Last Updated on September 16, 2026 10:00 pm by INDIAN AWAAZ

हमारे बिजनेस संवाददाता

घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को दो कारोबारी सत्रों की तेज गिरावट के बाद सुधार देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में मामूली कमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति फैसले से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख बनाए रखा, जिसके कारण बाजार की बढ़त सीमित रही

बीएसई का सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,336.45 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 सूचकांक 99 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,217.60 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में करीब 1.20 प्रतिशत और निफ्टी में 1.53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

बुधवार को निफ्टी 23,201.60 अंक पर खुला और शुरुआती कारोबार में दबाव के कारण 23,116.10 अंक के निचले स्तर तक चला गया। हालांकि, पिछले सत्र की तेज बिकवाली के बाद निचले स्तरों पर चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार संभल गया। दिन के कारोबार में निफ्टी 23,284.75 अंक के ऊपरी स्तर तक गया और अंत में 23,200 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

बाजार में सुधार मुख्य रूप से बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी के कारण हुआ। इसके विपरीत आईटी और फार्मा शेयरों में कमजोरी ने सूचकांकों की बढ़त को सीमित रखा।

बैंकिंग शेयरों ने दिया सहारा

बुधवार के कारोबार में बैंकिंग शेयर प्रमुख सहारा बने। निफ्टी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर में 2.42 प्रतिशत की तेजी रही। एचडीएफसी बैंक 0.69 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक 0.62 प्रतिशत चढ़े।

बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ऐसे समय में हुई जब बाजार में व्यापक धारणा अभी सतर्क बनी हुई है। ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड, पूंजी प्रवाह और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संकेतों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

हालांकि, व्यापक बाजार में तस्वीर उतनी मजबूत नहीं रही। बीएसई 150 मिडकैप सूचकांक महज 0.07 प्रतिशत चढ़ा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप सूचकांक 0.13 प्रतिशत गिर गया।

बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही। बीएसई पर 1,979 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,351 शेयरों में गिरावट रही। कुल 257 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे संकेत मिलता है कि बुधवार की तेजी व्यापक आधार वाली नहीं थी और मुख्य सूचकांकों को चुनिंदा बड़े शेयरों से समर्थन मिला।

कच्चे तेल में नरमी से राहत

भारतीय बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें इस समय प्रमुख जोखिमों में बनी हुई हैं। बुधवार को नवंबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 1.24 डॉलर यानी 1.14 प्रतिशत गिरकर 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय बाजार की चिंता बढ़ाई थी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर काफी निर्भर है। इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें देश के आयात बिल, चालू खाते, महंगाई और रुपये की विनिमय दर पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

तेल की कीमतों में बुधवार की नरमी ने बाजार को कुछ राहत दी, लेकिन ब्रेंट का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहना अभी भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जोखिम है।

ऊंची तेल कीमतों का असर कंपनियों के लागत ढांचे पर भी पड़ सकता है। परिवहन, विमानन, रसायन, पेंट, टायर और अन्य तेल-आधारित उद्योगों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में कमी

वैश्विक बॉन्ड बाजार में भी बुधवार को कुछ राहत देखने को मिली। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 0.08 प्रतिशत घटकर 4.992 प्रतिशत रह गई।

भारत में भी 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड पिछले बंद स्तर 7.073 प्रतिशत से घटकर 7.057 प्रतिशत हो गई।

बॉन्ड यील्ड में कमी से इक्विटी बाजार को कुछ राहत मिल सकती है, क्योंकि इससे शेयरों और निश्चित आय वाले निवेश साधनों के बीच आकर्षण का अंतर बदलता है। हालांकि, अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड करीब 5 प्रतिशत पर बनी हुई है, इसलिए वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों पर दबाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

रुपये में मामूली गिरावट

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली कमजोर रहा। रुपया पिछले कारोबारी सत्र के 95.8800 के बंद स्तर की तुलना में 95.9300 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार करता रहा।

रुपये पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, वैश्विक पूंजी प्रवाह और डॉलर की मजबूती का असर बना हुआ है। कमजोर रुपया निर्यात आधारित कंपनियों के लिए कुछ राहत दे सकता है, लेकिन आयात पर निर्भर उद्योगों के लिए लागत बढ़ा सकता है।

कच्चे तेल के महंगे आयात के साथ रुपये में कमजोरी बनी रहने पर देश के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर भी दबाव बढ़ सकता है।

