Last Updated on January 2, 2026 6:39 pm by INDIAN AWAAZ

आफरीन हुसैन /कोलकाता

पश्चिम बंगाल में एक और हाई-स्टेक विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूरी ताकत के साथ चुनावी मोड में प्रवेश कर लिया है। इस राजनीतिक अभियान की कमान स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संभाल ली है। बंगाल का उनका तीन दिवसीय दौरा 2026 के चुनावों के लिए भाजपा की निर्णायक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

बुधवार को अमित शाह ने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित एक होटल में भाजपा की एक उच्चस्तरीय बंद कमरे की संगठनात्मक बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में बंगाल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ लाया गया। बैठक में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, सभी भाजपा सांसद और विधायक, वरिष्ठ संगठनात्मक पदाधिकारी और प्रमुख नगर निगम प्रतिनिधि शामिल हुए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में केवल उन्हीं नेताओं को बुलाया गया था जिन्हें संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है या जिनसे 2026 के चुनाव अभियान में अहम जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा है। इस तरह यह बैठक 2026 के चुनावी रणक्षेत्र की एक तरह से प्रारंभिक सूची भी मानी जा रही है।

इस बैठक का सबसे चौंकाने वाला पहलू पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष की मौजूदगी रही, जिनके राजनीतिक भविष्य को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं। पिछले कुछ महीनों में उनके पार्टी से दूरी बढ़ने की चर्चाएं समझी जा रही थीं, खासकर तब जब वे सार्वजनिक मंचों पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ नजर आए। यहां तक कि उनके तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं की भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी। ऐसे में अमित शाह द्वारा स्वयं दिलीप घोष से मुलाकात करना एक स्पष्ट और मजबूत संदेश माना जा रहा है कि भाजपा अपने पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से अग्रिम मोर्चे पर लाना चाहती है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि दिलीप घोष को 2026 के चुनावों में एक अहम संगठनात्मक और प्रचारात्मक भूमिका सौंपी जा सकती है।

दिलीप घोष को बंगाल भाजपा के अब तक के सबसे सफल प्रदेश अध्यक्षों में गिना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बंगाल से भाजपा के केवल तीन सांसद थे, जबकि 2019 में उनके नेतृत्व में यह संख्या बढ़कर 18 हो गई। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ एक मजबूत मुख्य विपक्ष के रूप में खुद को स्थापित किया। उनकी जमीनी पकड़ और आक्रामक राजनीतिक शैली ने बंगाल में भाजपा को पहली बार वास्तविक चुनौती देने वाली ताकत बना दिया।

बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया—पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों को समाप्त करना, बूथ स्तर पर संगठन को फिर से मजबूत करना और मतदाताओं के सामने एकजुट नेतृत्व प्रस्तुत करना। उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिया कि व्यक्तिगत मतभेदों को 2026 के चुनावी लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया जाएगा।

पश्चिम बंगाल में पिछला विधानसभा चुनाव अप्रैल 2021 में हुआ था और इसके नतीजे 2 मई को घोषित किए गए थे। 2026 के चुनाव भी इसी समय-सीमा में होने की संभावना है। ऐसे में अमित शाह का समय से पहले सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि भाजपा पिछली बार की संगठनात्मक कमजोरियों और रणनीतिक चूकों को दोहराना नहीं चाहती। इसलिए बंगाल में उनका यह तीन दिवसीय दौरा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि पूरी तरह रणनीतिक माना जा रहा है।

पुराने और नए नेताओं को एक मंच पर लाकर अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस को एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है—भाजपा ने 2026 के लिए अपना चुनावी वॉर रूम सक्रिय कर दिया है और तैयारी की घड़ी बज चुकी है। आने वाले महीनों में नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और संदेशों का आक्रामक एकीकरण देखने को मिल सकता है, जिससे बंगाल एक बार फिर देश के सबसे तीखे और निर्णायक राजनीतिक रणक्षेत्रों में शामिल हो जाएगा।