Last Updated on January 29, 2026 8:35 pm by INDIAN AWAAZ
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने आज लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने इसे तैयार किया है। आर्थिक सर्वेक्षण में देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और भविष्य के दृष्टिकोण की व्यापक समीक्षा होती है।
इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। सदन की अगली कार्यवाही अब पहली फरवरी रविवार को होगी। इस दिन केन्द्रीय बजट 2026-27 पेश किया जाएगा। बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा। दूसरा चरण नौ मार्च से दो अप्रैल तक आयोजित होगा। बजट सत्र के दौरान 30 बैठकें होंगी।
देश में वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। यह अनुमान आज संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन द्वारा पेश आर्थिक सर्वेक्षण में व्यक्त किया गया।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में वृद्धि की मजबूत गति को बनाए रखा है। पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर सात दशमलव चार प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें घरेलू मांग का महत्वपूर्ण योगदान है। निजी उपभोग और पूंजी निर्माण से वृद्धि को समर्थन मिल रहा है, जबकि आपूर्ति पक्ष में सेवाओं का योगदान प्रमुख बना हुआ है। विनिर्माण गतिविधि मजबूत हुई है और कृषि क्षेत्र ने स्थिरता प्रदान की है।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार व्यवधानों के कारण वैश्विक आर्थिक माहौल अनिश्चित बना हुआ है। हालांकि निकट भविष्य में वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भी स्थिरता दिखी है। लेकिन अंतर्निहित कमजोरियां बनी हुई हैं, जिनमें उच्च राजकोषीय दबाव, खंडित आपूर्ति श्रृंखलाएं और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए आर्थिक नीतिगत साधनों पर बढ़ती निर्भरता शामिल हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार देश का हाल का आर्थिक प्रदर्शन दर्शाता है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद व्यापक आर्थिक स्थिरता और वृद्धि को बनाए रखा जा सकता है। अनुकूल मानसून परिस्थितियों के सहयोग से वित्त वर्ष 2025-26 में कृषि और संबद्ध गतिविधियों की वृद्धि तीन दशमलव एक प्रतिशत रहने का अनुमान है। औद्योगिक गतिविधियों में गति मजबूत बनी रहने की संभावना है, जिसे जीएसटी के युक्तिसंगत होने और मांग के अनुकूल स्थितियां बनने से बल मिलेगा।
सर्वेक्षण में कहा गया है कि प्रमुख सीपीआई मुद्रास्फीति घटकर एक दशमलव सात प्रतिशत रह गई है, जिसका मुख्य कारण सब्जियों और दालों की कीमतों में सुधार रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार, मुद्रास्फीति की स्थिति अनुकूल बने रहने का अनुमान है। इसे आपूर्ति-पक्ष की अनुकूल परिस्थितियों और जीएसटी दरों के युक्तिसंगत होने से समर्थन मिलेगा।