फेड के फैसले पर बाजार की नजर

बुधवार के कारोबार में सबसे बड़ा वैश्विक घटनाक्रम अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक रही। निवेशकों का ध्यान केवल ब्याज दर के फैसले पर नहीं, बल्कि फेड के बयान और आगे की ब्याज दर नीति को लेकर संकेतों पर भी रहा।

बाजार में मौजूदा 3.50-3.75 प्रतिशत की लक्ष्य सीमा से 25 आधार अंक की वृद्धि की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि, निवेशकों के लिए वास्तविक महत्व फेड की आगे की नीति को लेकर टिप्पणी का है।

अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों पर पड़ता है। इसलिए भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए फेड का रुख महत्वपूर्ण है।

अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को भी दबाव में रहा था। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 328.09 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 52,093.11 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में 0.45 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 0.78 प्रतिशत की गिरावट रही।

हालांकि, कुछ प्रौद्योगिकी शेयरों में तेजी रही। क्वालकॉम 4 प्रतिशत से अधिक चढ़ा, जबकि एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज और कोहेरेंट में करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

यूरोपीय बाजारों में स्थिरता

यूरोपीय शेयर बाजारों में बुधवार को तेजी रही। इससे पहले भारी बिकवाली के कारण कई प्रमुख यूरोपीय बाजार सूचकांक कई महीनों के निचले स्तर तक पहुंच गए थे।

ब्रिटेन से आए महंगाई के आंकड़ों ने हालांकि निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अगस्त में उपभोक्ता महंगाई दर बढ़कर 3.1 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 2.9 प्रतिशत थी। मार्च के बाद यह पहली बार था जब ब्रिटेन की महंगाई दर 3 प्रतिशत से ऊपर गई। मोटर ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि इसका एक प्रमुख कारण रही।

यह आंकड़ा बैंक ऑफ इंग्लैंड की गुरुवार को होने वाली मौद्रिक नीति बैठक से ठीक पहले आया है। अब निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि लगातार ऊंची महंगाई केंद्रीय बैंक की ब्याज दर नीति को किस तरह प्रभावित कर सकती है।

एशियाई बाजारों में भी ज्यादातर प्रमुख सूचकांक बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि, ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ने बाजार की तेजी पर अंकुश बनाए रखा।

जापान का व्यापार घाटा अगस्त में बढ़कर 1,105.6 अरब येन हो गया, जो एक साल पहले 294.1 अरब येन था। यह लगातार चौथा मासिक घाटा और जनवरी के बाद सबसे बड़ा घाटा है। अगस्त में जापान का आयात 28 प्रतिशत बढ़कर 11,153.9 अरब येन रहा, जबकि निर्यात 19.3 प्रतिशत बढ़कर 10,048.4 अरब येन हुआ।

सोने में एक प्रतिशत की तेजी

कमोडिटी बाजार में एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना 1 प्रतिशत बढ़कर 1,52,323 रुपये पर पहुंच गया।

वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच सोने में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। ब्याज दरों और वास्तविक बॉन्ड यील्ड में बदलाव का सोने की कीमतों पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है।

ईपीएफओ कवरेज का दायरा बढ़ा

बाजार के अलावा बुधवार को सरकार ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने को मंजूरी दी।

नई सीमा 17 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी और सरकार के अनुसार इससे करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं।

इस फैसले का व्यापक आर्थिक महत्व है। इससे अधिक संख्या में कर्मचारियों को संगठित सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही, औपचारिक रोजगार और दीर्घकालीन बचत को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

हालांकि, सरकार पर पेंशन संबंधी अतिरिक्त वित्तीय दायित्व भी आएगा। सरकारी जानकारी के अनुसार इस विस्तार के बाद सालाना खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

नए शेयरों की लिस्टिंग

बुधवार को नए सूचीबद्ध शेयरों में भी अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिला।

कनोहार इलेक्ट्रिकल्स के शेयर बीएसई पर 751.30 रुपये पर बंद हुए, जो 632 रुपये के इश्यू मूल्य से 18.88 प्रतिशत अधिक है। शेयर 672.05 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ था और दिन में 786.95 रुपये के उच्च स्तर तक गया। बीएसई पर कंपनी के 23.80 लाख से अधिक शेयरों में कारोबार हुआ।

ग्लास वॉल सिस्टम्स (इंडिया) के शेयर 215.35 रुपये पर बंद हुए, जो 182 रुपये के इश्यू मूल्य से 18.32 प्रतिशत अधिक है। शेयर 190.10 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ था और 228.10 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा। बीएसई पर 45.11 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

