.4 अरब डॉलर का अधिशेष

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से 15 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत के भुगतान संतुलन में 45.4 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया। अगस्त 2025 में 5.6 अरब डॉलर का घाटा दर्ज हुआ था।

इस दौरान चालू खाते का घाटा भी घटकर 5.2 अरब डॉलर रह गया, जबकि एक साल पहले इसी महीने में यह 6.1 अरब डॉलर था।

वस्तुओं के व्यापार में घाटा अगस्त 2025 के 27.6 अरब डॉलर से घटकर अगस्त 2026 में 26.6 अरब डॉलर रह गया। इस अवधि में वस्तुओं का निर्यात बढ़कर 44.7 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 35.1 अरब डॉलर था। वहीं, आयात 62.7 अरब डॉलर से बढ़कर 71.3 अरब डॉलर पहुंच गया।

सेवाओं से प्राप्त शुद्ध आय भी बढ़कर 16.5 अरब डॉलर हो गई, जबकि अगस्त 2025 में यह 15.6 अरब डॉलर थी।

निर्यात और सेवाओं से होने वाली आय में वृद्धि भारत के बाहरी आर्थिक संतुलन के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, आयात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। चालू खाते के घाटे में कमी से बाहरी क्षेत्र की स्थिति में सुधार का संकेत मिलता है, लेकिन इस रुझान की निरंतरता वैश्विक मांग, आयात लागत और निर्यात प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

यहां भुगतान संतुलन और चालू खाते के बीच अंतर समझना भी जरूरी है। भुगतान संतुलन में चालू खाते के साथ पूंजी और वित्तीय लेनदेन सहित अन्य बाहरी लेनदेन भी शामिल होते हैं। इसलिए भुगतान संतुलन में अधिशेष का अर्थ यह नहीं है कि चालू खाता भी अधिशेष में है।

भारत के लिए सेवाओं से बढ़ती आय और चालू खाते के घाटे में कमी राहत देने वाले संकेत हैं। लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में आगे वृद्धि होने पर व्यापार संतुलन पर दोबारा दबाव पड़ सकता है।

वैश्विक बाजारों में सुधार, लेकिन महंगाई का खतरा कायम

यूरोपीय शेयर बाजारों में शुक्रवार को अधिकांश प्रमुख सूचकांकों में तेजी रही। बॉन्ड प्रतिफल में नरमी और निवेशकों के बेहतर होते रुख से बाजार को समर्थन मिला। अमेरिकी शेयर बाजार के वायदा कारोबार में भी मजबूती के संकेत मिले। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, डाउ फ्यूचर्स करीब 189 अंक ऊपर था।

एशियाई बाजारों में भी अधिकांश प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों ने अमेरिकी बाजारों में आई तेजी का आकलन किया और महंगाई की चिंताओं के साथ प्रौद्योगिकी शेयरों में हालिया गिरावट के प्रभावों पर नजर रखी।

हालांकि, इंडोनेशिया का शेयर बाजार इस रुझान से अलग रहा। वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई द्वारा इंडोनेशियाई बाजार को उभरते बाजार की श्रेणी से हटाकर स्वतंत्र बाजार की श्रेणी में रखने के प्रस्ताव के बाद जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स 11 प्रतिशत से अधिक गिर गया। यह 1998 के बाद उसकी एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई।

एमएससीआई ने बाजार में पारदर्शिता, कुछ शेयरों में अत्यधिक केंद्रित हिस्सेदारी और निवेश की सुगमता से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख किया। इस प्रस्ताव से विदेशी निवेशकों की संभावित बिकवाली को लेकर आशंकाएं बढ़ीं।

अमेरिकी बाजारों में गुरुवार को तेजी दर्ज की गई। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.08 प्रतिशत चढ़ा, जबकि एसएंडपी 500 में 0.33 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही।

अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी से शेयर बाजार को समर्थन मिला, हालांकि प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा।

इस सप्ताह की शुरुआत में प्रौद्योगिकी शेयरों में गिरावट आई थी। अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़ों ने आशंका बढ़ा दी कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है।

