Last Updated on January 17, 2026 4:58 pm by INDIAN AWAAZ

दुनिया में 31 करोड़ 80 लाख लोग गंभीर भुखमरी की चपेट में

Staff Reporter

दुनिया एक बार फिर भुखमरी के गंभीर और तेजी से बढ़ते संकट का सामना कर रही है। ताज़ा वैश्विक आकलनों के अनुसार, 31 करोड़ 80 लाख लोग ऐसे हालात में जी रहे हैं जहाँ उन्हें गंभीर या उससे भी बदतर स्तर की भूख झेलनी पड़ रही है। हिंसक संघर्षों, चरम मौसम, आर्थिक संकट और सीमित संसाधनों ने खाद्य असुरक्षा को अभूतपूर्व स्तर तक पहुँचा दिया है, जबकि लाखों लोग अकाल जैसी परिस्थितियों में जीवन गुज़ारने को मजबूर हैं।

विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) द्वारा वर्ष की शुरुआत में जारी की गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नए साल को अभी मुश्किल से दो हफ्ते ही हुए हैं, लेकिन दुनिया पहले ही एक खतरनाक और बढ़ते वैश्विक भूख संकट के मुहाने पर खड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में स्थिति और भयावह हो सकती है, जिसका असर केवल प्रभावित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है।

डब्ल्यूएफपी की कार्यकारी निदेशक सिंडी मैक्केन ने कहा है कि भूख के खिलाफ लड़ाई को लेकर संस्था का संकल्प अडिग है। उन्होंने कहा कि हर संभव अवसर का उपयोग कर उन लोगों के लिए संसाधन और सहयोग जुटाया जाएगा जिनका जीवन पूरी तरह से मानवीय सहायता पर निर्भर है। उनके अनुसार, मौजूदा हालात में भुखमरी केवल मानवीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक शांति, सुरक्षा और विकास के लिए भी गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील

सिंडी मैक्केन ने वैश्विक नेताओं से आग्रह किया है कि वे खाद्य असुरक्षा को अपनी नीतियों में सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि मानवीय संकटों की शुरुआत में ही यदि समय रहते हस्तक्षेप न किया गया, तो हालात तेजी से अकाल में बदल सकते हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि दुनिया को मानव-निर्मित अकाल से मुक्त करने के लिए विनाशकारी युद्धों और संघर्षों को रोकना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यही संघर्ष भूख, विस्थापन और निराशा को जन्म देते हैं।

डब्ल्यूएफपी के अनुसार, संस्था अकेले इस संकट से नहीं निपट सकती। मौजूदा स्थिति त्वरित, रणनीतिक और सामूहिक कार्रवाई की मांग करती है, जिसमें सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और निजी क्षेत्र को मिलकर आगे आना होगा।

संसाधनों की भारी कमी, राहत कार्य संकट में

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वर्ष दुनिया के 11 करोड़ सबसे ज़रूरतमंद लोगों की सहायता के लिए डब्ल्यूएफपी को 13 अरब डॉलर की आवश्यकता है, लेकिन उपलब्ध धनराशि इस ज़रूरत के आधे से भी कम है। यह कमी ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर भुखमरी अपने चरम पर पहुँच रही है।

इसके अलावा, सशस्त्र संघर्षों के बीच राहत कार्य पहले से कहीं अधिक खतरनाक और जटिल हो गए हैं। कई क्षेत्रों में मानवीय सहायता कर्मियों को सीधे जान के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, जिससे भोजन और आवश्यक मदद प्रभावित आबादी तक पहुँचाना बेहद कठिन हो गया है। इसके परिणामस्वरूप लाखों लोग जीवनरक्षक सहायता से वंचित रह सकते हैं, जिससे न केवल मानव जीवन बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

संघर्षों के समाधान के बिना भूख का अंत संभव नहीं

डब्ल्यूएफपी प्रमुख ने कहा कि संस्था यह कई बार साबित कर चुकी है कि संघर्षों के समय पर, रणनीतिक और नवाचारी समाधान अकाल को रोक सकते हैं। ऐसे उपाय न केवल समाजों को स्थिर बनाते हैं, बल्कि जबरन विस्थापन को कम करते हैं और परिवारों को पुनर्निर्माण का अवसर भी देते हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भूख के संकट से निपटने के लिए केवल भोजन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके मूल कारणों—जैसे युद्ध, गरीबी, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक असमानता—का समाधान भी उतना ही आवश्यक है।

आगे की रणनीति और प्राथमिकताएँ

सिंडी मैक्केन इस वर्ष रोम स्थित डब्ल्यूएफपी मुख्यालय में होने वाली बैठक में भूख के खिलाफ संघर्ष के लिए संस्था की प्रमुख प्राथमिकताओं को प्रस्तुत करेंगी। इनमें वित्तीय संसाधनों का विस्तार, नई तकनीकों की परिवर्तनकारी क्षमता का उपयोग और ज़मीनी स्तर पर काम कर रही राहत टीमों को सुरक्षित व प्रभावी ढंग से काम करने के लिए आवश्यक समर्थन देना शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक समुदाय ने इस संकट को गंभीरता से नहीं लिया, तो भुखमरी आने वाले वर्षों में एक शांत लेकिन विनाशकारी वैश्विक त्रासदी का रूप ले सकती है, जिसके प्रभाव पीढ़ियों तक महसूस किए जाएंगे। ऐसे में त्वरित, साझा और साहसिक निर्णय ही दुनिया को इस बढ़ते मानवीय संकट से बाहर निकाल सकते हैं।