Last Updated on October 7, 2026 8:56 pm by INDIAN AWAAZ

SUDHIR KUMAR / NEW DELHI
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि विपक्ष के खिलाफ 100 एफआईआर भी दर्ज कर दी जाएं, तब भी इंडिया गठबंधन विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर अपनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पद छोड़ने की मांग दोहराते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस पूरे विवाद पर जवाबदेह होना चाहिए।
राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “100 एफआईआर दर्ज कर दीजिए, हम पीछे नहीं हटेंगे।” उनके इस बयान को विपक्ष की ओर से सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ संघर्ष को और तेज करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को उजागर करना है और इस मुद्दे को देशभर में उठाया जाएगा।
राजधानी दिल्ली में बुधवार को राजनीतिक माहौल उस समय और गर्म हो गया जब इंडिया गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने जंतर-मंतर के निकट विंडसर प्लेस पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी।
यह प्रदर्शन एक दिन पहले चुनाव आयोग की ओर विपक्षी दलों के मार्च के बाद आयोजित किया गया। विपक्ष का आरोप है कि आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठाए गए सवालों और चिंताओं का संतोषजनक जवाब नहीं दिया है।
इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इंडिया गठबंधन के नेताओं के लिए सागर रत्ना में एक लंच बैठक आयोजित की। सूत्रों के अनुसार बैठक में चुनाव आयोग के खिलाफ चलाए जा रहे विपक्ष के “वोट चोरी” अभियान को आगे बढ़ाने और आगामी रणनीति पर चर्चा की गई।
इंडिया गठबंधन ने साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग के खिलाफ शुरू किया गया यह आंदोलन एक दिन का विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक लंबी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाते रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे विपक्ष इस मुद्दे को राष्ट्रीय अभियान का रूप देने की कोशिश करेगा, वैसे-वैसे इंडिया गठबंधन और चुनाव आयोग के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।