इसके अतिरिक्त, निवेशक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी परियोजनाओं पर कंपनियों के भारी खर्च की उपयोगिता का भी आकलन कर रहे हैं। डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बढ़ते निवेश के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि कंपनियां इस खर्च से कितना लाभ अर्जित कर पाएंगी।

अमेरिकी उत्पादक महंगाई में तेज वृद्धि

अमेरिका में उत्पादक कीमतों के आंकड़ों ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सितंबर में अंतिम मांग के लिए उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) में मासिक आधार पर 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च 2022 के बाद यह सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी थी।

सालाना उत्पादक महंगाई अगस्त के 5.6 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 6.3 प्रतिशत हो गई। ऊर्जा की कीमतों में तेजी इसका एक प्रमुख कारण रही। अंतिम मांग वाली ऊर्जा कीमतों में सितंबर के दौरान 10.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

ये आंकड़े अमेरिकी उपभोक्ता महंगाई के उम्मीद से अधिक रहने के बाद आए हैं। इससे फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

यदि अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों, कंपनियों की निवेश लागत और भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।

मध्य पूर्व में तनाव से तेल आपूर्ति पर खतरा

भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बने रहे। ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि ईरान की मांगें पूरी होने तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। ईरान की समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, उन्होंने इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही बहुत सीमित होने की बात भी कही।

इसके विपरीत, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों का जलडमरूमध्य पर नियंत्रण है तथा वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही जारी है। अमेरिकी पक्ष ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गतिविधियों को आक्रामकता बताया।

दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों से दुनिया के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को न्यूजमैक्स के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे और अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती की आवश्यकता नहीं देखते।

वहीं, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन तेहरान पर वित्तीय दबाव जारी रखेगा। अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरानी वित्तीय नेटवर्क से कथित संबंधों के आरोप में 16 व्यक्तियों और 10 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने की भी घोषणा की।

होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। भारत के लिए इसका अर्थ अधिक आयात खर्च, महंगाई का दबाव और रुपये पर संभावित असर होगा। इसलिए कच्चे तेल में शुक्रवार की मामूली गिरावट को ऊर्जा बाजार में जोखिम कम होने का स्पष्ट संकेत नहीं माना जा सकता।

टेक महिंद्रा के मुनाफे में 32.7 प्रतिशत वृद्धि

टेक महिंद्रा का शेयर शुक्रवार को 8.48 प्रतिशत उछल गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 1,585.6 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 1,194.5 करोड़ रुपये से 32.7 प्रतिशत अधिक है।

कंपनी का परिचालन से राजस्व भी 15.6 प्रतिशत बढ़कर 16,180.2 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह 13,994.9 करोड़ रुपये था।

मुनाफे और राजस्व में वृद्धि ने कंपनी के शेयरों में खरीदारी को प्रोत्साहित किया।

विप्रो का मुनाफा घटा, फिर भी शेयर चढ़ा

विप्रो का शेयर 5.95 प्रतिशत बढ़ा, हालांकि कंपनी के समेकित शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 1.9 प्रतिशत की गिरावट आई।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ घटकर 3,200 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 3,262.4 करोड़ रुपये था।

हालांकि, कंपनी का सकल राजस्व 9.1 प्रतिशत बढ़कर 24,752.7 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 22,697.3 करोड़ रुपये था।

विप्रो और टेक महिंद्रा के शेयरों में तेजी से स्पष्ट हुआ कि निवेशक केवल शुद्ध लाभ के आंकड़ों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि राजस्व वृद्धि और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं को भी महत्व दे रहे हैं।

सायंट डीएलएम में 12.62 प्रतिशत गिरावट

सायंट डीएलएम का शेयर 12.62 प्रतिशत गिर गया, जबकि कंपनी ने दूसरी तिमाही में राजस्व और मुनाफे में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की।

कंपनी का राजस्व 26.5 प्रतिशत सालाना और 5.16 प्रतिशत तिमाही आधार पर बढ़कर 393.09 करोड़ रुपये हो गया।

