Last Updated on October 23, 2026 10:26 pm by INDIAN AWAAZ

स्मॉलकैप इंडेक्स 2.68% लुढ़का, स्विगी में 16.75% की भारी गिरावट; टोंबो इमेजिंग की शानदार लिस्टिंग

हमारे बिजनेस संवाददाता

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक रहा और इसका सबसे ज्यादा असर मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों पर पड़ा। निफ्टी किसी तरह 22,600 के स्तर के आसपास बना रहा, लेकिन सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए।

उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, धातु, रियल्टी, ऊर्जा और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। व्यापक बाजार में गिरावट से संकेत मिला कि निवेशक वैश्विक अनिश्चितताओं और कंपनियों के नतीजों को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।

बीएसई सेंसेक्स 125.56 अंक यानी 0.17% गिरकर 72,123.83 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 50 में 87.65 अंक यानी 0.39% की गिरावट आई और यह 22,600 पर बंद हुआ।

लगातार चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 3.49% और निफ्टी 2.36% टूट चुका है। शुक्रवार को निफ्टी में सेंसेक्स के मुकाबले अधिक गिरावट दर्ज की गई, जबकि व्यापक बाजार के सूचकांकों में नुकसान कहीं ज्यादा रहा।

बीएसई मिडकैप 150 इंडेक्स 2.10% गिरा, जबकि बीएसई स्मॉलकैप 250 इंडेक्स में 2.68% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि निवेशकों ने बड़ी कंपनियों की तुलना में मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में ज्यादा बिकवाली की।

एनएसई पर बाजार का रुख बेहद कमजोर रहा। कुल 3,011 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 623 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। 90 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से लगभग पांच गुना रही, जो बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत है।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों में श्रीराम फाइनेंस 3.98% गिरकर सबसे बड़े नुकसान उठाने वालों में रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.46% और एचडीएफसी बैंक में 0.18% की गिरावट आई।

कच्चे तेल की महंगाई से बढ़ी चिंता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ा दी। दिसंबर 2026 में डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड वायदा का भाव 1.23 डॉलर यानी 1.09% बढ़कर 114.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव पड़ सकता है और महंगाई को काबू में रखने की चुनौती बढ़ सकती है।

महंगे कच्चे तेल का असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और ऊर्जा की अधिक खपत करने वाले उद्योगों की लागत पर भी पड़ता है। कंपनियों के लिए अतिरिक्त लागत को ग्राहकों पर डालना संभव नहीं होने की स्थिति में उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।

तेल की कीमतों में वृद्धि से विमानन, पेंट, रसायन और अन्य ऊर्जा-निर्भर क्षेत्रों की कंपनियां भी प्रभावित हो सकती हैं। दूसरी ओर, यदि ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ती है, तो घरेलू उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं की आशंका ने अनिश्चितता को और बढ़ाया। ऐसे माहौल में निवेशक कंपनियों की आय, महंगाई और ब्याज दरों की संभावित दिशा का नए सिरे से आकलन करते हैं।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव का एक प्रमुख कारण रही। विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी से बड़े शेयरों में कमजोरी आ सकती है और रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, बाजार की वास्तविक दिशा घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और अन्य निवेशकों की गतिविधियों पर भी निर्भर करती है।

शुक्रवार के लिए विदेशी निवेशकों के शुद्ध निवेश के विशिष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

रुपया कमजोर, सरकारी बॉन्ड की यील्ड में मामूली गिरावट

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया पिछले कारोबारी सत्र के 94.8100 के बंद स्तर की तुलना में गिरकर 94.9450 प्रति डॉलर पर आ गया।

रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मिलकर आयातित महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से तेल सहित डॉलर में भुगतान किए जाने वाले आयात महंगे हो जाते हैं। हालांकि, विदेशी मुद्रा में कमाई करने वाली कुछ निर्यातक कंपनियों को रुपये में बेहतर आय का लाभ मिल सकता है। इसका वास्तविक असर उनकी लागत, मुद्रा जोखिम से बचाव की व्यवस्था और कारोबार की प्रकृति पर निर्भर करेगा।

भारत की 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी प्रतिभूति की यील्ड पिछले सत्र के 7.462% से मामूली घटकर 7.456% रह गई। यह सीमित बदलाव अपने आप में महंगाई या मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की सोच में किसी बड़े परिवर्तन का संकेत नहीं देता।

अमेरिका में 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 0.63% बढ़कर 4.980% दर्ज की गई। अमेरिकी बॉन्ड पर अधिक प्रतिफल मिलने से डॉलर में निवेश आकर्षक हो सकता है और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.16% बढ़कर 101.77 पर पहुंच गया।

वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 4 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला सोने का वायदा भाव 0.42% गिरकर 1,42,700 रुपये पर आ गया। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद सोने में गिरावट से संकेत मिला कि सर्राफा बाजार में खरीदारी एकतरफा नहीं थी। सोने की कीमतों पर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और मुनाफावसूली का भी असर पड़ सकता है।

वैश्विक बाजारों में भी दबाव

वैश्विक बाजारों में शुक्रवार को मिला-जुला रुख रहा। अमेरिका में प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई, जबकि यूरोपीय बाजार पश्चिम एशिया के तनाव, महंगे कच्चे तेल और महंगाई की आशंकाओं के कारण दबाव में रहे। अमेरिकी शेयर बाजार खुलने से पहले डाउ वायदा 299 अंक नीचे था, जो कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा था।

यूरोपीय निवेशक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और ब्याज दरों के परिदृश्य का आकलन कर रहे थे। ब्रेंट क्रूड के करीब 114 डॉलर प्रति बैरल बने रहने से ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान और कारोबार तथा उपभोक्ताओं की लागत बढ़ने की चिंता बनी रही।

ब्रिटेन में सितंबर के दौरान खुदरा बिक्री की मात्रा 0.4% गिर गई, जबकि अर्थशास्त्रियों ने 0.1% की गिरावट का अनुमान लगाया था। गर्म मौसम के कारण ऑनलाइन कपड़ों की बिक्री प्रभावित हुई और सुपरमार्केट की बिक्री की मात्रा भी घटी। हालांकि, तीन महीने की अवधि में खुदरा बिक्री की मात्रा 0.7% बढ़ी, जबकि ईंधन की बिक्री में 2.2% की वृद्धि दर्ज की गई।

एशियाई बाजारों ने शुरुआती गिरावट से उबरकर बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। हालांकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर कंपनियों के भारी खर्च को लेकर चिंता के कारण प्रौद्योगिकी शेयरों में बिकवाली हुई और कुछ निवेशकों ने अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख किया।

जापान के सितंबर के महंगाई आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रही। ताजा खाद्य पदार्थों को छोड़कर उपभोक्ता कीमतों में सालाना आधार पर 2.1% की वृद्धि हुई, जबकि अगस्त में यह वृद्धि 1.7% थी। ईंधन को भी बाहर रखने वाले एक अन्य अंतर्निहित महंगाई माप में वृद्धि 1.9% से बढ़कर 2.4% हो गई।

महंगाई में तेजी से बैंक ऑफ जापान की ओर से मौद्रिक नीति को और सख्त करने की संभावना पर चर्चा तेज हुई। हालांकि, ब्याज दरों में बदलाव का समय और उसकी गति आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

एशियाई बाजारों की मजबूती के विपरीत भारतीय बाजार में गिरावट से स्पष्ट हुआ कि कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता, रुपये की चाल और विदेशी निवेश का प्रवाह घरेलू शेयरों के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं।

अमेरिकी बाजार में टेक्नोलॉजी शेयरों की भारी बिकवाली

गुरुवार, 22 अक्टूबर को अमेरिकी शेयर बाजार में मिला-जुला रुख रहा। प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के कारण एसएंडपी 500 और नैस्डैक पर दबाव पड़ा।

डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 11.89 अंक यानी 0.02% बढ़कर 52,867.98 पर बंद हुआ। इसके विपरीत, एसएंडपी 500 में 93.74 अंक यानी 1.21% की गिरावट आई और यह 7,663.43 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 694 अंक यानी 2.6% गिरकर 26,008.86 पर आ गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत के बाद नैस्डैक की यह सबसे बड़ी एकदिनी प्रतिशत गिरावट थी।

सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई। फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 6.7% गिर गया, जो 23 जून के बाद इसकी सबसे बड़ी एकदिनी प्रतिशत गिरावट थी।

हालांकि, प्रौद्योगिकी शेयरों में कमजोरी के बावजूद अमेरिकी बाजार के अधिकांश शेयरों में तेजी रही। इससे संकेत मिला कि बिकवाली मुख्य रूप से अधिक वृद्धि की उम्मीद वाले शेयरों में केंद्रित थी, न कि पूरे बाजार में समान रूप से फैली हुई थी।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारी निवेश और उससे मिलने वाले संभावित प्रतिफल को लेकर चिंता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। इसी दौरान अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में निवेश बढ़ने से बाजार में सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग भी दिखाई दी।

मेटा प्लेटफॉर्म्स के शेयर करीब 7% गिर गए, जबकि कंपनी ने तीसरी तिमाही में विश्लेषकों की उम्मीद से अधिक राजस्व दर्ज किया था। निवेशकों का ध्यान एआई पर बढ़ते खर्च और निवेश के वित्तपोषण के लिए गैर-मतदान अधिकार वाले शेयर जारी करने की योजना पर रहा। इससे एआई से जुड़े बड़े बुनियादी ढांचे पर खर्च और भविष्य में उससे मिलने वाले मुनाफे को लेकर चिंताएं फिर उभर आईं।

टेस्ला के शेयर भी 3.1% गिर गए। कंपनी ने सकारात्मक मुक्त नकदी प्रवाह दर्ज किया था और वर्ष 2026 के लिए पूंजीगत व्यय का अनुमान 25 अरब डॉलर से घटाकर 20 अरब डॉलर कर दिया था। इसके बावजूद निवेशकों की चिंता कम नहीं हुई। कंपनी की भविष्य की वृद्धि और नए निवेश से मिलने वाले प्रतिफल पर सवाल बने रहे।

दूसरी ओर, स्पॉटिफाई के शेयर 11% चढ़े। कंपनी ने राजस्व में वृद्धि और प्रीमियम ग्राहकों की संख्या बढ़ने की जानकारी दी थी। कॉमकास्ट के शेयर 3.4% बढ़े, क्योंकि राजस्व में गिरावट के बावजूद कंपनी की समायोजित प्रति शेयर आय उम्मीद से बेहतर रही।

अमेरिका के श्रम बाजार से मिले आंकड़ों में भी मजबूती के संकेत दिखाई दिए। 17 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में बेरोजगारी भत्ते के शुरुआती दावे 6,000 घटकर 1,94,000 रह गए। यह बाजार के 2,00,000 के अनुमान से कम था। पिछले सप्ताह के आंकड़े को संशोधित कर 1,99,000 से बढ़ाकर 2,00,000 किया गया।

हालांकि, 10 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में बेरोजगारी भत्ते के लगातार दावे 25,000 बढ़कर 17.28 लाख हो गए। शुरुआती दावों में गिरावट से श्रम बाजार की मजबूती का संकेत मिला, लेकिन लगातार दावों में वृद्धि ने तस्वीर के दूसरे पहलू को भी सामने रखा।

नए सूचीबद्ध शेयरों में मिला-जुला प्रदर्शन

शुक्रवार को नए सूचीबद्ध शेयरों में अलग-अलग रुझान देखने को मिले। टोंबो इमेजिंग इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस का शेयर अपने निर्गम मूल्य से नीचे बंद हुआ।

