Last Updated on June 8, 2026 1:03 am by INDIAN AWAAZ

असुरक्षित भोजन की वजह से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के बीमार होने का जोखिम, बड़ी आयु के बच्चों और वयस्कों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने एक नए विश्लेषण में आगाह किया है कि यह समस्या हर वर्ष, विश्व भर में, 15 लाख मौतों के लिए ज़िम्मेदार है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, छोटे बच्चे, कुल वैश्विक आबादी का केवल 9 प्रतिशत हैं, लेकिन भोजन-जनित बीमारियों के कुल मामलों में उनका हिस्सा 33 प्रतिशत है, विशेष रूप से दस्त सम्बन्धी रोगों में जोकि उनके आयु वर्ग के लिए घातक साबित हो सकते हैं.
इसके अलावा, रासायनिक जोखिमों, जैसेकि मिथाइल मरकरी (पारा) की चपेट में आना, भोजन में सीसा (lead) का होना उनके मस्तिष्क के विकास को नुक़सान पहुँचा सकता है और जीवन-पर्यन्त तंत्रिका तंत्र (neurological) व विकास समस्याओं की वजह बन सकता है.
WHO का अनुमान है कि असुरक्षित भोजन की वजह से हर वर्ष, बीमारियों के 86.6 करोड़ मामले सामने आते हैं और 15 लाख मौतें होती हैं, जिनमें से अधिकाँश से रोकथाम उपायों के ज़रिए निपटा जा सकता है.
इनके लिए बेहतर जल, साफ़-सफ़ाई, स्वच्छता, खाद्य सामग्री की सुरक्षा के लिए बेहतर तौर-तरीक़े अपनाने और निर्बल आबादी के लिए स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की आवश्यकता होती है.
भोजन-जनित बीमारियों के बोझ में, 2000 के शुरुआती वर्षों की तुलना में गिरावट आई है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर असमानताएँ बरक़रार हैं और सर्वाधिक बोझ अफ़्रीका व दक्षिण-पूर्ण एशिया में नज़र आ रहा है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि खाद्य संरक्षा, केवल एक सैद्धान्तिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हर आहार, हर परिवार और हर दिन के लिए मायने रखता है.
“असुरक्षित भोजन, हमेशा से एक बडी सार्वजनिक स्वास्थ्य चिन्ता रहा है, लेकिन अभी तक हमारे पास एक बड़ी तस्वीर का अभाव था, जोकि इसके मानवीय व आर्थिक बोझ के बारे में बताए. इन नए अनुमानों से यह स्थिति बदलेगी.”
रिपोर्ट के अनुसार, भोजन-जनित बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों के कारण वर्ष 2021 में 86 करोड़ बीमारियों के मामले दर्ज किए गए. मगर असुरक्षित भोजन से होने वाली मौतों (73 प्रतिशत) के लिए मुख्य रूप से रासायनिक दूषण ज़िम्मेदार था.
अकार्बनिक आर्सेनिक और सीसा इसकी बड़ी वजह हैं, चूँकि लम्बे समय तक सम्पर्क में रहने से हृदय रोग व कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है. एक वर्ष में, ये दोनों पदार्थ 10 लाख से अधिक मौतों में एक कारक थे.
स्वास्थ्य व आर्थिक बोझ
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अफ़्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में भोजन-जनित बीमारियों के 70 प्रतिशत से अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं. वैश्विक स्तर पर मौतों का यहाँ 60 फ़ीसदी दर्ज होता है.
कम संसाधनों वाले इलाक़ों में रह रहे बच्चों व लोगों को सबसे अधिक जोखिम झेलना पड़ता है, जोकि खाद्य प्रणालियों, स्वास्थ्य देखभाल और साफ़-सफ़ाई व्यवस्था में व्याप्त असमानताओं को दर्शाती हैं.
इसका प्रभाव केवल स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है. यूएन एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2021 में भोजन-जनित बीमारियों की वजह से 310 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ, चूँकि बीमारी की वजह से लोग काम पर नहीं आ पाए.
जलवायु परिवर्तन के कारण यह स्थिति और बिगड़ सकती है, और खाद्य सामग्री के दूषित होने का जोखिम बढ़ता है. रोगाणु-रोधी प्रतिरोध एक और चुनौती है.
इसके मद्देनज़र, यूएन एजेंसी ने उम्मीद जताई है कि इस विश्लेषण से, सदस्य देशों को ठोस उपाय अपनाने, निगरानी को मज़बूती देने और स्वास्थ्य, कृषि व पर्यावरण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी. UN NEWS