सामान्यीकृत शुद्ध लाभ 25.8 प्रतिशत बढ़कर 15.82 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 12.6 करोड़ रुपये था।

रिपोर्ट किया गया शुद्ध लाभ 5.79 प्रतिशत बढ़कर 34.01 करोड़ रुपये रहा। पिछली समान तिमाही में यह 32.15 करोड़ रुपये था, जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 16.29 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

हालांकि, रिपोर्ट किए गए लाभ में अर्नआउट रिवर्सल से प्राप्त 18.2 करोड़ रुपये का एकमुश्त लाभ शामिल था। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों के लिए नियमित परिचालन से होने वाली कमाई और असाधारण मदों से प्राप्त लाभ के बीच अंतर समझना महत्वपूर्ण है।

पीसी ज्वैलर में उछाल, निवेशक ने खरीदे 5.1 करोड़ शेयर

पीसी ज्वैलर का शेयर 11.97 प्रतिशत चढ़ गया। यह तेजी निवेशक आदित्य कुमार हलवासिया द्वारा एनएसई पर एक बल्क डील के माध्यम से कंपनी के 5.1 करोड़ शेयर खरीदने के बाद आई।

15 अक्टूबर के एनएसई आंकड़ों के अनुसार, हलवासिया ने ये शेयर 14.43 रुपये प्रति शेयर की दर से खरीदे। यह सौदा कंपनी की 0.52 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर था।

हलवासिया क्यूपिड के प्रवर्तक हैं और कंपनी में उनकी 33.29 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उनके निवेश पोर्टफोलियो में टूरिज्म फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की 2.03 प्रतिशत हिस्सेदारी भी शामिल है।

हालांकि, किसी निवेशक की खरीदारी अपने आप में कंपनी की भविष्य की आय या शेयर के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होती।

सोलारा एक्टिव फार्मा और महिंद्रा ईपीसी में तेजी

सोलारा एक्टिव फार्मा साइंसेज का शेयर 9.43 प्रतिशत बढ़ गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 28.46 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसे 10.10 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

कंपनी का परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 33.11 प्रतिशत बढ़कर 417.34 करोड़ रुपये हो गया।

महिंद्रा ईपीसी इरिगेशन का शेयर 6.18 प्रतिशत मजबूत हुआ। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर बढ़कर 2.23 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसे 2.14 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

कंपनी का परिचालन राजस्व 46.53 प्रतिशत सालाना और 34.14 प्रतिशत तिमाही आधार पर बढ़कर 72.65 करोड़ रुपये पहुंच गया।

आईपीओ बाजार में मिला-जुला रुझान

प्राथमिक बाजार में शुक्रवार को निवेशकों की दिलचस्पी अलग-अलग कंपनियों के लिए अलग-अलग रही। फ्यूजन सीएक्स और टोंबो इमेजिंग इंडिया के निर्गमों को अच्छी मांग मिली, जबकि जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस, सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज और बोनफिग्लियोली ट्रांसमिशन्स के निर्गम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पूरी तरह सब्सक्राइब नहीं हुए थे।

फ्यूजन सीएक्स: निर्गम 4.44 गुना सब्सक्राइब

16 अक्टूबर 2026 को शाम 4:42 बजे तक उपलब्ध एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार, फ्यूजन सीएक्स को 1.40 करोड़ शेयरों की पेशकश के मुकाबले 6.23 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह निर्गम 4.44 गुना सब्सक्राइब हुआ।

निर्गम 14 अक्टूबर को खुला था और 16 अक्टूबर को बंद हुआ। इसके लिए मूल्य दायरा 275 से 289 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। न्यूनतम आवेदन 51 शेयरों और उसके बाद निर्धारित गुणकों में किया जा सकता था।

टोंबो इमेजिंग इंडिया: 7.72 गुना सब्सक्रिप्शन

टोंबो इमेजिंग इंडिया को 85.26 लाख शेयरों की पेशकश के मुकाबले 6.58 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह निर्गम 7.72 गुना सब्सक्राइब हुआ।

