Last Updated on March 8, 2026 1:31 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / काठमांडू
नेपाल की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव सामने आया है। रैपर से नेता बने Balendra Shah, जिन्हें आम तौर पर बालेन शाह के नाम से जाना जाता है, की पार्टी Rastriya Swatantra Party (आरएसपी) ने संसदीय चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल कर ली है और अब वह देश में अगली सरकार बनाने की स्थिति में है। इस चुनावी परिणाम ने दशकों से नेपाली राजनीति पर हावी पारंपरिक दलों को बड़ा झटका दिया है।
35 वर्षीय बालेन शाह, जिन्हें आरएसपी ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था, ने झापा-5 संसदीय क्षेत्र से चार बार प्रधानमंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता KP Sharma Oli को लगभग 50 हजार वोटों के भारी अंतर से हराया। ओली की पार्टी Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) को इस चुनाव में अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा।
संसद में आरएसपी की बड़ी बढ़त
प्रारंभिक चुनाव परिणामों के अनुसार, राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी ने 106 सीटों पर जीत दर्ज की है और 18 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इससे पार्टी को संसद में स्पष्ट बहुमत के करीब पहुंचने का मौका मिल गया है।
दूसरी ओर, नेपाल की प्रमुख पारंपरिक पार्टी Nepali Congress को केवल 15 सीटें मिली हैं और वह तीन सीटों पर आगे चल रही है। वहीं सीपीएन-यूएमएल को 7 सीटें मिली हैं और वह तीन अन्य सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसके अलावा Nepal Communist Party ने 6 सीटें जीती हैं और दो सीटों पर आगे है।
नेपाल में 5 मार्च को हुए इन संसदीय चुनावों में लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया, जिसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता की मजबूत भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है।
नेपाल की संसद 275 सदस्यों की है। इनमें से 165 सांसद प्रत्यक्ष मतदान (फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली) के तहत चुने जाते हैं, जबकि शेष 110 सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से चुने जाते हैं।
सबसे युवा और पहले मधेसी प्रधानमंत्री बनने की संभावना
यदि संसद में औपचारिक रूप से उन्हें समर्थन मिल जाता है, तो बालेन शाह नेपाल के इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनेंगे। साथ ही वे देश के पहले मधेसी प्रधानमंत्री भी होंगे। मधेसी समुदाय मुख्य रूप से नेपाल के तराई क्षेत्र में रहता है और लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में युवाओं और शहरी मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर बालेन शाह का समर्थन किया। कई मतदाता पारंपरिक दलों से निराश थे और वे भ्रष्टाचार, राजनीतिक अस्थिरता तथा आर्थिक समस्याओं से परेशान थे।
रैपर से राजनीति तक का सफर
राजनीति में आने से पहले बालेन शाह एक लोकप्रिय रैपर और सिविल इंजीनियर के रूप में जाने जाते थे। उनकी लोकप्रियता तब और बढ़ी जब उन्होंने 2022 में काठमांडू के मेयर का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत लिया था। उस जीत ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक नई पहचान दिलाई।
मेयर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई, प्रशासनिक पारदर्शिता और शहरी विकास पर जोर दिया। इसी लोकप्रियता के आधार पर उन्होंने राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी को मजबूत किया और इसे बदलाव की राजनीति का प्रतीक बताया।
नई सरकार के सामने चुनौतियाँ
हालांकि चुनावी जीत के बाद बालेन शाह के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ होंगी। नेपाल की अर्थव्यवस्था फिलहाल धीमी वृद्धि, बेरोजगारी और विदेशी रोजगार पर निर्भरता जैसी समस्याओं से जूझ रही है। बड़ी संख्या में नेपाली युवा रोजगार की तलाश में विदेश जाते हैं और देश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक उनके भेजे गए धन (रेमिटेंस) पर निर्भर करती है।
इसके अलावा नेपाल को प्राकृतिक आपदाओं, बुनियादी ढांचे की कमी और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।
भारत ने दी बधाई
भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने नेपाल में सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न होने पर वहां की जनता और सरकार को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है।
मोदी ने यह भी कहा कि India नेपाल का करीबी मित्र और पड़ोसी है तथा वह नई सरकार के साथ मिलकर शांति, विकास और समृद्धि के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बहुत गहरे हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है और व्यापार, ऊर्जा तथा संपर्क परियोजनाओं में व्यापक सहयोग चलता रहा है।
नई राजनीतिक दिशा की उम्मीद
नेपाल में 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद से देश में कई बार सरकारें बदली हैं और राजनीतिक अस्थिरता बनी रही है। ऐसे में बालेन शाह की पार्टी की यह बड़ी जीत नेपाली राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बालेन शाह अपनी लोकप्रियता को प्रभावी शासन में बदल पाएंगे और क्या उनकी सरकार नेपाल को स्थिरता, आर्थिक विकास और राजनीतिक सुधार की दिशा में आगे ले जा सकेगी।
