Last Updated on September 17, 2026 9:31 pm by INDIAN AWAAZ

बिजनेस संवाददाता

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले, वैश्विक तरलता पर उसके संभावित असर और व्यापार मोर्चे पर बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार मिला-जुला रहा। चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के चलते निफ्टी 50 ने 23,250 का स्तर बनाए रखा, जबकि बैंकिंग तथा तेल एवं गैस शेयरों में कमजोरी ने बाजार की बढ़त को सीमित रखा।

बीएसई सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74,314.59 अंक पर बंद हुआ। इसके विपरीत एनएसई निफ्टी 50 53 अंक यानी 0.23 प्रतिशत बढ़कर 23,270.60 अंक पर पहुंच गया।

बाजार में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा फैसले पर रही। फेड ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 आधार अंक की वृद्धि करते हुए इसे 3.75-4 प्रतिशत के दायरे में कर दिया। जुलाई 2023 के बाद यह पहली दर वृद्धि है। फेड के नए अनुमानों ने 2026 में एक और दर वृद्धि की संभावना को भी खुला रखा है।

इससे वैश्विक निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों से डॉलर को समर्थन मिल सकता है और इससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, वैश्विक निवेशक अमेरिकी परिसंपत्तियों और उभरते बाजारों के बीच पूंजी आवंटन को लेकर अधिक सावधानी बरत सकते हैं।

फेड का सख्त रुख बाजार के लिए अहम

फेड के अधिकारियों के बीच भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर मतभेद भी दिखाई दिए। 19 अधिकारियों में से 16 ने 2026 में कम से कम एक और दर वृद्धि के पक्ष में संकेत दिया। वर्ष के अंत में नीतिगत दर का औसत अनुमान 4.1 प्रतिशत रखा गया है। 2027 के लिए भी मध्य अनुमान 4.1 प्रतिशत है।

महंगाई को लेकर फेड का रुख भी महत्वपूर्ण है। 2026 के लिए हेडलाइन पीसीई महंगाई का अनुमान 3.7 प्रतिशत और कोर पीसीई महंगाई का अनुमान 3.4 प्रतिशत रखा गया है। ये दोनों आंकड़े फेड के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर हैं।

हालांकि, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्रीय बैंक का अनुमान अपेक्षाकृत मजबूत रहा। फेड ने 2026 के लिए अमेरिकी जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया है। बेरोजगारी दर का मध्य अनुमान 4.1 प्रतिशत रखा गया है।

भारतीय शेयर बाजार के लिए ऊंची अमेरिकी दरें इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनका असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, डॉलर-रुपया विनिमय दर और कंपनियों की पूंजी लागत पर पड़ सकता है। खासकर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर निर्भर क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है।

रियल्टी और फार्मा में खरीदारी

वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद घरेलू निवेशकों ने कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी की। रियल्टी और फार्मा शेयरों में मांग देखी गई, जिससे निफ्टी को बढ़त बनाए रखने में मदद मिली।

निफ्टी के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स 2.51 प्रतिशत, टाटा स्टील 2.34 प्रतिशत और Eternal 1.69 प्रतिशत ऊपर रहे।

व्यापक बाजार में भी कारोबार अपेक्षाकृत स्थिर रहा। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.07 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 0.13 प्रतिशत नीचे रहा।

बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही। बीएसई पर 2,686 शेयर बढ़कर बंद हुए, जबकि 1,642 शेयरों में गिरावट रही। कुल 217 शेयर अपरिवर्तित रहे।

इस बीच, इंडिया VIX में 7.82 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 12.14 पर आ गया। इंडिया VIX निकट अवधि में बाजार की अपेक्षित अस्थिरता का संकेतक है। VIX में गिरावट से संकेत मिला कि तत्काल स्तर पर निवेशकों की घबराहट कम हुई।

कच्चे तेल में गिरावट से राहत

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भारतीय बाजार को कुछ राहत दी। नवंबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 2.34 डॉलर यानी 2.21 प्रतिशत गिरकर 103.49 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

तेल की कीमतों में गिरावट का एक कारण सऊदी अरब की कच्चे तेल की आपूर्ति बहाल करने की कोशिशों से जुड़ी खबरें रहीं। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को हुए नुकसान के बाद आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी। ओमान के रास्ते अतिरिक्त कच्चे तेल की खेप भेजे जाने की खबरों ने तत्काल आपूर्ति संकट की आशंकाओं को कुछ कम किया।

सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फारस की खाड़ी से दूर कच्चे तेल के परिवहन का एक वैकल्पिक मार्ग है। रिपोर्टों के अनुसार, इराक से किए गए ड्रोन हमले में पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद इसे बंद किया गया। इससे पहले से संवेदनशील वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी थी।

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें बेहद महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर आयात बिल, व्यापार घाटे, महंगाई, रुपये की विनिमय दर और कंपनियों की लागत पर पड़ता है। इसलिए तेल में किसी भी टिकाऊ नरमी से भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी तेल बाजार के लिए प्रमुख अनिश्चितता बने हुए हैं।

रुपया और बॉन्ड बाजार

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया मामूली कमजोर रहा। रुपया 95.9300 के स्तर पर था, जबकि पिछले सत्र में यह 95.9100 पर बंद हुआ था।

डॉलर इंडेक्स 0.15 प्रतिशत गिरकर 100.16 पर आ गया। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 0.38 प्रतिशत घटकर 4.985 प्रतिशत रही।

इसके विपरीत भारत की 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी प्रतिभूति की यील्ड 7.055 प्रतिशत से बढ़कर 7.064 प्रतिशत हो गई।

एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 के निपटान वाले सोने के वायदा भाव में 0.49 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1,51,724 रुपये पर रहा।

रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों से व्यापार जोखिम

अमेरिका में रूस से संबंधित एक नए विधायी घटनाक्रम ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को रूस पर प्रतिबंधों से संबंधित एक विधेयक 262-159 मतों से पारित किया। विधेयक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है।

इसका संभावित प्रभाव रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। विधेयक में रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और रूस के तेल कारोबार से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंधों का विस्तार करने तथा ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को पांच साल बढ़ाने का भी प्रावधान है।

हालांकि, विधेयक पारित होना अपने आप में भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के बराबर नहीं है। फिर भी, यदि आगे चलकर ऐसे कदम लागू होते हैं तो भारतीय ऊर्जा आयात, व्यापार लागत और महंगाई पर इसका असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत और बाजार की धारणा दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

वॉल स्ट्रीट की गिरावट के बाद वैश्विक बाजारों में सुधार

अमेरिकी फेड के फैसले के बाद बुधवार को वॉल स्ट्रीट में भारी बिकवाली देखी गई थी। डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 631.21 अंक यानी 1.21 प्रतिशत गिरकर 51,461.90 अंक पर बंद हुआ। S&P 500 में 0.45 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि Nasdaq Composite लगभग सपाट रहा।

गुरुवार को डॉव जोंस फ्यूचर्स करीब 382 अंक ऊपर थे, जो अमेरिकी बाजार में सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहे थे। यूरोपीय बाजारों में भी तेजी रही, जबकि एशियाई बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

वैश्विक बाजारों की चाल मुख्य रूप से फेड की मौद्रिक नीति, तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों से प्रभावित रही।

NSE का IPO निवेशकों के केंद्र में

देश के सबसे बड़े शेयर बाजारों में से एक एनएसई के बहुप्रतीक्षित आईपीओ ने भी गुरुवार को बाजार का ध्यान खींचा। 22,561.5 करोड़ रुपये का यह आईपीओ 17 सितंबर को खुला और 21 सितंबर को बंद होगा। इसके लिए मूल्य दायरा 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। यह पूरी तरह मौजूदा शेयरधारकों की ओर से बिक्री पेशकश यानी ऑफर फॉर सेल है।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर को 16:55 बजे तक एनएसई आईपीओ को 3,67,69,784 शेयरों के लिए बोलियां मिली थीं, जबकि पेशकश 8,86,42,911 शेयरों की थी। इस तरह पहले दिन इश्यू 0.41 गुना सब्सक्राइब हुआ। निवेशक न्यूनतम आठ शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं और उसके बाद आठ के गुणक में बोली लगानी होगी।

नए शेयरों की मजबूत लिस्टिंग

नए सूचीबद्ध शेयरों में भी गुरुवार को काफी हलचल रही।

Rentomojo के शेयर 532.95 रुपये पर बंद हुए, जो 404 रुपये के इश्यू मूल्य से 31.92 प्रतिशत अधिक है। शेयर 480 रुपये पर सूचीबद्ध हुए थे और कारोबार के दौरान 547 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचे।

Steamhouse India के शेयर 102.20 रुपये पर बंद हुए, जो 81 रुपये के इश्यू मूल्य से 26.17 प्रतिशत अधिक है। शेयर 93 रुपये पर सूचीबद्ध हुए थे।

LCC Projects 172.75 रुपये पर बंद हुआ, जो 146 रुपये के इश्यू मूल्य से 18.32 प्रतिशत अधिक है। इसका शेयर 191.90 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ था।

