Last Updated on September 28, 2025 12:37 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / WEB DESK

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र के आम बहस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का एक पड़ोसी देश वैश्विक आतंकवाद का गढ़ बन चुका है और स्वतंत्रता के समय से ही भारत आतंकवाद की चुनौती का सामना करता आया है।

जयशंकर ने कहा कि दशकों से दुनिया में हुए बड़े आतंकी हमलों की जड़ें उसी एक देश से जुड़ी पाई जाती हैं। उन्होंने इस तथ्य की ओर भी ध्यान दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र की आतंकवादियों की सूची ऐसे ही नागरिकों से भरी पड़ी है। उन्होंने अप्रैल 2025 में पाहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने अपने लोगों की रक्षा का अधिकार प्रयोग किया और दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुँचाया।

विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद एक साझा वैश्विक खतरा है और इससे लड़ने के लिए गहरी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी अनिवार्य है।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि ईमानदारी से रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाए तो यह स्पष्ट होगा कि संगठन संकटग्रस्त स्थिति में है। सुधारों के प्रति लगातार प्रतिरोध ने इसकी विश्वसनीयता को कमजोर कर दिया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्यता विस्तार की माँग दोहराई और कहा कि भारत इस दिशा में बड़ी जिम्मेदारियाँ सँभालने के लिए तैयार है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया आज टैरिफ अस्थिरता, बाज़ारों तक पहुँच में अनिश्चितता और सीमित आपूर्ति स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा संघर्ष और अवरोध की सबसे पहली शिकार बनती है। अमीर समाज अपने आपको सुरक्षित कर लेते हैं जबकि संसाधनों से जूझते देशों को सिर्फ़ उपदेश सुनने को मिलता है।

जयशंकर ने कहा कि भारत हमेशा अपनी स्वतंत्र पसंद (freedom of choice) बनाए रखेगा और ग्लोबल साउथ की आवाज़ बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने लोगों की रक्षा और उनके हितों को देश और विदेश दोनों में सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भारत की सोच को परिभाषित करने वाले तीन मूल मंत्रों पर बल दिया:

  • आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta)
  • आत्मरक्षा (Atmaraksha)
  • आत्मविश्वास (Atmavishwas)

उन्होंने कहा कि इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर भारत समकालीन विश्व में अपनी भूमिका निभा रहा है।