Last Updated on January 7, 2026 12:51 am by INDIAN AWAAZ

ढाका से ज़ाकिर हुसैन

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा ने फिर से गंभीर रूप ले लिया है। बीते 24 घंटों के भीतर दो हिंदू पुरुषों की निर्मम हत्या कर दी गई, जिससे पिछले 18 दिनों में मारे गए हिंदुओं की संख्या छह हो गई है। इन घटनाओं ने अंतरिम सरकार के तहत कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ताज़ा पीड़ितों में 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि, जो नरसिंदी जिले में किराना दुकानदार थे, और 38 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी, हिंदू पत्रकार व व्यवसायी, शामिल हैं। बैरागी की सोमवार को जशोर जिले में गोली मारकर और गला रेतकर हत्या कर दी गई।

नरसिंदी के पलाश उपज़िला स्थित चारसिंदूर बाज़ार में सोमवार रात शरत चक्रवर्ती मणि पर उनकी दुकान पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने अचानक उन पर हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।

मणि, शिबपुर उपज़िला के साधरचर संघ निवासी मदन ठाकुर के पुत्र थे। उनके परिवार में पत्नी अंतरा मुखर्जी और 12 वर्षीय पुत्र अभिक चक्रवर्ती हैं। मणि पहले दक्षिण कोरिया में काम कर चुके थे और कुछ वर्ष पूर्व बांग्लादेश लौटकर नरसिंदी शहर के ब्रह्मांडी इलाके में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। परिजनों का कहना है कि उनका किसी से कोई विवाद नहीं था।

19 दिसंबर को मणि ने फेसबुक पर लिखा था, “हर तरफ आग और हिंसा है। मेरा जन्मस्थान मौत की घाटी बन गया है।” एक पड़ोसी ने बताया कि मणि शांत, मानवीय और सामाजिक व्यक्ति थे—“उनकी हत्या का एकमात्र कारण उनका हिंदू होना प्रतीत होता है।”

इसी दिन जशोर जिले के मोनिरामपुर इलाके में राणा प्रताप बैरागी, जो दैनिक बीडी खबर के कार्यवाहक संपादक और आइस फैक्ट्री के मालिक थे, की निर्मम हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, तीन लोग मोटरसाइकिल पर आए और उन्हें उनकी फैक्ट्री से बाहर बुलाकर सिर में तीन गोलियां मारीं और गला रेत दिया। मौके से सात खोखे बरामद किए गए हैं।

पुलिस ने हत्या के पीछे प्रतिबंधित पूर्वो बंगाल कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े आंतरिक विवाद की आशंका जताई है, हालांकि मामले की जांच जारी है।

ये दोनों हत्याएं ऐसे समय हुई हैं, जब बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंदुओं पर हमलों की एक चिंताजनक श्रृंखला सामने आई है। हाल के हफ्तों में शरियतपुर में खोकन चंद्र दास, एक हिंदू दवा दुकानदार, की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। दिसंबर में दीपु चंद्र दास और अमृत मंडल को भी कथित तौर पर भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, जबकि मयमनसिंह में एक हिंदू कपड़ा फैक्ट्री कर्मचारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

हिंसा की इस लहर के बीच हिंदू महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों ने भी समुदाय में भय बढ़ा दिया है। झिनाइदह जिले के कालिगंज उपज़िला में एक 40 वर्षीय हिंदू विधवा के साथ सामूहिक दुष्कर्म, अमानवीय यातना और सार्वजनिक अपमान का मामला सामने आया है। पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने उसे पेड़ से बांधकर प्रताड़ित किया, बाल काटे और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हत्याएं, मॉब लिंचिंग और यौन अपराध बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के लिए गहराते संकट को दर्शाते हैं। भारत ने भी बार-बार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा पर चिंता जताई है और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने की बात कही है।

2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या लगभग 1.31 करोड़ है, जो कुल आबादी का करीब 7.95 प्रतिशत है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने कई घटनाओं की निंदा करते हुए अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है, लेकिन लगातार हो रही हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।