Last Updated on June 29, 2026 10:31 pm by INDIAN AWAAZ

हमारे संवाददाता /नई दिल्ली
भारत ने सोमवार को पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के भीतर किए गए कथित हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने जारी एक बयान में कहा कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई निर्दोष नागरिकों की जान गई है। मंत्रालय ने इसे पाकिस्तान की “अकारण सैन्य आक्रामकता” करार देते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है।
MEA ने कहा, “भारत पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के क्षेत्र में किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा करता है, जिनमें कई निर्दोष नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, मारे गए हैं। यह पाकिस्तान की खुली आक्रामकता है, जो अफगानिस्तान की संप्रभुता पर सीधा हमला और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।”
बयान में कहा गया कि यह घटना पाकिस्तान के उस लगातार दिखाई देने वाले गैर-जिम्मेदाराना रवैये का एक और उदाहरण है, जिसके तहत वह अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए पड़ोसी देशों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का सहारा लेता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “यह पाकिस्तान के लगातार लापरवाह आचरण तथा अपनी घरेलू विफलताओं को छिपाने के लिए सीमाओं के पार हिंसक कार्रवाइयों का सहारा लेने की उसकी निरर्थक कोशिश को दर्शाता है।”
भारत ने हमले में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए उनके परिजनों के प्रति शोक प्रकट किया तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। साथ ही, भारत ने एक बार फिर अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और वहां की जनता के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच सीमा पार सुरक्षा घटनाओं में वृद्धि हुई है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमलों के लिए किया जा रहा है, जबकि काबुल इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा हवाई हमले दोनों देशों के संबंधों में और अधिक तनाव पैदा कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय बलों की वापसी के बाद से अफगानिस्तान पहले ही गंभीर सुरक्षा और मानवीय चुनौतियों का सामना कर रहा है और ऐसे सैन्य कदम पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति केवल सभी देशों की संप्रभुता के सम्मान, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन से ही सुनिश्चित की जा सकती है। नई दिल्ली अफगानिस्तान को मानवीय सहायता भी उपलब्ध कराता रहा है और वहां एक शांतिपूर्ण, स्थिर तथा समावेशी व्यवस्था के समर्थन की अपनी नीति पर कायम है।
राजनयिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत का यह कड़ा बयान क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर उसकी चिंता को दर्शाता है। उनका मानना है कि यदि सीमा पार इस तरह की सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो इससे न केवल मानवीय संकट गहरा सकता है, बल्कि क्षेत्रीय शांति बहाल करने के प्रयासों को भी गंभीर झटका लग सकता है।