इसके विपरीत प्रासोल केमिकल्स का शेयर 672.05 रुपये पर बंद हुआ, जो 676 रुपये के इश्यू मूल्य से 0.58 प्रतिशत नीचे है। हालांकि, शेयर 611 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ था, यानी इश्यू मूल्य से 9.62 प्रतिशत की छूट पर, लेकिन बाद में इसमें सुधार आया।

कंपनियों के शेयरों पर नजर

गोदावरी बायोरिफाइनरीज में 5.21 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी ने बताया कि चीन के पेटेंट कार्यालय ने वायरल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाले यौगिकों से संबंधित पेटेंट प्रदान किया है।

एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स 2.52 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी को तेलंगाना के कमिश्नर ऑफ प्रोहिबिशन एंड एक्साइज से पेय योग्य उपयोग के लिए माल्ट स्पिरिट के निर्माण का लाइसेंस मिला है।

इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक 2.66 प्रतिशत बढ़ा। बैंक के बोर्ड ने 500 करोड़ रुपये जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसे नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करके जुटाया जाएगा।

एल्केम लैबोरेटरीज में 0.27 प्रतिशत की मामूली तेजी रही। कंपनी ने वयस्क मरीजों में आंशिक रूप से शुरू होने वाले दौरे के इलाज के लिए सेनोबामेट आधारित दवा NeuCeno लॉन्च की है।

प्राज इंडस्ट्रीज 1.26 प्रतिशत गिरा। कंपनी ने भारत में बायो-आइसोब्यूटानॉल तकनीक के विकास और व्यावसायीकरण के लिए समझौता किया है। इसके तहत भारत में इस तकनीक के व्यावसायीकरण की अगुवाई प्राज करेगी।

आर आर केबल 0.71 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने सिलवासा में अपनी नई यूनिट-3 में 15 सितंबर से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया। संयंत्र की कुल नियोजित क्षमता 18,000 टन सालाना है, जिसमें 12,000 टन की क्षमता फिलहाल चालू है। शेष क्षमता दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है।

बीएमडब्ल्यू वेंचर्स 1.18 प्रतिशत कमजोर रहा। कंपनी को टाटा प्रोजेक्ट्स से 72.94 करोड़ रुपये के दो खरीद ऑर्डर मिले हैं। ये ऑर्डर 3X800MW USCTPP-Adani परियोजना के लिए FE-550D ग्रेड टीएमटी स्टील की आपूर्ति से जुड़े हैं।

IPO बाजार में मजबूत मांग

प्राथमिक बाजार में निवेशकों की सक्रियता बनी रही। हीरो मोटर्स के आईपीओ को 16 सितंबर को शाम 5 बजे तक 12,26,40,042 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 8,86,07,596 शेयर पेश किए गए थे। इस तरह इश्यू 1.38 गुना सब्सक्राइब हुआ। इश्यू 16 सितंबर को खुला और 18 सितंबर को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 130-140 रुपये प्रति शेयर है।

मनिका प्लास्टेक का इश्यू 28.12 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसे 2,13,86,919 शेयरों के मुकाबले 60,14,82,852 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू 11 सितंबर को खुला था और 16 सितंबर को बंद हुआ। मूल्य दायरा 40-43 रुपये प्रति शेयर है।

जिंदल सुप्रीम (इंडिया) को 93,99,600 शेयरों के मुकाबले 7,07,73,346 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू 7.53 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 130-140 रुपये है और यह 18 सितंबर को बंद होगा।

एसएस रिटेल को 87,93,884 शेयरों के मुकाबले 1,26,74,480 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं और इश्यू 1.44 गुना सब्सक्राइब हुआ।

प्राथमिक बाजार में यह गतिविधि ऐसे समय में जारी है जब द्वितीयक बाजार में निवेशक तेल कीमतों, रुपये की कमजोरी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क हैं।

आगे बाजार की दिशा

गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और उसके बाद जारी होने वाले मार्गदर्शन से तय हो सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत, रुपया, सरकारी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेश प्रवाह भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

बुधवार की तेजी ने पिछले दो सत्रों की गिरावट के बाद बाजार को कुछ राहत जरूर दी, लेकिन कमजोर बाजार चौड़ाई बताती है कि निवेशक अभी व्यापक स्तर पर जोखिम लेने के बजाय चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दे रहे हैं।

ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने, रुपये के 96 प्रति डॉलर के आसपास रहने और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के करीब 5 प्रतिशत रहने के कारण वैश्विक और घरेलू बाजार के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं।

ऐसे माहौल में अगले कुछ सत्रों में वैश्विक ब्याज दरों, ऊर्जा कीमतों और मुद्रा बाजार से मिलने वाले संकेत भारतीय शेयर बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होंगे।