Last Updated on January 18, 2026 12:41 am by INDIAN AWAAZ

विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट कहती है कि यदि इंडो-गंगा क्षेत्र और हिमालयी तराई क्षेत्रों में मिलकर स्वच्छ हवा के उपाय लागू किए जाएँ, तो दक्षिण एशिया में लगभग एक अरब लोगों के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हो सकता है. 

A Breath of Change: Solutions for Cleaner Air in the Indo-Gangetic Plains and Himalayan Foothills, नामक इस रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई है कि वायु प्रदूषण इस क्षेत्र की सबसे बड़ी विकास चुनौतियों में से एक बना हुआ है, जिससे हर वर्ष लगभग दस लाख लोग, समय से पहले मौत के मुँह में चले जाते हैं और क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद का लगभग दस प्रतिशत आर्थिक नुक़सान होता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि अलग-अलग क्षेत्रों और प्रशासनिक सीमाओं में मिलकर कुछ सिद्ध उपाय अपनाए जाएँ, तो प्रदूषण को काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है. इससे आर्थिक वृद्धि को भी मज़बूती मिलेगी और अर्थव्यवस्था अधिक सहनसक्षम बनेगी.

एक साझा क्षेत्रीय संकट

इंडो-गंगेटिक मैदानों और हिमालयी तराई क्षेत्रों में फैला वायु प्रदूषण, जो बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और पाकिस्तान के हिस्सों को प्रभावित करता है, मुख्य रूप से पाँच बड़े स्रोतों से जुड़ा है. 

इनमें घरों में भोजन पकाने और तापन के लिए ठोस ईंधन का उपयोग, उद्योगों में बिना पर्याप्त नियंत्रण के जीवाश्म ईंधन और बायोमास का इस्तेमाल, प्रदूषण फैलाने वाले परिवहन साधन, पराली जलाने जैसी कृषि गतिविधियाँ और उर्वरकों का अनुचित उपयोग, तथा खुले स्थानों पर कचरा जलाना शामिल हैं.

वायु प्रदूषण प्रशासनिक और राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहता. इसी कारण रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि कोई एक शहर या प्रदेश अकेले इस समस्या का समाधान नहीं कर सकता. 

कई इलाक़ों में हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों का आधे से अधिक हिस्सा, आसपास या दूर के क्षेत्रों से आता है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर मिलकर कार्रवाई करना आवश्यक है.

वैश्विक अनुभव से मालूम होता है कि ऐसा सुधार सम्भव है. चीन के जिंग-जिन-जी क्षेत्र और मैक्सिको सिटी जैसे इलाक़ों में लगातार और कई क्षेत्रों में किए गए प्रयासों के ज़रिये एक दशक के भीतर हानिकारक कणीय प्रदूषण को आधा कर दिया गया है.

नई दिल्ली में यूएन कार्यालय की छत पर लगा सौर ऊर्जा संयंत्र.

© UNDP India

विश्व बैंक के वरिष्ठ पर्यावरण अर्थशास्त्री मार्टिन हेगर का कहना है, “यह रिपोर्ट दिखाती है कि समाधान हमारी पहुँच में हैं और नीति निर्माताओं तथा निर्णयकर्ताओं के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप प्रस्तुत करती है, जिससे समन्वित, व्यवहार्य और प्रमाण-आधारित समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है.”

“दक्षिण एशिया में उद्यमों, परिवारों और किसानों के लिए स्वच्छ तकनीकों और तरीक़ों को अपनाने तथा सरकारों द्वारा उन्हें समर्थन देने के लिए मज़बूत वित्तीय और आर्थिक आधार मौजूद हैं.”

स्वच्छ हवा के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप

रिपोर्ट में स्वच्छ हवा से जुड़े उपायों को तीन आपस में जुड़े क्षेत्रों में विभाजित किया गया है. 

पहला क्षेत्र भोजन पकाने, उद्योग, परिवहन, कृषि और कचरा प्रबन्धन में प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही कम करने पर ध्यान देता है. 

दूसरा क्षेत्र, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी प्रणालियों को मज़बूत करने पर केन्द्रित है, ताकि हवा की गुणवत्ता सुधरने तक बच्चों और अन्य संवेदनशील समूहों की सुरक्षा की जा सके. 

