Last Updated on November 3, 2026 9:28 pm by INDIAN AWAAZ

बिजनेस संवाददाता

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार तेजी दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार खरीदारी और रुपये में मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। इसके अलावा विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) की समीक्षा किए जाने की संभावना से भी बाजार की धारणा को बल मिला। बड़े शेयरों में निचले स्तरों पर हुई खरीदारी ने तेजी को और गति दी। इसके साथ ही घरेलू शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की गई।

हालांकि, वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी और ईरान से संबंधित भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर निवेशकों की चिंता बनी रही। अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव और वैश्विक ब्याज दरों की दिशा पर भी बाजार की नजर रही।

पूंजीगत लाभ कर को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की टिप्पणी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत रही। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों पर लागू पूंजीगत लाभ कर की समीक्षा करने के अनुरोधों पर सरकार विचार करेगी। हालांकि, इस संबंध में किसी नीतिगत बदलाव की घोषणा नहीं की गई, लेकिन वित्त मंत्री के बयान से विदेशी निवेश के प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए कर व्यवस्था में संभावित बदलाव की उम्मीद जगी।

मंगलवार के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 प्रतिशत उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 सूचकांक 370.05 अंक यानी 1.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंच गया। इस तरह निफ्टी एक बार फिर 23,800 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

पिछले लगातार चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 5.01 प्रतिशत और निफ्टी में 4.47 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। इससे बाजार में हालिया सुधार को मजबूती मिली है और निवेशकों का रुझान एक बार फिर बड़े शेयरों की ओर बढ़ता दिखाई दिया।

बैंकिंग और दिग्गज शेयरों ने संभाली बाजार की कमान

मंगलवार को बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, एफएमसीजी और रियल्टी कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेजी ने प्रमुख सूचकांकों को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

निफ्टी में भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल रहे। भारती एयरटेल का शेयर 3.77 प्रतिशत चढ़ा, जबकि एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में क्रमशः 3.64 प्रतिशत और 2.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में खरीदारी से संकेत मिला कि निवेशक विदेशी निवेश प्रवाह और मुद्रा बाजार में अपेक्षाकृत स्थिरता की उम्मीद के बीच बड़े वित्तीय शेयरों में निवेश बढ़ा रहे हैं।

एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में भी मांग बनी रही। हालांकि, बाजार के सभी क्षेत्रों में एक जैसी तेजी नहीं दिखाई दी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू बैंक) और धातु कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही, जिससे बाजार की तेजी कुछ हद तक सीमित हुई।

दूसरी ओर, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन प्रमुख सूचकांकों की तुलना में कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप 150 सूचकांक में करीब एक प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 सूचकांक 0.42 प्रतिशत चढ़ा।

एनएसई पर बाजार का रुख सकारात्मक रहा। कुल 2,127 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 1,477 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं, 109 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे स्पष्ट हुआ कि खरीदारी केवल कुछ चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, हालांकि छोटे शेयरों में निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत सतर्क बना रहा।

वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत

विदेशी बाजारों से भारतीय शेयर बाजार को मिले संकेत मिश्रित रहे। मंगलवार को एशियाई बाजारों में गिरावट रही। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में भारी निवेश के मुकाबले संभावित रिटर्न को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। जापान का शेयर बाजार कल्चर डे के अवसर पर बंद रहा।

यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी रही। निवेशक वैश्विक प्रौद्योगिकी शेयरों में बिकवाली के अलावा अमेरिका के मध्यावधि चुनाव और इस सप्ताह बैंक ऑफ इंग्लैंड के ब्याज दर संबंधी फैसले को लेकर सतर्क रहे।

ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को अपनी प्रमुख नकद ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत यानी 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 4.85 प्रतिशत कर दिया। यह नवंबर 2008 के बाद का उच्चतम स्तर है। इस वर्ष बैंक की ओर से यह पांचवीं ब्याज दर वृद्धि है।

अमेरिकी शेयर बाजार में सोमवार, 2 नवंबर को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। प्रौद्योगिकी शेयरों में गिरावट के बावजूद अन्य क्षेत्रों में खरीदारी से डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 213.67 अंक यानी 0.41 प्रतिशत बढ़कर 51,983.98 पर बंद हुआ।

हालांकि, एसएंडपी 500 सूचकांक 38.67 अंक यानी 0.51 प्रतिशत गिरकर 7,541.40 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट में 272.68 अंक यानी 1.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 25,164.32 पर बंद हुआ।

एआई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और उससे मिलने वाले संभावित मुनाफे को लेकर निवेशकों की चिंताओं का असर प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। एनवीडिया का शेयर 1.26 प्रतिशत, माइक्रोसॉफ्ट का 2.83 प्रतिशत और एप्पल का 1.83 प्रतिशत गिर गया। ओरेकल के शेयरों में भी आठ प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही। कंपनी की ओर से शेयर और ऋण के माध्यम से 20 अरब डॉलर जुटाने की योजना की खबरों के बीच निवेशकों ने बिकवाली की।

