
Staff Reporter / नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद आसिम वकार बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस में शामिल होने के साथ ही वकार ने असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी भाजपा का विरोध करने का दावा तो करती है, लेकिन उसे सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे विपक्षी दलों को ही निशाना बनाती है।
वकार ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और AICC अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी मौजूद रहे।
पार्टी बदलने के अपने फैसले की वजह बताते हुए वकार ने कहा कि जो लोग भाजपा को सत्ता से हटाना चाहते हैं, उन्हें उसी लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए, न कि दूसरे विपक्षी दलों से लड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश से प्रेम करने वाले सभी लोगों का एकमात्र उद्देश्य भाजपा की सरकार को सत्ता से हटाकर ऐसी धर्मनिरपेक्ष सरकार का गठन होना चाहिए, जो जनता के हित में काम करे।
वकार ने AIMIM में अपने वर्षों के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि पार्टी भाजपा के खिलाफ अपने घोषित रुख के बावजूद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों से राजनीतिक संघर्ष में अधिक व्यस्त रही, जो भाजपा को हराने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विपक्षी दलों को कमजोर करने और उनके विस्तार को रोकने के लिए लगातार उनसे ही लड़ाई की जाती रहेगी, तो इससे आखिर किसे फायदा होगा।
वकार ने कहा कि यदि वास्तव में भाजपा को सत्ता से हटाना लक्ष्य है, तो राजनीतिक संघर्ष का मुख्य केंद्र भाजपा ही होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई पार्टी भाजपा के विरोध में खड़े दलों से लड़ती है, तो अप्रत्यक्ष रूप से वह भाजपा के लिए मददगार साबित होती है।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भी सराहना की और कहा कि कांग्रेस तथा राहुल गांधी की टीम देशभर में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष कर रही है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में वकार लंबे समय तक AIMIM की प्रमुख आवाजों में शामिल रहे हैं और उन्हें पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के करीबी नेताओं में माना जाता था। ऐसे में उनका कांग्रेस में जाना AIMIM के लिए खास तौर पर उत्तर प्रदेश में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा सकता है।
वकार का कांग्रेस में प्रवेश ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले हैं। राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से संयुक्त चुनौती मिलने की संभावना है। ऐसे में विपक्षी मतों का बंटवारा या एकजुटता चुनावी नतीजों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
राजेंद्र पाल गौतम ने वकार का कांग्रेस में स्वागत करते हुए कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस शिक्षा, रोजगार, छात्रों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को लेकर व्यापक राजनीतिक आंदोलन चला रही है।
गौतम ने कहा कि राहुल गांधी लगातार समाज के हर वर्ग की आवाज मजबूती से उठा रहे हैं और सरकार को विभिन्न मुद्दों पर सचेत कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग दलों के नेता कांग्रेस में शामिल होकर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के हाथ मजबूत कर रहे हैं।
वकार के कांग्रेस में शामिल होने से उत्तर प्रदेश में AIMIM की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठ सकते हैं। AIMIM लंबे समय से राज्य में अपने राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करने और विशेष रूप से मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
वकार का कांग्रेस में जाना ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ एक प्रभावी राजनीतिक मोर्चा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में उनकी राजनीतिक पारी का कांग्रेस की ओर रुख करना विपक्षी खेमे में वोटों के समीकरण को लेकर नई चर्चा को जन्म दे सकता है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में चुनावी मुकाबला बहुकोणीय होने की स्थिति में छोटे दलों और क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। AIMIM का चुनावी विस्तार और कांग्रेस-सपा गठजोड़ की संभावित रणनीति इस व्यापक मुकाबले का हिस्सा होगी।
वकार का दलबदल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह AIMIM के उत्तर प्रदेश में प्रमुख चेहरों में रहे हैं। उनका कांग्रेस में जाना जहां कांग्रेस को एक प्रमुख मुस्लिम राजनीतिक आवाज को अपने साथ जोड़ने का अवसर देता है, वहीं AIMIM के लिए राज्य में अपने संगठनात्मक और चुनावी विस्तार की रणनीति को लेकर नई चुनौती खड़ी कर सकता है।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वकार का कांग्रेस में प्रवेश उत्तर प्रदेश में विपक्षी राजनीति, मुस्लिम मतदाताओं के बीच समर्थन और भाजपा के खिलाफ चुनावी समीकरणों को किस हद तक प्रभावित करता है।
