Last Updated on April 17, 2026 11:00 pm by INDIAN AWAAZ

स्टाफ रिपोर्टर / नई दिल्ली

महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण लागू करने से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 आज लोकसभा में पारित नहीं हो सका। यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा।

सदन में मौजूद 528 सदस्यों में से विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी। परिणाम घोषित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने कहा कि आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण इस विधेयक पर आगे की कार्यवाही संभव नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संविधान संशोधन के लिए सदन की कुल संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में पूरी नहीं हो सकी।

वोटिंग के बाद संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 इस विधेयक से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उन्होंने विपक्ष पर महिलाओं को आरक्षण देने का अवसर गंवाने का आरोप लगाया।

यह विधेयक हालिया जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के जरिए लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने के उद्देश्य से लाया गया था। इससे पहले 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए यह संशोधन आवश्यक था।

विधेयक के खारिज होने के बाद एनडीए सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और विपक्ष पर इस महत्वपूर्ण कानून का समर्थन न करने का आरोप लगाया। इसके चलते संबंधित अन्य दो विधेयकों को भी पेश नहीं किया गया। बाद में सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

परिसीमन विधेयक, 2026 के तहत परिसीमन आयोग के गठन का प्रस्ताव था, जो संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करता और महिलाओं, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण करता।

वहीं, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए 1963, 1991 और 2019 के संबंधित कानूनों में संशोधन कर परिसीमन प्रक्रिया को लागू करने का प्रावधान किया गया था।

इससे पहले चर्चा के दौरान गृह मंत्री Amit Shah ने कहा कि सरकार लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव महिलाओं के आरक्षण के साथ कराना है।

उन्होंने परिसीमन को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इससे हर निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का संतुलन बेहतर होगा और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने के आरोपों को नकारते हुए उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या बढ़ेगी, घटेगी नहीं।

अमित शाह ने यह भी कहा कि देश को उत्तर-दक्षिण के आधार पर विभाजित नहीं किया जाना चाहिए और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार समान हैं। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता।