Last Updated on October 22, 2026 9:56 pm by INDIAN AWAAZ

हमारे बिजनेस संवाददाता से

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया। आईटी, एफएमसीजी और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे, जबकि फार्मा क्षेत्र को छोड़ अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।

बाजार में कमजोरी का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी व्यापक बिकवाली देखने को मिली, जो निवेशकों के बीच बढ़ती सतर्कता का संकेत है। विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव ने बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार तीसरी गिरावट

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 460.30 अंक या 0.62 प्रतिशत गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 123.70 अंक या 0.54 प्रतिशत टूटकर 22,687.65 पर आ गया। इस गिरावट के साथ निफ्टी 22,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया।

पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 1.98 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत है कि निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

तेल की कीमतें बनीं सबसे बड़ी चिंता

बाजार की कमजोरी के पीछे प्रमुख कारणों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें शामिल हैं। हालांकि दिन के दौरान ब्रेंट क्रूड में कुछ नरमी दिखी, फिर भी इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि ऊर्जा बाजार में जारी उथल-पुथल निवेशकों की चिंता का विषय बनी हुई है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल कीमतों में लंबी अवधि तक तेजी बनी रहती है तो इसका असर कॉरपोरेट मुनाफे, उपभोक्ता मांग और अर्थव्यवस्था की समग्र वृद्धि दर पर भी पड़ सकता है।

रिलायंस, एचडीएफसी बैंक और इटरनल ने बढ़ाया दबाव

निफ्टी में गिरावट लाने वाले प्रमुख शेयरों में इटरनल, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे।

इटरनल में लगभग 2.5 प्रतिशत, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 2 प्रतिशत से अधिक और एचडीएफसी बैंक में करीब 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन दिग्गज शेयरों का सूचकांकों में बड़ा भारांश होने के कारण बाजार पर इनका प्रभाव अधिक दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाले क्षेत्रों से धन निकालकर अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।

व्यापक बाजार में भी बिकवाली

बाजार की कमजोरी का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिला।

बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.79 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.92 प्रतिशत गिर गया। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों की बिकवाली बड़े शेयरों के साथ-साथ मझोली और छोटी कंपनियों तक फैली हुई थी।

एनएसई पर बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही। कुल 2,512 शेयरों में गिरावट दर्ज हुई, जबकि केवल 1,024 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। 106 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बाजार में कमजोरी व्यापक और समग्र थी।

सेक्टोरल प्रदर्शन: फार्मा ने दिखाई मजबूती

गुरुवार को लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे।

आईटी शेयरों में गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिकी टेक कंपनियों के मिश्रित नतीजे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निवेशों पर बढ़ती चिंताएं रहीं। निवेशकों को आशंका है कि एआई पर भारी खर्च का लाभ अपेक्षित गति से नहीं मिल पा रहा है।

एफएमसीजी कंपनियों में भी बिकवाली हुई क्योंकि ऊंची महंगाई और लागत दबाव से उपभोक्ता मांग प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

इसके विपरीत, फार्मा क्षेत्र में निवेशकों ने रुचि दिखाई। अनिश्चित परिस्थितियों में फार्मा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है, जिससे इस क्षेत्र को समर्थन मिला।

रुपया कमजोर, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया पिछले आठ कारोबारी सत्रों की मजबूती का सिलसिला कायम नहीं रख सका।

रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर लगभग 94.91 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 94.38 था।

दूसरी ओर, भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.465 प्रतिशत हो गई। यील्ड में बढ़ोतरी को आम तौर पर मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं तथा भविष्य में ब्याज दरों के उच्च स्तर पर बने रहने की आशंका के रूप में देखा जाता है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना वायदा भी 0.87 प्रतिशत गिरकर 1,44,810 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत

अंतरराष्ट्रीय बाजारों का माहौल भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक नहीं रहा।

यूरोपीय शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई क्योंकि निवेशकों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा कीमतों और कॉरपोरेट नतीजों का आकलन किया। एशियाई बाजार भी दबाव में रहे, जहां तकनीकी शेयरों ने गिरावट का नेतृत्व किया।

निवेशकों की चिंता तब और बढ़ी जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका और पाकिस्तान क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को लेकर चेतावनी दी। आईएमएफ ने अनुमान जताया कि संघर्ष के चलते वर्ष 2026 में क्षेत्रीय आर्थिक उत्पादन में कमी आ सकती है, हालांकि हालात सामान्य होने पर अगले वर्ष मजबूत सुधार की संभावना है।

फिर भी संस्था ने आर्थिक परिदृश्य को लेकर “असाधारण अनिश्चितता” की बात कही, जिससे वैश्विक निवेशकों का मनोबल प्रभावित हुआ।

वॉल स्ट्रीट पर मिला-जुला संकेत

अमेरिकी शेयर बाजारों ने पिछला सत्र बढ़त के साथ समाप्त किया था। मजबूत कॉरपोरेट नतीजों और टेक शेयरों में तेजी के कारण डॉव जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख सूचकांक ऊपर बंद हुए।

हालांकि गुरुवार को अमेरिकी वायदा कारोबार में कमजोरी देखने को मिली, जिससे संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।

टेक कंपनियों के नतीजों पर नजर

मेटा ने दिखाया मजबूत प्रदर्शन

सोशल मीडिया दिग्गज मेटा प्लेटफॉर्म्स ने सितंबर 2026 तिमाही के लिए मजबूत राजस्व वृद्धि दर्ज की। विज्ञापन कारोबार में मजबूती और उपयोगकर्ताओं की बढ़ती सक्रियता से कंपनी के कारोबार को समर्थन मिला।

हालांकि कंपनी ने एक बड़े कानूनी समझौते से जुड़े खर्च का भी उल्लेख किया। इसके बावजूद निवेशकों का ध्यान मुख्य रूप से कंपनी के एआई निवेशों और भविष्य की विकास योजनाओं पर केंद्रित रहा।

टेस्ला पर निवेशकों की निगाह

इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता टेस्ला के नतीजे अपेक्षाकृत मिश्रित रहे। कंपनी का राजस्व लगभग स्थिर रहा, जबकि शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

हालांकि समायोजित आय अनुमान से बेहतर रही, लेकिन पूंजीगत व्यय के लिए संशोधित मार्गदर्शन ने निवेशकों के बीच सवाल खड़े किए। बाजार अब यह देख रहा है कि कंपनी भविष्य में एआई, रोबोटिक्स और स्वायत्त वाहन तकनीकों में कितना निवेश करती है।

आईपीओ बाजार में बनी हुई है गतिविधि

जियो प्लेटफॉर्म्स को मजबूत समर्थन

कमजोर द्वितीयक बाजार के बावजूद जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिला। गुरुवार शाम तक यह निर्गम पांच गुना से अधिक सब्सक्राइब हो चुका था।

विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की मजबूत डिजिटल उपस्थिति और दीर्घकालिक विकास संभावनाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।

पारस हेल्थकेयर को धीमी प्रतिक्रिया

दूसरी ओर पारस हेल्थकेयर के आईपीओ को अपेक्षाकृत कमजोर प्रतिक्रिया मिली। अभी तक यह निर्गम पूर्ण रूप से सब्सक्राइब नहीं हो सका था।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा माहौल में निवेशक मूल्यांकन और गुणवत्ता को लेकर अधिक सजग हो गए हैं।

फ्यूजन सीएक्स की सपाट लिस्टिंग

फ्यूजन सीएक्स का शेयर बाजार में पदार्पण अपेक्षाकृत फीका रहा। शेयर अपने निर्गम मूल्य के मुकाबले मामूली प्रीमियम पर बंद हुआ।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार यह संकेत देता है कि मौजूदा समय में निवेशक नए निर्गमों को लेकर चयनात्मक रुख अपनाए हुए हैं।

खबरों में रहे चुनिंदा शेयर

ई-मुद्रा का शेयर लगातार दूसरे दिन भी 20 प्रतिशत तक लुढ़क गया। कंपनी द्वारा सुरक्षा-संबंधी मुद्दे की जानकारी दिए जाने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ी।

इंडियन होटल्स कंपनी (आईएचसीएल) के शेयर में लगभग 4 प्रतिशत की तेजी आई। कंपनी ने मजबूत तिमाही परिणाम दर्ज किए, जिससे होटल और पर्यटन क्षेत्र को लेकर सकारात्मक संदेश गया।

बालकृष्ण इंडस्ट्रीज में 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज हुई। कंपनी ने इटली की टायर निर्माता कंपनी पिरेली के साथ रणनीतिक समझौते की घोषणा की है।

360 वन वाम के शेयरों में भी बढ़त रही, क्योंकि यूबीएस एजी द्वारा हिस्सेदारी हासिल किए जाने को निवेशकों ने सकारात्मक रूप में लिया।

टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्ट्र (टीटीएमएल) दिन के सबसे बड़े गेनर्स में रही। कंपनी के घाटे में भारी कमी और राजस्व वृद्धि की खबर के बाद शेयर में 20 प्रतिशत की ऊंची छलांग दर्ज की गई।

फुजियामा पावर सिस्टम्स ने स्पष्ट किया कि चीन द्वारा प्रस्तावित निर्यात प्रतिबंधों से उसकी सौर विनिर्माण विस्तार योजनाओं पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके बाद शेयर में तेजी देखने को मिली।

आगे की राह

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा मुख्य रूप से तीन कारकों से तय होगी, पहला कच्चे तेल की कीमतें, दूसरा पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और तीसरा कॉरपोरेट आय के नतीजे।

यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या तेल कीमतों में और उछाल आता है तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक, कॉरपोरेट आय में वृद्धि और आईपीओ बाजार की सक्रियता बाजार को कुछ हद तक सहारा प्रदान कर सकती है।

फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्कता, गुणवत्ता आधारित चयन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना सबसे महत्वपूर्ण रणनीति माना जा रहा है।


अस्वीकरण

यह रिपोर्ट स्टॉक एक्सचेंजों, कंपनी फाइलिंग्स, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बाजार आंकड़ों तथा विभिन्न समाचार स्रोतों पर आधारित है। बाजार की स्थितियां, शेयर कीमतें, आईपीओ सदस्यता आंकड़े और कॉरपोरेट घटनाक्रम समय के साथ बदल सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाओं एवं सार्वजनिक व्यक्तियों से संबंधित दावों को प्रकाशन से पूर्व आधिकारिक स्रोतों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना चाहिए। यह लेख केवल समाचार और जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है तथा इसे किसी भी प्रकार की निवेश सलाह या प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री की सिफारिश नहीं माना जाना चाहिए।