Last Updated on July 4, 2026 11:36 am by INDIAN AWAAZ

एस एन वर्मा

आंध्र प्रदेश के तोतापूरी आम क्षेत्र में कीमतों में भारी गिरावट के बाद भारत सरकार ने आपातकालीन कदम उठाए हैं। राज्य के किसानों के बीच पैदा हुए गंभीर आर्थिक संकट को देखते हुए, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाजार को स्थिर करने और किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए आम की पूरी सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

तोतापूरी आम आंध्र प्रदेश की कृषि-व्यवसाय (Agri-business) अर्थव्यवस्था का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। खाने वाले आमों के विपरीत, तोतापूरी की खेती बड़े पैमाने पर औद्योगिक स्तर पर की जाती है। इसका मुख्य उपयोग घरेलू और वैश्विक बाजारों के लिए पल्प (गूदा), कंसंट्रेट और जूस बनाने में होता है। हालांकि, हाल के दिनों में बाजार कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों के मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगा है।

वैल्यू चेन को दुरुस्त करेगी हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी

इस संकट के स्थायी समाधान के लिए, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। ICAR-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (CISH), लखनऊ के निदेशक डॉ. दामोदरन को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। इस पैनल में देश भर के शीर्ष वैज्ञानिक, बागवानी विशेषज्ञ और राज्य सरकार के प्रतिनिधि शामिल हैं।

कमेटी को आंध्र प्रदेश के प्रमुख तोतापूरी उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करने और जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए महज 10 दिनों का समय दिया गया है। यह पैनल केवल कागजी आंकड़ों पर निर्भर न रहकर, सीधे खेतों और मंडियों में जाकर व्यापार से जुड़े हर स्तर की जांच करेगा।

विशेषज्ञ समिति के मुख्य फोकस क्षेत्र

कमेटी इस संकट को एक बिजनेस मॉडल की कमियों के रूप में देख रही है, और इसके तहत निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर काम किया जाएगा:

  • लागत बनाम मुनाफा: किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत की तुलना मौजूदा बाजार कीमतों से करना, ताकि उनके नुकसान का सही आकलन हो सके।
  • औद्योगिक क्षमता का उपयोग: प्रोसेसिंग इकाइयों (फूड प्रोसेसिंग प्लांट्स) की वास्तविक मांग, उनकी काम करने की क्षमता और उनके पास मौजूद स्टॉक की जांच करना।
  • बाजार विश्लेषण (Market Analysis): घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजारों में कीमतों के अचानक गिरने के मुख्य कारणों का पता लगाना।
  • सप्लाई चेन की रुकावटें: खेत से लेकर प्रोसेसिंग प्लांट तक के सफर में होने वाली कमियों और बिचौलियों के प्रभाव को चिन्हित करना।

कृषि निवेश और स्थायी विकास की तैयारी

विशेषज्ञ समिति द्वारा सौंपी जाने वाली रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए नीति निर्धारण का ब्लूप्रिंट (खाका) बनेगी। सरकार इसके आधार पर केंद्र और राज्य सरकार की एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार करेगी। इसका उद्देश्य कीमतों को तुरंत स्थिर करना, प्रोसेसिंग क्षमता को बढ़ाना और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधे बड़े खरीदारों से जोड़ना है।

इस पहल के जरिए सरकार का लक्ष्य कॉर्पोरेट प्रोसेसर्स, निर्यातकों और आम किसानों के हितों को एक साथ जोड़ना है। इससे न केवल उतार-चढ़ाव वाले इस बाजार को स्थिरता मिलेगी, बल्कि भविष्य के लिए फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निजी निवेश और रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।