EC Full Bench Meets as ECINet, SIR

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली: चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने शनिवार को बैठक कर आयोग के भीतर कथित मतभेद, चुनावी सॉफ्टवेयर ECINet के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठे विवादों पर चर्चा की। बैठक ऐसे समय हुई है, जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर सवाल लगातार तेज हो रहे हैं।

आयोग की यह बैठक सामान्य पूर्ण पीठ की बैठक से अलग मानी गई, क्योंकि इसमें आयोग से जुड़े विभिन्न विवादों पर स्पष्टीकरण देने पर विशेष जोर रहा। इनमें दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन को लिखे गए पत्र का मुद्दा भी शामिल था।

यह बैठक द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद हुई, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनावी मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर के कामकाज को लेकर बार-बार आपत्तियां उठाई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने एक प्रशासनिक आदेश को लेकर अलग-अलग कैबिनेट सचिव से भी संपर्क किया था।

ECINet के कामकाज को लेकर आयोग ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर इसकी समीक्षा का आदेश दिया है। समिति में IIT/IIIT के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा।

इस बीच इन घटनाक्रमों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राजनीतिक विरोध को भी तेज कर दिया है। CJP ने घोषणा की है कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से मुंबई से राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग और SIR से जुड़े विवाद पर अपनी रणनीति को लेकर समन्वय बढ़ा दिया है। INDIA गठबंधन की ओर से आने वाले दिनों में आगे की कार्रवाई तय किए जाने की संभावना है।

आयोग ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को ऐसे मतदाताओं के आवेदन में मदद करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही CEOs, जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (EROs) को ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान तत्काल शुरू करने को कहा गया है।

ECI ने यह भी कहा कि SIR के लिए विशेष रूप से फॉर्म-6 के साथ लगाए गए घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है। आयोग के मुताबिक, SIR प्रक्रिया से बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म ही लागू रहेंगे।

गोवा में मतदाता सूची से कुछ मतदाताओं के नाम छूट जाने के मामले पर भी आयोग ने स्पष्टीकरण दिया। आयोग ने बताया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को घर-घर जाकर संबंधित फॉर्म एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। इस अभियान में पहचान किए गए 97 मतदाताओं में से 81 ने पहले ही मतदाता सूची में शामिल होने के लिए फॉर्म-6 दाखिल कर दिया है।

बैठक के बाद जारी प्रेस नोट में चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र से जुड़े विवाद पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि यह मामला आयोग की किसी नीति या उसके IT विभाग से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा प्रशासनिक विषय था।

आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-पुनर्वितरण संबंधी आदेशों को लागू नहीं किया गया था। साथ ही IT विभाग की निगरानी का अधिकार उप चुनाव आयुक्त से कभी वापस नहीं लिया गया था।