मर्वेल टेक्नोलॉजी के शेयर 12.72 प्रतिशत और ऑप्टिकल उपकरण बनाने वाली कंपनी ल्यूमेंटम के शेयर 18.59 प्रतिशत टूट गए। दोनों कंपनियों ने ऑल-स्टॉक समझौते के तहत अधिग्रहण की घोषणा की थी। इस सौदे में मर्वेल टेक्नोलॉजी, ल्यूमेंटम का अधिग्रहण करेगी और इसका अनुमानित एंटरप्राइज वैल्यू 115 अरब डॉलर है।

इस बीच, एप्पल के तिमाही नतीजे भी निवेशकों के बीच चर्चा का विषय रहे। कंपनी ने वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 114.5 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 12 प्रतिशत अधिक है। यह विश्लेषकों के 113.4 अरब डॉलर के अनुमान से भी बेहतर रहा।

कंपनी का शुद्ध लाभ 12 प्रतिशत बढ़कर 30.71 अरब डॉलर हो गया, जबकि प्रति शेयर आय 2.10 डॉलर रही। विश्लेषकों ने इसके 1.99 डॉलर रहने का अनुमान लगाया था।

हालांकि, दिसंबर तिमाही के लिए कंपनी ने सकल लाभ मार्जिन 45 से 46 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया, जो सितंबर तिमाही के 47.9 प्रतिशत से कम है। इस कमजोर अनुमान के कारण बेहतर नतीजों के बावजूद एप्पल के शेयरों पर दबाव बना रहा।

अमेरिका में विनिर्माण गतिविधियों में भी सुधार दर्ज किया गया। इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट का विनिर्माण परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अक्टूबर में बढ़कर 55.5 पर पहुंच गया, जबकि सितंबर में यह 54.5 था। बाजार का अनुमान भी 54.5 का था। इस आंकड़े से अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र में लगातार विस्तार का संकेत मिला।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। चुनाव परिणामों का असर राजकोषीय नीतियों, सरकारी खर्च और विशेष रूप से प्रौद्योगिकी क्षेत्र के नियमन से जुड़ी भविष्य की संभावनाओं पर पड़ सकता है।

कच्चा तेल, रुपया और बॉन्ड यील्ड पर नजर

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी ने भारतीय बाजार को राहत दी, हालांकि मंगलवार को ब्रेंट क्रूड में फिर तेजी देखने को मिली। दिसंबर 2026 डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 82 सेंट यानी 0.78 प्रतिशत बढ़कर 105.59 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत हुआ। रुपया 94.7750 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 94.8400 था। रुपये में इस मजबूती से आयातित महंगाई और देश के तेल आयात बिल को लेकर कुछ राहत की उम्मीद बनी।

सरकारी प्रतिभूति बाजार में भारत के 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.324 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले सत्र में यह 7.313 प्रतिशत थी।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर इंडेक्स 0.06 प्रतिशत बढ़कर 101.81 पर पहुंच गया। अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड भी 0.39 प्रतिशत बढ़कर 4.909 प्रतिशत हो गई।

वहीं, घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट रही। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला सोना वायदा 1.36 प्रतिशत गिरकर 1,38,282 रुपये पर आ गया।

तिमाही नतीजों से शेयरों में हलचल

कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों का असर मंगलवार को कई शेयरों पर देखने को मिला। बेहतर मुनाफे और बिक्री में वृद्धि वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी रही, जबकि कमजोर नतीजों से कुछ शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

मैरिको का शेयर करीब 10 प्रतिशत उछल गया। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में 30.95 प्रतिशत बढ़कर 550 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 420 करोड़ रुपये था। 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व 12.96 प्रतिशत बढ़कर 3,897 करोड़ रुपये रहा।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का शेयर 1.70 प्रतिशत गिर गया। हालांकि, बैंक का शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 14.28 प्रतिशत बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 20,160 करोड़ रुपये था। शुद्ध ब्याज आय भी 14.69 प्रतिशत बढ़कर 49,143 करोड़ रुपये रही, जो एक वर्ष पहले 42,847 करोड़ रुपये थी।

केईसी इंटरनेशनल के शेयर में 9.36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का समेकित कर-पश्चात लाभ (पीएटी) 82 प्रतिशत घटकर 30 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 161 करोड़ रुपये था। कंपनी का समेकित राजस्व भी 10 प्रतिशत गिरकर 5,468 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष 6,092 करोड़ रुपये था।