टोंबो इमेजिंग इंडिया का शेयर 1,133.65 रुपये पर बंद हुआ, जो 700 रुपये के आईपीओ मूल्य से 61.95% अधिक था। बीएसई पर शेयर की शुरुआत 1,182 रुपये पर हुई थी, जो निर्गम मूल्य से 68.86% अधिक थी। कारोबार के दौरान शेयर 1,209.85 रुपये के उच्चतम और 1,013.95 रुपये के न्यूनतम स्तर तक पहुंचा। बीएसई पर 22.78 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज का शेयर 378.20 रुपये पर बंद हुआ, जो 344 रुपये के निर्गम मूल्य से 9.94% अधिक था। शेयर की शुरुआत 368.05 रुपये पर हुई, जो निर्गम मूल्य से 6.99% ऊपर थी। कारोबार के दौरान इसने 409.95 रुपये का उच्चतम और 347.50 रुपये का न्यूनतम स्तर छुआ। बीएसई पर 13.02 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

बोनफिग्लियोली ट्रांसमिशंस का शेयर 576.35 रुपये पर बंद हुआ, जो 586 रुपये के निर्गम मूल्य से 1.65% कम था। शेयर कारोबार के दौरान 607 रुपये के उच्चतम और 527.40 रुपये के न्यूनतम स्तर तक पहुंचा। बीएसई पर 37.36 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस का शेयर 138.30 रुपये पर बंद हुआ, जो 151 रुपये के निर्गम मूल्य से 8.41% नीचे था। हालांकि, शेयर की शुरुआत 159 रुपये पर हुई थी, जो निर्गम मूल्य से 5.30% अधिक थी। कारोबार के दौरान यह 160.50 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंचा, लेकिन बाद में गिरकर 127.20 रुपये तक आ गया। बीएसई पर 54.33 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

इन शेयरों का प्रदर्शन बताता है कि आईपीओ की मजबूत शुरुआत के बाद भी शेयर में तेजी कायम रहना सुनिश्चित नहीं होता। बाजार की परिस्थितियां, कंपनी का मूल्यांकन और निवेशकों की मांग सूचीबद्ध होने के बाद शेयर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कंपनियों के नतीजों से शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव

स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज (एसटीएल) का शेयर 2.39% बढ़ा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में राजस्व और शुद्ध लाभ में भारी वृद्धि दर्ज की।

सितंबर तिमाही में कंपनी का परिचालन से समेकित राजस्व सालाना आधार पर 144.6% और पिछली तिमाही के मुकाबले 32.4% बढ़कर 2,529 करोड़ रुपये हो गया।

अल्पांश हिस्सेदारी और संयुक्त उपक्रमों के लाभ में हिस्सेदारी के बाद शुद्ध लाभ बढ़कर 517 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह केवल 4 करोड़ रुपये था। जून तिमाही के 197 करोड़ रुपये के मुकाबले भी शुद्ध लाभ में 161.9% की वृद्धि हुई।

तिमाही के अंत में कंपनी की खुली ऑर्डर बुक 35,274 करोड़ रुपये थी। राजस्व और मुनाफे में तेज वृद्धि तथा मजबूत ऑर्डर बुक से निवेशकों को सकारात्मक संकेत मिला। हालांकि, आगे प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी ऑर्डर को समय पर पूरा कर पाती है या नहीं और लाभप्रदता तथा नकदी प्रवाह में सुधार कितना टिकाऊ रहता है।

रैलिस इंडिया का शेयर 5.21% गिर गया। कंपनी का एकल आधार पर शुद्ध लाभ सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 16.67% घटकर 85 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 102 करोड़ रुपये था।

कंपनी का परिचालन राजस्व भी 0.35% घटकर 858 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 861 करोड़ रुपये था। राजस्व में मामूली गिरावट के साथ लाभ में कमी से कंपनी के नतीजों पर दबाव का संकेत मिला।

स्विगी का शेयर 16.75% टूट गया। कंपनी के दूसरी तिमाही के नतीजों ने खासकर उसके क्विक-कॉमर्स कारोबार इंस्टामार्ट की लाभप्रदता को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

वित्त वर्ष 2026-27 की सितंबर तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध घाटा सालाना आधार पर घटकर 922 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 1,092 करोड़ रुपये था। हालांकि, जून तिमाही के 791 करोड़ रुपये के मुकाबले घाटा बढ़ गया।