Karamtara Engineering 351.95 रुपये पर बंद हुआ, जो 254 रुपये के इश्यू मूल्य से 38.56 प्रतिशत अधिक है। शेयर 320 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ था।

दूसरी ओर, Asset Reconstruction Company (India) 137.05 रुपये पर बंद हुआ, जो 139 रुपये के इश्यू मूल्य से 1.40 प्रतिशत नीचे है।

Manipal Payment and Identity Solutions 345.75 रुपये पर बंद हुआ, जो 339 रुपये के इश्यू मूल्य से 1.99 प्रतिशत अधिक है।

इन शेयरों में भी रही हलचल

RIR Power Electronics के शेयर 10.70 प्रतिशत उछले। कंपनी ने ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित अपने सेमीकंडक्टर संयंत्र में सिलिकॉन कार्बाइड एपिटैक्सियल वेफर विनिर्माण रिएक्टरों की स्थापना पूरी होने की जानकारी दी।

Emami 2.33 प्रतिशत बढ़कर 377.90 रुपये पर पहुंचा। कंपनी के बोर्ड ने खुले बाजार के जरिए अधिकतम 475 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर 282 करोड़ रुपये तक के शेयर बायबैक को मंजूरी दी है। प्रस्ताव के तहत 59,36,842 शेयरों तक की पुनर्खरीद की जाएगी, जो 31 मार्च 2026 तक कंपनी की चुकता इक्विटी पूंजी का 1.36 प्रतिशत है।

Tata Motors में 2.88 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी ने अपने वाणिज्यिक वाहनों की पूरी रेंज की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की वृद्धि की घोषणा की है, जो 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी।

Precision Wires India 2.57 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी ने गुजरात के जारोली स्थित अपने कॉपर रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग संयंत्र में कॉपर कैथोड का ट्रायल उत्पादन शुरू करने की जानकारी दी।

Neogen Chemicals 3.37 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने योग्य संस्थागत निवेश प्लेसमेंट यानी QIP के जरिए करीब 599.99 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

सेमीकंडक्टर शेयरों में तेजी

नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 की शुरुआत के साथ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़े शेयरों में मांग देखने को मिली।

Syrma SGS Technology 6.94 प्रतिशत उछला। MosChip Technologies में 4.69 प्रतिशत, Kaynes Technology India में 3.99 प्रतिशत, Dixon Technologies में 0.83 प्रतिशत और Avalon Technologies में 0.81 प्रतिशत की तेजी रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को SEMICON India 2026 का उद्घाटन किया। 17 से 19 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस आयोजन की थीम “Silicon to Systems: Building the Ecosystem” है। पीएमओ के अनुसार इसमें 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां और प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

IPO बाजार में मजबूत गतिविधि

प्राइमरी मार्केट में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही। Jindal Supreme (India) का इश्यू 31.42 गुना सब्सक्राइब हुआ। कंपनी को 29,52,88,651 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि पेशकश 93,99,600 शेयरों की थी।

Hero Motors का इश्यू 3.36 गुना और SS Retail का इश्यू 5.76 गुना सब्सक्राइब हुआ। वहीं Sonaselection India को पहले दिन 0.47 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि प्राथमिक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, लेकिन अलग-अलग कंपनियों के आईपीओ को लेकर निवेशकों का रुख काफी चयनात्मक है।

आगे बाजार की दिशा

आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा पर अमेरिकी मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, विदेशी निवेश और रूस से जुड़े संभावित अमेरिकी व्यापार प्रतिबंधों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।

फेड की दर वृद्धि ने वैश्विक तरलता के माहौल को चुनौतीपूर्ण बनाया है, जबकि 2026 में एक और दर वृद्धि की संभावना निवेशकों को तत्काल नरमी की उम्मीद से सावधान रख सकती है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट भारत के लिए कुछ राहत दे सकती है।

घरेलू स्तर पर कंपनियों के नतीजे, क्षेत्रवार गतिविधियां, आईपीओ बाजार और सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में निवेश जैसे कारक शेयर-विशेष गतिविधियों को प्रभावित करते रहेंगे।

गुरुवार का कारोबार इस व्यापक तस्वीर को दर्शाता है—बेंचमार्क सूचकांकों में बड़ी हलचल नहीं हुई, बाजार की अस्थिरता घटी और चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी रही, लेकिन वैश्विक ब्याज दरों और व्यापार संबंधी जोखिमों ने निवेशकों को व्यापक स्तर पर सतर्क बनाए रखा।

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