
By Our Business Bureau
मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की सतर्कता के कारण भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को अपने शुरुआती लाभ को बरकरार नहीं रख सके।
हालांकि घरेलू बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई थी—और निफ्टी ने एक समय 24,180 का स्तर भी पार कर लिया था—लेकिन सत्र के अंत में दिग्गज वित्तीय शेयरों में मुनाफावसूली (profit booking) ने दिन की अधिकांश बढ़त को मिटा दिया। बीएसई सेंसेक्स 1.44 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,186.67 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 5.75 अंक फिसलकर 24,072.75 पर बंद हुआ, जो मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 24,100 के स्तर से नीचे रहा।
बाजार के प्रमुख कारक (Key Market Drivers)
- भू-राजनीतिक चिंता: बाजार की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव पर टिकी हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारत जैसी तेल-आयातित अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई का डर फिर से पैदा कर दिया है।
- वैश्विक रुख: ताइवान सेमीकंडक्टर (TSMC) के नतीजों से पहले एशियाई बाजारों में चिप शेयरों पर दबाव देखा गया। हालांकि, घरेलू आईटी, ऑटो और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (consumer durables) में खरीदारी ने गिरावट को काफी हद तक थाम लिया।
- बाजार की अस्थिरता: ‘फियर गेज’ कहे जाने वाले इंडिया VIX में 2.92% की गिरावट आई और यह 12.88 पर रहा, जो दर्शाता है कि निवेशक फिलहाल बड़ी अस्थिरता की उम्मीद नहीं कर रहे हैं।
व्यापक बाजार और तकनीकी दृष्टिकोण (Broad Market & Technical Outlook)
बाजार का दायरा (Market breadth) कमजोर रहा; बीएसई पर 2,224 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि 2,012 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 0.30% की गिरावट आई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.10% की मामूली बढ़त बनाने में सफल रहा।
तकनीकी राय: विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी को तेजी बरकरार रखने के लिए 24,200–24,260 के स्तर के ऊपर टिके रहने की जरूरत है, जबकि 24,000 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
वित्तीय और कमोडिटी बाजार (Financial & Commodity Markets)
- बॉन्ड और मुद्रा: 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड घटकर 6.753% पर आ गई, जबकि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली गिरकर 96.33 पर बंद हुआ।
- कमोडिटी: एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.19% गिरकर ₹1,41,585 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। ब्रेंट क्रूड ऑयल लगभग $84.73 प्रति बैरल पर रहा, जो एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब है।
कॉर्पोरेट नतीजों का असर (Earnings-Led Volatility)
- प्रमुख बढ़त वाले शेयर: ABB इंडिया 6% से अधिक चढ़ा, BHEL में 5% की तेजी आई (कंपनी मुनाफे में लौटी), MRPL 10% से अधिक उछला, और एम्वी फोटोवोल्टिक (Emmvee Photovoltaic) ने 8% की बढ़त दर्ज की।
- प्रमुख गिरावट वाले शेयर: ICICI लोम्बार्ड का शेयर लगभग 11% लुढ़का। एंजेल वन (Angel One) के मुनाफे में दोगुना उछाल आने के बावजूद, बाजार की उम्मीदों के अनुरूप न होने पर इसमें गिरावट दर्ज की गई।
आईपीओ बाजार की हलचल (IPO Market Momentum)
आईपीओ बाजार में निवेशकों का उत्साह बरकरार है। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के आईपीओ को 41 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिला। एल्पाइन टेक्सवर्ल्ड का आईपीओ भी 1.4 गुना सब्सक्राइब हुआ। वहीं, लेजर पावर एंड इंफ्रा ने शानदार शुरुआत की और अपने इश्यू प्राइस से 23% ऊपर बंद हुआ।
बाजार का आउटलुक (Outlook)
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू शेयर बाजार निकट भविष्य में एक सीमित दायरे में रह सकते हैं। बाजार की आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका-ईरान संघर्ष की स्थिति और चल रहे तिमाही नतीजों (Q1 earnings) पर निर्भर करेगी।
आगे की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में घरेलू शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकते हैं। निवेशकों की नजर अब कॉरपोरेट नतीजों, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी।
मजबूत घरेलू आर्थिक बुनियाद और बेहतर कॉरपोरेट आय बाजार को सहारा दे रही है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम और ऊंचे ऊर्जा मूल्य निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए चुनिंदा और गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।
