
विशेष संवाददाता / नई दिल्ली
संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत मिलने को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने आगामी मानसून सत्र के विधायी एजेंडे से संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को फिलहाल बाहर रखने का फैसला किया है। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सदस्य संख्या बढ़ाने के साथ-साथ वर्ष 2028 से महिला आरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त करना है।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक आयोजित होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस सत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को प्राथमिकता दी है। इनमें विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 प्रमुख है, जिसका उद्देश्य विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करना है। यह विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था।
सत्र के एजेंडे में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 भी शामिल है। इस विधेयक के माध्यम से भारतीय उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य शिक्षण, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना, मान्यता (एक्रेडिटेशन) की पारदर्शी व्यवस्था विकसित करना तथा विश्वविद्यालयों को अधिक संस्थागत स्वायत्तता प्रदान करना है।
सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी। इसमें जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत विलंब से पंजीकरण कराने के मामलों में अधिक कड़े प्रावधान किए जाने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 भी विचार के लिए सूचीबद्ध है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन कर राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े अपराधों के प्रावधानों को अद्यतन करना है।
हालांकि, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को विधायी कार्यसूची में शामिल नहीं किए जाने से राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ने की संभावना है। यह प्रस्तावित विधेयक महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन तथा आगामी परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ माना जा रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा सकता है, जबकि सरकार का कहना है कि फिलहाल अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को प्राथमिकता दी जा रही है।