एकम्स ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स का शेयर 3.82 प्रतिशत चढ़ गया। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 176.73 प्रतिशत बढ़कर 112.85 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 40.78 करोड़ रुपये था। परिचालन राजस्व में भी 31.93 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 1,342.38 करोड़ रुपये रहा।

केआरबीएल का शेयर 10.59 प्रतिशत उछल गया। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 50.44 प्रतिशत बढ़कर 258.93 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 172.11 करोड़ रुपये था। परिचालन राजस्व भी 14.31 प्रतिशत बढ़कर 1,727.36 करोड़ रुपये रहा।

ट्राइडेंट के शेयर में 7.11 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी का समेकित कर-पश्चात लाभ 93.09 प्रतिशत बढ़कर 175.58 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 90.93 करोड़ रुपये था। हालांकि, कंपनी का परिचालन राजस्व 3.79 प्रतिशत घटकर 1,719.48 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वर्ष 1,787.17 करोड़ रुपये था।

किटेक्स गारमेंट्स का शेयर 15.08 प्रतिशत उछल गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में 16.75 करोड़ रुपये का समायोजित शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में उसे 15.13 करोड़ रुपये का समायोजित शुद्ध घाटा हुआ था। कंपनी की शुद्ध बिक्री भी 66.29 प्रतिशत बढ़कर 203.04 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष 122.10 करोड़ रुपये थी।

बाजार की आगे की दिशा

लगातार चार कारोबारी सत्रों की तेजी ने घरेलू शेयर बाजार के निकट अवधि के रुख को मजबूत किया है। निफ्टी का 23,800 के ऊपर बंद होना और सेंसेक्स का 77,000 के स्तर के करीब पहुंचना निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है।

हालांकि, इस तेजी को आगे बनाए रखने के लिए विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

विदेशी निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ कर की समीक्षा की संभावना बाजार के लिए सकारात्मक पहलू है, लेकिन निवेशक केवल उम्मीदों के बजाय सरकार की ओर से ठोस नीतिगत संकेतों का इंतजार करेंगे।

दूसरी ओर, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, ऊंची बॉन्ड यील्ड और वैश्विक प्रौद्योगिकी शेयरों में कमजोरी बाजार के लिए जोखिम बने हुए हैं। हालिया तेजी में बड़े बैंकिंग और उपभोग क्षेत्र के शेयरों ने अहम भूमिका निभाई है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन बताता है कि निवेशक अभी भी सतर्कता बरत रहे हैं।

आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की स्थिति और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर बाजार की नजर रहेगी।

अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। इसे किसी भी शेयर या प्रतिभूति को खरीदने अथवा बेचने की निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

नई लिस्टिंग की रिपोर्ट

बीएलएस पॉलिमर्स और एसएफसी एनवायरनमेंटल के शेयरों की शानदार लिस्टिंग

बिजनेस संवाददाता

शेयर बाजार में मंगलवार को बीएलएस पॉलिमर्स और एसएफसी एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज के शेयरों ने शानदार शुरुआत की। दोनों कंपनियों के शेयर बीएसई पर अपने इश्यू प्राइस से काफी अधिक भाव पर बंद हुए, जिससे आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों को अच्छी लिस्टिंग बढ़त मिली।

बीएलएस पॉलिमर्स का शेयर बीएसई पर 244.10 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो 150 रुपये के इश्यू प्राइस से 62.73 प्रतिशत अधिक था। कारोबार के दौरान शेयर में तेजी और बढ़ी तथा इसने 285.25 रुपये का उच्चतम और 225 रुपये का न्यूनतम स्तर छुआ।

अंत में बीएलएस पॉलिमर्स का शेयर 269.30 रुपये पर बंद हुआ। इस तरह इश्यू प्राइस के मुकाबले निवेशकों को 79.53 प्रतिशत की बढ़त मिली। बीएसई पर कंपनी के 77.60 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

इसी तरह एसएफसी एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज के शेयरों ने भी सकारात्मक शुरुआत की। कंपनी का शेयर 330 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 354.05 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो 7.29 प्रतिशत का प्रीमियम था।

कारोबार के दौरान शेयर ने 424.85 रुपये का उच्चतम और 354.05 रुपये का न्यूनतम स्तर छुआ। अंत में यह 424.85 रुपये पर बंद हुआ। इस तरह इश्यू प्राइस की तुलना में शेयर में 28.74 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बीएसई पर कंपनी के 17.33 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

दोनों कंपनियों के शेयरों की मजबूत लिस्टिंग से नए सूचीबद्ध शेयरों में निवेशकों की अच्छी दिलचस्पी का संकेत मिला। हालांकि, आगे शेयरों का प्रदर्शन कंपनियों के कारोबारी प्रदर्शन, मुनाफे में वृद्धि और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।