कंपनी का परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 36.1% और तिमाही आधार पर 11.1% बढ़कर 7,571 करोड़ रुपये हो गया।

ये आंकड़े ऑनलाइन डिलीवरी और क्विक-कॉमर्स कारोबार के सामने मौजूद चुनौती को रेखांकित करते हैं। तेजी से बढ़ते कारोबार के साथ डिलीवरी, ग्राहक जुटाने और परिचालन की लागत को नियंत्रित करना जरूरी है। राजस्व में मजबूत वृद्धि के बावजूद तिमाही आधार पर घाटा बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी।

जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 18.49 गुना सब्सक्राइब

जियो प्लेटफॉर्म्स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को अंतिम दिन मजबूत मांग मिली। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को शाम 4:54 बजे तक कंपनी के निर्गम में पेश किए गए 19,75,25,934 शेयरों के मुकाबले 3,65,31,22,704 शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। इस तरह आईपीओ 18.49 गुना सब्सक्राइब हुआ।

आईपीओ 21 अक्टूबर को खुला था और 23 अक्टूबर को बंद हुआ। इसके लिए मूल्य दायरा 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। निवेशक न्यूनतम 12 शेयरों के लिए और उसके बाद इसी के गुणकों में बोली लगा सकते थे।

पारस हेल्थकेयर के आईपीओ को भी अंतिम दिन निवेशकों से मांग मिली। शाम 4:54 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1,20,83,331 शेयरों के मुकाबले 2,69,12,403 शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। इस तरह निर्गम 2.23 गुना सब्सक्राइब हुआ।

यह आईपीओ भी 21 अक्टूबर को खुला और 23 अक्टूबर को बंद हुआ। कंपनी ने मूल्य दायरा 660 से 693 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया था। निवेशक न्यूनतम 21 शेयरों के लिए और उसके बाद इसी के गुणकों में आवेदन कर सकते थे।

आईपीओ का सब्सक्रिप्शन स्तर निवेशकों की मांग का संकेत देता है, लेकिन इससे सूचीबद्ध होने के बाद शेयर में तेजी या मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती। अंतिम आवंटन, कंपनी का मूल्यांकन और बाजार की परिस्थितियां निवेशकों के वास्तविक प्रतिफल को प्रभावित कर सकती हैं।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

भारतीय शेयर बाजार की निकट अवधि की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख से प्रभावित हो सकती है। लगातार चार सत्रों की गिरावट और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत अधिक नुकसान से पता चलता है कि निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क है।

यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और ऊर्जा तथा परिवहन लागत में वृद्धि से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। रुपये में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव भी विदेशी पूंजी के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।

कंपनियों के तिमाही नतीजे भी शेयरों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज, रैलिस इंडिया और स्विगी के शेयरों में अलग-अलग प्रतिक्रिया से पता चलता है कि निवेशक केवल राजस्व वृद्धि नहीं, बल्कि मुनाफे, लागत और भविष्य के खर्च को भी महत्व दे रहे हैं।

आईपीओ बाजार में भी निवेशकों का चयनात्मक रुख दिखाई दिया। कुछ नए शेयरों ने निर्गम मूल्य से काफी ऊपर कारोबार किया, जबकि अन्य शुरुआती तेजी बनाए रखने में विफल रहे। व्यापक बाजार में अस्थिरता बढ़ने पर मजबूत प्रदर्शन करने वाले शेयरों में भी उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की स्थिति, कंपनियों के नतीजों और बाजार में गिरावट के बाद स्थिरता के संकेतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। बाजार में टिकाऊ सुधार का आकलन केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर करने के बजाय इन बुनियादी कारकों के संदर्भ में करना उचित होगा।

अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल सूचना और शैक्षणिक उद्देश्य से है। इसे किसी शेयर या अन्य वित्तीय साधन को खरीदने या बेचने की सलाह न माना जाए। बाजार के भाव और आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले स्वतंत्र शोध करें और योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।