तीसरा क्षेत्र, दीर्घकालिक सुधार के लिए मज़बूत संस्थानों, प्रभावी नियमों और क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर देता है.

नीतिगत लक्ष्यों को ज़मीन पर उतारने में सरकारों की मदद के लिए रिपोर्ट में “चार I’s” पर ज़ोर दिया गया है. इनमें InformationIncentivesInstitutions and Infrastructure (जानकारी, प्रोत्साहन, संस्थान और अवसंरचना) शामिल हैं.

विश्व बैंक की दक्षिण एशिया क्षेत्र की पर्यावरण प्रबन्धक, एन जीएनेट ग्लॉबर ने कहा कि स्वच्छ हवा हासिल करने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर लगातार सहयोग, पर्याप्त वित्तपोषण और मज़बूत क्रियान्वयन ज़रूरी है. मिलकर काम करने से सरकारें प्रदूषण कम कर सकती हैं, लाखों लोगों की जान बचा सकती हैं और सभी के लिए स्वच्छ हवा सुनिश्चित कर सकती हैं.

उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लिए विश्व बैंक का समर्थन

इसी क्रम में, भारत में विश्व बैंक शाखा ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में दो प्रमुख स्वच्छ-वायु कार्यक्रमों के लिए वित्तपोषण को मंज़ूरी दी है. इन कार्यक्रमों का लक्ष्य लगभग 27 करोड़ लोगों के लिए वायु गुणवत्ता में सुधार करना है, और इसका लाभ आसपास के प्रदेशों तक भी पहुँचने की उम्मीद है.

विश्व बैंक – भारत के कार्यवाहक देशीय निदेशक पॉल प्रोसी ने कहा कि वायु प्रदूषण पूरे दक्षिण एशिया में स्वास्थ्य पर गम्भीर असर डाल रहा है, उत्पादकता घटा रहा है और लोगों की जीवन गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है. 

उन्होंने कहा कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश की ये पहलें, भारत में प्रान्तीय सरकारों द्वारा शुरू किए गए पहले एयरशेड-आधारित और बहु-क्षेत्रीय कार्यक्रम हैं, जिनका उद्देश्य वायु प्रदूषण की जटिल समस्या से प्रभावी ढंग से निपटना है.

उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबन्धन कार्यक्रम के तहत लगभग 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार करना है. 

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Unsplash/Chris LeBoutillier

इस कार्यक्रम से 39 लाख परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा मिलेगी. इसके साथ ही, 15 हज़ार इलैक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन और 500 इलैक्ट्रिक बसें शुरू की जाएँगी, जिनसे स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिलेगा. 

इसके अलावा अधिक प्रदूषण फैलाने वाले साढ़े 13 हज़ार भारी वाहनों को, कम उत्सर्जन वाले विकल्पों से बदलने में भी सहायता दी जाएगी.

कार्यक्रम के क्रियान्वयन से जुड़ीं एना लुइसा लीमा और फ़राह ज़ाहिर ने कहा कि शहर-स्तरीय उपायों के बजाय एयरशेड दृष्टिकोण अपनाकर उत्तर प्रदेश का लक्ष्य कम लागत में और तेज़ी से वायु प्रदूषण को कम करना है.

हरियाणा में, 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सतत विकास स्वच्छ वायु परियोजना के तहत, वायु गुणवत्ता और उत्सर्जन की निगरानी प्रणालियों को मज़बूत किया जाएगा. इसके साथ ही गुरूग्राम, सोनीपत और फ़रीदाबाद जैसे शहरों में, बिजली से चालित यानि इलैक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा. 

यह परियोजना सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को स्वच्छ तकनीक अपनाने और कृषि अपशिष्ट प्रबन्धन में सुधार के लिए भी समर्थन देगी.

ये दोनों कार्यक्रम मिलकर इंडो-गंगेटिक मैदानों और हिमालयी तराई क्षेत्रों के लिए विश्व बैंक के व्यापक क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबन्धन कार्यक्रम का हिस्सा हैं. इनका उद्देश्य दक्षिण एशिया में स्वच्छ हवा, स्वस्थ समुदायों और अधिक टिकाऊ आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना है.

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