इंद्र वशिष्ठ, 

पंजाबी बाग निवासी व्यापारी से 2 करोड़ रुपये रंगदारी वसूलने के आरोप में दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी को हरियाणा पुलिस तलाश कर रही है। 

एसआई प्रदीप कुमार रांगी पश्चिम जिले के डीसीपी दराडे़ शरद भास्कर का पीए है। ये मामला सामने आने के बाद से वह नौकरी से गायब है।

डीसीपी का खास पीए-

स्पेशल पुलिस कमिश्नर स्तर के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डीसीपी भास्कर जब ट्रैफिक में तैनात थे, एसआई प्रदीप रांगी तभी से उनके साथ अटैच है। जबकि कागजों में उसकी तैनाती बाहरी उत्तरी जिले में थी। अब यह मामला सामने आने के बाद एसआई प्रदीप कुमार रांगी को डीसीपी ने रिलीव कर दिया। लेकिन प्रदीप कुमार रांगी ने बाहरी उत्तरी जिले में जॉइन नहीं किया है। वह गायब है। इस मामले में डीसीपी भास्कर का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई। पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा, दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजीव रंजन समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारियों से भी संपर्क की कोशिश की गई। 

कमिश्नर खुलासा करें- 

दिल्ली पुलिस के कमिश्नर और आईपीएस अधिकारियों को संगीन अपराध के इस मामले में डीसीपी और पीए की भूमिका के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। बताना चाहिए कि एसआई प्रदीप कुमार रांगी के ख़िलाफ़ कोई विभागीय कार्रवाई की गई है या नहीं? 

5करोड़ मांगे-

वेस्ट पंजाबी बाग निवासी एक्वालाइट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर देवेन्द्र कुमार की बहादुर गढ़ के कसार गांव में फैक्टरी है। 16 और 18 अप्रैल को इंटरनेशनल कॉल से कॉलर ने खुद को गैंगस्टर्स लॉरेंस बिश्नाई गिरोह का रणदीप मलिक बताकर देवेन्द्र से पांच करोड़ रुपए रंगदारी मांगी। 

20 अप्रैल को रोहिणी इलाके में देवेन्द्र ने रणदीप के बताए गुर्गों को दो करोड़ रुपए सौंप दिए। रकम देने के बावजूद 21 अप्रैल को दोबारा से धमकी दी गई कि, लॉरेंस भाई ने पैसे कम बताएं हैं। दो करोड़ रुपये और मांगे गए। उसके बाद देवेन्द्र कुमार ने सेक्टर-6 बहादुरगढ़ पुलिस को शिकायत दी।  22 अप्रैल को मामला दर्ज कर लिया गया।  इस मामले में हरियाणा पुलिस कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, उनसे मिली जानकारी के बाद ही दिल्ली पुलिस के एसआई प्रदीप कुमार रांगी की  तलाश शुरू कर दी गई। 

जमानत अर्जी खारिज-

झज्जर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार राणा ने आरोपी एसआई प्रदीप कुमार रांगी की अग्रिम जमानत याचिका 6 मई को खारिज कर दी। अदालत में पुलिस की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता आरोपी प्रदीप कुमार रांगी ने अपराध को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उसने दूसरे साथियों के साथ मिलकर जबरन वसूली करवाने की आपराधिक साजिश रची थी।  आरोपी के पास से जबरन वसूली की काफी बड़ी रकम बरामद की जानी है। जिस पर अदालत ने भी माना है कि आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना आवश्यक है।