Last Updated on February 19, 2026 11:59 am by INDIAN AWAAZ

इंद्र वशिष्ठ, 

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों ने विशेष रणनीति अपनाई है। इस रणनीति के कारण आतंकियों के लिए अब ऊंचाई वाली पहाड़ियों/जंगल में छिपना/टिकना या ठिकाना बनाना मुश्किल हो गया। सीआरपीएफ के जवान आतंकियों को घेर या खदेड़ रहे हैं।

इस रणनीति के तहत सीआरपीएफ ने पहाड़ी इलाकों में 6 हजार फ़ीट और उससे ज़्यादा ऊंचाई पर कुल 43 टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस (टीओबी) बनाए हैं। ये टीओबी 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू और कश्मीर के बैसरन में टूरिस्ट पर हुए आतंकवादी हमले के बाद बनाए गए। इनमें से, पिछले साल अक्टूबर में कश्मीर में 26 और नवंबर में जम्मू में कुल 17 टीओबी बनाए गए। 

सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार आतंकियों ने अपनी रणनीति बदली है अब वो नीचे वादी में वारदात नहीं करते। वो ऊंचाई वाले इलाकों में वारदात करते हैं।

आतंकियों से निपटने के सुरक्षा बलों ने भी अपनी रणनीति बदल ली। सीआरपीएफ,  जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर अब ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकियों को सैटल नहीं होने दे रही। सुरक्षा बलों द्वारा आतंकियों को घेरा या खदेड़ा जा रहा है। 

एक टीओबी में सीआरपीएफ के 16 से 25 जवान और कश्मीर पुलिस के 3-4 पुलिसकर्मी होते हैं। 

बर्फ़ और ठंड से बचाव के लिए जवानों को विशेष जैकेट, स्लीपिंग बैग, जूते और बैग आदि दिए गए हैं। संपर्क के लिए सेटेलाइट फोन दिए गए हैं। 

जम्मू में 30-40 और कश्मीर में 40-57 विदेशी आतंकियों के सक्रिय होने की सूचना हैं। कश्मीर के स्थानीय 6 आतंकी सक्रिय हैं। इनमें से 4 पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद हैं। कश्मीर में स्थानीय आतंकी लतीफ़ और जाकिर सक्रिय हैं। 

टीओबी के माध्यम से आतंकियों की गतिविधियों वाले इलाकों में लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इससे अब आतंकियों को न तो सुरक्षित पनाह मिलेगी और न ही हमलों की साजिश रचने का मौका।

पहले आतंकी ऐसे इलाकों में बेखौफ घूमते थे और उन इलाकों में छिप कर वह वारदात के लिए मौके की तलाश में रहते हैं और वारदात के बाद उन इलाकों में आसानी से गायब हो जाते।