निर्गम 15 अक्टूबर को खुला और 19 अक्टूबर को बंद होना निर्धारित है। इसके लिए मूल्य दायरा 665 से 700 रुपये प्रति शेयर है। न्यूनतम आवेदन 21 शेयरों और उसके बाद निर्धारित गुणकों में किया जा सकता है।

जेटवर्क: निर्गम को 0.31 गुना बोलियां

जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस को 18.51 करोड़ शेयरों की पेशकश के मुकाबले 5.72 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इसके साथ निर्गम का सब्सक्रिप्शन स्तर 0.31 गुना रहा।

यह निर्गम 15 अक्टूबर को खुला और 19 अक्टूबर को बंद होना निर्धारित है। इसका मूल्य दायरा 143 से 151 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। न्यूनतम आवेदन 99 शेयरों और उसके बाद निर्धारित गुणकों में किया जा सकता है।

सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज: 0.76 गुना सब्सक्रिप्शन

सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज को 97.50 लाख शेयरों की पेशकश के मुकाबले 74.10 लाख शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह निर्गम 0.76 गुना सब्सक्राइब हुआ।

निर्गम 15 अक्टूबर को खुला और 19 अक्टूबर को बंद होना निर्धारित है। मूल्य दायरा 327 से 344 रुपये प्रति शेयर है। न्यूनतम आवेदन 43 शेयरों और उसके बाद निर्धारित गुणकों में किया जा सकता है।

बोनफिग्लियोली ट्रांसमिशन्स: लगभग पूरा सब्सक्राइब

बोनफिग्लियोली ट्रांसमिशन्स को 3.03 करोड़ शेयरों की पेशकश के मुकाबले 2.94 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। निर्गम का सब्सक्रिप्शन स्तर 0.97 गुना रहा।

निर्गम 15 अक्टूबर को खुला और 19 अक्टूबर को बंद होना निर्धारित है। इसका मूल्य दायरा 558 से 586 रुपये प्रति शेयर है। न्यूनतम आवेदन 25 शेयरों और उसके बाद निर्धारित गुणकों में किया जा सकता है।

आईपीओ के सब्सक्रिप्शन आंकड़े प्राथमिक बाजार में निवेशकों की तत्काल मांग का संकेत देते हैं, लेकिन केवल अधिक या कम सब्सक्रिप्शन के आधार पर किसी कंपनी के मूल्यांकन, वित्तीय मजबूती या शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद उसके प्रदर्शन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार से जुड़े जोखिम, निर्गम की कीमत और धन के प्रस्तावित उपयोग का भी आकलन करना चाहिए।

आगे बाजार की दिशा किन कारकों पर निर्भर करेगी?

शुक्रवार की तेजी ने प्रमुख सूचकांकों में सुधार के सिलसिले को आगे बढ़ाया। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी, रुपये की लगातार मजबूती और भारत के बाहरी खातों में सुधार के संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।

इसके बावजूद बाजार के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव, अमेरिका में महंगाई और ब्याज दरों की अनिश्चितता आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा प्रभावित कर सकती हैं।

घरेलू बाजार में तेजी कितनी टिकाऊ रहती है, यह काफी हद तक कंपनियों के तिमाही नतीजों, विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी की व्यापकता और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल, सेंसेक्स और निफ्टी में सुधार का रुख बना हुआ है, लेकिन मिडकैप शेयरों की कमजोरी और कंपनियों के नतीजों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया बताती है कि निवेशक अभी भी सतर्कता के साथ चुनिंदा शेयरों में निवेश कर रहे हैं।

अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। इसे निवेश संबंधी सलाह या किसी शेयर को खरीदने अथवा बेचने की सिफारिश न माना जाए। बाजार भाव और आईपीओ सब्सक्रिप्शन के आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। निवेश का निर्णय लेने से पहले संबंधित एक्सचेंजों और कंपनियों के नवीनतम खुलासों की जांच करें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।