Last Updated on August 11, 2025 8:33 pm by INDIAN AWAAZ

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सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली) में कुत्तों के काटने और रेबीज़ की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आदेश दिया कि आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़कर नसबंदी की जाए और उन्हें स्थायी रूप से शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाए।

अदालत ने चेतावनी दी कि इस अभियान में बाधा डालने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और ज़रूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि एक बार पकड़े गए आवारा कुत्तों को दोबारा सार्वजनिक स्थानों पर नहीं छोड़ा जाएगा। ये निर्देश अदालत ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले में दिए, जो बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमलों की ख़बरों के आधार पर शुरू हुआ था। अदालत ने कहा कि मासूम बच्चों और शिशुओं को रेबीज़ का शिकार नहीं होना चाहिए और सार्वजनिक स्थान सुरक्षित व भयमुक्त होने चाहिए।

बेंच ने दिल्ली सरकार, नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) को निर्देश दिया कि 8 हफ्तों के भीतर कुत्तों के लिए उचित स्टाफ और सीसीटीवी निगरानी वाले शेल्टर बनाए जाएं और पकड़े गए कुत्तों का रोज़ाना रिकॉर्ड रखा जाए। इसके अलावा, एक हफ्ते के भीतर हेल्पलाइन नंबर शुरू करने का भी आदेश दिया गया, ताकि शिकायत मिलने पर 4 घंटे के भीतर कार्रवाई हो सके।

साथ ही, सभी संबंधित प्राधिकरणों को कुत्तों के टीकों की उपलब्धता, स्टॉक की स्थिति और टीका पाने वालों की जानकारी साझा करने के निर्देश दिए गए। अदालत ने किसी भी व्यक्ति या संगठन की हस्तक्षेप याचिकाएं स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा पहले है, भावनाएं बाद में। अदालत ने अगली सुनवाई पर प्रगति रिपोर्ट पेश करने का भी आदेश दिया।