Last Updated on May 24, 2026 8:46 pm by INDIAN AWAAZ

आफरीन हुसैन, कोलकाता
ईद-उल-अजहा (बकरीद) से ठीक पहले, पश्चिम बंगाल के कई मुस्लिम धर्मगुरुओं, उलमाओं और सामाजिक संगठनों ने लोगों से शांति, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी नियमों व दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है।
विभिन्न जिलों में हुई प्रेस वार्ताओं और सामाजिक बैठकों के दौरान, धार्मिक नेताओं ने ईद-उल-अजहा के त्योहार, कुर्बानी की रस्मों, सार्वजनिक नमाज, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और कानून व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक व सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की।
सरकारी नियमों के पालन की अपील
इन संगठनों ने पश्चिम बंगाल भर के मुसलमानों और अल्पसंख्यक समुदाय से अपील की है कि वे ईद के त्योहार के दौरान भाजपा के नेतृत्व वाले राज्य प्रशासन, पुलिस, नगर निकायों और स्थानीय अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करें।
धर्मगुरुओं ने कहा कि पशुओं की कुर्बानी केवल सरकारी मानदंडों, नगरपालिका के नियमों और पुलिस के दिशानिर्देशों के अनुसार ही की जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से कुर्बानी की प्रक्रिया के दौरान और उसके बाद साफ-सफाई, स्वच्छता और पर्यावरण के मानकों को बनाए रखने की अपील की।
वक्ताओं के अनुसार, कुर्बानी केवल अधिकृत (तयशुदा) स्थानों पर और कानूनी दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए। उलमाओं ने इस बात पर जोर दिया कि ईद के दौरान ऐसी कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए जिससे जनता को असुविधा हो, कानून-व्यवस्था बिगड़े या किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
गो-कुर्बानी और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर रुख
सामाजिक सौहार्द और शांति के हित में कुछ उलमाओं और सामुदायिक नेताओं ने लोगों को इस साल गो-कुर्बानी (गाय की कुर्बानी) से बचने की सलाह दी है। उन्होंने इसके बजाय इस्लामिक कानून के तहत जायज अन्य जानवरों जैसे बकरे, भेड़ आदि की कुर्बानी देने की बात कही।
धार्मिक नेताओं ने यह भी अपील की कि ईद की नमाज मुख्य रूप से मस्जिदों और निर्धारित ईदगाहों के अंदर ही आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम इबादत के नाम पर आम जनता को असुविधा पहुंचाने की वकालत नहीं करता।
यदि मस्जिदों में भीड़ बहुत ज्यादा हो जाती है, तो वैकल्पिक व्यवस्था केवल स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद ही की जानी चाहिए।
लाउडस्पीकर के नियम और कानूनी अनुपालन
वक्ताओं ने आगे मुसलमानों से अपील की कि वे लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के संबंध में अदालत के सभी निर्देशों और सरकारी नियमों का पालन करें, जिसमें आवाज की सीमा (साउंड लिमिट) और तय समय-सीमा शामिल हैं।
सामुदायिक नेताओं ने लोगों को ईद के इस सीजन में अफवाहों, भड़काऊ भाषणों, उकसाने वाले नारों और सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना सभी समुदायों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आयोजकों के अनुसार, राज्य के मुसलमान शांति, एकता और आपसी सम्मान चाहते हैं और वे बंगाल की सांप्रदायिक सौहार्द की लंबी परंपरा को कायम रखते हुए अनुशासित और कानूनी तरीके से ईद-उल-अजहा मनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अजहा की छुट्टियों पर विवाद
इसी बीच, राज्य में ईद-उल-अजहा की छुट्टियों को लेकर एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टों और राजनीतिक दावों के अनुसार, भाजपा के सत्ता में आने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने ईद की छुट्टियों को लेकर एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। दावा किया जा रहा है कि जहां पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार आमतौर पर ईद-उल-अजहा पर दो दिन की छुट्टी देती थी, वहीं वर्तमान प्रशासन ने कथित तौर पर इसे घटाकर केवल एक आधिकारिक छुट्टी (28 जून) कर दिया है। इस मुद्दे पर राज्य के कई राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
ईद की नमाज और पाबंदियों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
तृणमूल कांग्रेस (TMC)
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर ईद की नमाज से जुड़ी पाबंदियों की कड़ी आलोचना की है। पार्टी के कुछ नेताओं ने संकेत दिया है कि “सड़क पर ईद की नमाज” पर लगी पाबंदियों के खिलाफ अदालत जाने सहित कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। टीएमसी नेताओं ने भाजपा सरकार पर समाज का ध्रुवीकरण करने और धार्मिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया।
माकपा (CPI-M)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेताओं ने सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है और धार्मिक त्योहारों के आसपास अनावश्यक तनाव पैदा करने की कोशिशों की आलोचना की है। पार्टी ने सभी धार्मिक समुदायों के लिए समान अधिकारों पर जोर देने के साथ-साथ लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया।
कांग्रेस
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि त्योहारों को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए और उन्होंने प्रशासन व जनता दोनों से शांतिपूर्ण ढंग से त्योहार मनाना सुनिश्चित करने की अपील की। कांग्रेस नेताओं ने धार्मिक मामलों पर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिशों की भी आलोचना की।
तोहा सिद्दीकी का रुख
पीरजादा तोहा सिद्दीकी ने मुसलमानों से ईद के त्योहार के दौरान धैर्य, एकता और अनुशासन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने धार्मिक रीतियों को शांतिपूर्ण ढंग से निभाने पर जोर दिया और सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता पर अनावश्यक पाबंदियां न लगाने का आग्रह किया।
नौशाद सिद्दीकी का रुख
नौशाद सिद्दीकी (ISF) ने मुस्लिम धार्मिक प्रथाओं पर चुनिंदा (पक्षपातपूर्ण) पाबंदियां लगाने के सरकारी रवैये की आलोचना की, साथ ही उन्होंने लोगों से किसी भी तरह के उकसावे में न आने की अपील की। उन्होंने टकराव के बजाय लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से जवाब देने की बात कही।
हुमायूं कबीर का नया राजनीतिक मंच
‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के विधायक हुमायूं कबीर और उनके नए राजनीतिक मंच से जुड़े नेताओं ने कहा कि धार्मिक सौहार्द और संवैधानिक अधिकार, दोनों की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से ईद मनाने की अपील की और इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशों की निंदा की।
आम जनता और विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों की प्रतिक्रियाएं
शिक्षकों, व्यापारियों, परिवहन कर्मचारियों, वकीलों, डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों ने ईद-उल-अजहा के दौरान शांति और आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की है। कई नागरिकों का कहना है कि बंगाल में सांप्रदायिक सौहार्द और सह-अस्तित्व की एक लंबी परंपरा रही है, और त्योहारों को सामाजिक एकता को मजबूत करना चाहिए न कि विभाजन पैदा करना चाहिए।
व्यापारी संगठनों और बाजार संघों ने भी लोगों से अपील की है कि वे पशुओं की कुर्बानी और कचरे के निपटान के दौरान स्वच्छता और नगरपालिका के दिशानिर्देशों का पालन करें ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और नागरिकों दोनों से भड़काऊ राजनीति से दूर रहने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि पूरे राज्य में ईद का त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।
