Last Updated on February 4, 2026 12:11 am by INDIAN AWAAZ

AMN / BIZ DESK
शेयर बाज़ार में मंगलवार को ज़बरदस्त उछाल देखने को मिला। सेंसेक्स 2,072.67 अंकों यानी 2.54 प्रतिशत की छलांग लगाकर 83,739.13 पर बंद हुआ। यह नवंबर 2024 के बाद सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने इंडो‑यूएस व्यापार समझौते के बाद बड़े पैमाने पर खरीदारी की।
निफ्टी 50 भी 639.15 अंक यानी 2.55 प्रतिशत चढ़कर 25,727.55 पर बंद हुआ। दिन की शुरुआत 26,308.05 पर हुई और यह 26,341.20 तक पहुंचा, जो इसके सर्वकालिक उच्च स्तर 26,373.20 के बेहद करीब था। हालांकि ऊँचाई से कुछ गिरावट भी देखने को मिली।
निर्यात उन्मुख सेक्टर
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के रवि सिंह ने कहा कि लंबे समय से व्यापार वार्ता में देरी और ऊँचे टैरिफ का डर भारतीय शेयरों पर दबाव बना रहा था। अब यह बाधा काफी हद तक दूर हो गई है। इंजीनियरिंग गुड्स, मछली पालन, वस्त्र, रसायन और ऑटो एंसिलरी जैसे सेक्टरों को अमेरिकी बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
वित्तीय और बैंकिंग
निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 3.27 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी बैंक 2.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60,041.30 पर बंद हुआ और सत्र के दौरान 61,764 के नए उच्च स्तर को छुआ। बजाज फाइनेंस और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में तेज़ी रही।
रियल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर
रियल्टी शेयरों में सबसे अधिक 4.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। अडानी एंटरप्राइजेज 10.58 प्रतिशत और अडानी पोर्ट्स 9.19 प्रतिशत उछले। यह ऊर्जा व्यापार और लॉजिस्टिक्स विस्तार की उम्मीदों से जुड़ा रहा।
ऊर्जा और कमोडिटी
ऊर्जा शेयरों में मजबूती रही। रुपये ने भी 1.40 प्रतिशत की तेज़ी दिखाई और डॉलर के मुकाबले 90.25 पर पहुंचा। सोना‑चाँदी पिछले सप्ताह की भारी बिकवाली के बाद स्थिरता के संकेत दिखा रहे हैं।
फार्मा और उपभोक्ता
फार्मा शेयरों में सुधार देखा गया। इंटरग्लोब एविएशन 5.57 प्रतिशत चढ़ा। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ और आईटी सेवाएँ भी लाभार्थी मानी जा रही हैं।
बाज़ार की चौड़ाई और दृष्टिकोण
बीएसई में 3,279 शेयर चढ़े जबकि 1,015 गिरे। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 3 प्रतिशत उछले। बीएसई सूचीबद्ध कंपनियों का बाज़ार पूंजीकरण करीब ₹12.10 लाख करोड़ बढ़कर ₹467.03 लाख करोड़ हो गया। इंडिया VIX 7 प्रतिशत गिरकर 12.89 पर आ गया, जिससे बाज़ार की चिंता कम होती दिखी।
विश्लेषकों का मानना है कि इंडो‑यूएस समझौते से निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, एफआईआई प्रवाह सुधरेगा और रुपये को सहारा मिलेगा। हालांकि निफ्टी के लिए 25,400‑25,500 का स्तर अहम रहेगा और आगामी आरबीआई मौद्रिक नीति से अस्थिरता बनी रह सकती है।
