Last Updated on March 15, 2026 9:55 pm by INDIAN AWAAZ

International Day to Combat Islamophobia हर वर्ष 15 मार्च को मनाया जाने वाला यह दिवस United Nations General Assembly द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद शुरू किया गया था।

— अंदलीब अख़्तर

International Day to Combat Islamophobia के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के कई हिस्सों में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती नफ़रत, भेदभाव और हिंसा की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस्लामोफोबिया का बढ़ता रुझान सामाजिक सद्भाव, लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरधार्मिक सहअस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के इस्लामोफोबिया के खिलाफ विशेष दूत Miguel Ángel Moratinos ने UN News को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यूरोप सहित दुनिया के कई क्षेत्रों में मुसलमानों के खिलाफ घृणा की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि एशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ रही है और इस पर वैश्विक स्तर पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है।

हर वर्ष 15 मार्च को मनाया जाने वाला यह दिवस United Nations General Assembly द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य मुसलमानों के खिलाफ बढ़ते पूर्वाग्रह और भेदभाव के प्रति दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना और सरकारों को ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित करना है।

धार्मिक मतभेदों का राजनीतिक इस्तेमाल

मोरातिनोस ने कहा कि दुनिया के कई देशों में कुछ राजनीतिक दल और आंदोलन धर्म का इस्तेमाल समाज में विभाजन पैदा करने के लिए कर रहे हैं। उनके अनुसार, धार्मिक पहचान को अक्सर राजनीतिक लाभ के लिए भड़काऊ मुद्दा बनाया जाता है, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुसलमानों, के खिलाफ भय और अविश्वास का माहौल तैयार होता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति सामाजिक एकता को कमजोर करती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। उनके मुताबिक, धार्मिक विविधता को संघर्ष का कारण नहीं बल्कि संवाद और सहयोग का आधार बनना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने मई 2025 में मोरातिनोस को इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए विशेष दूत नियुक्त किया था। इसके अलावा वह United Nations Alliance of Civilizations के उच्च प्रतिनिधि भी हैं, जिसका उद्देश्य विभिन्न सभ्यताओं और संस्कृतियों के बीच समझ और संवाद को बढ़ावा देना है।

नफ़रत और भेदभाव की बढ़ती घटनाएँ

मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के अनुसार हाल के वर्षों में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव और नफरत से जुड़ी घटनाएँ बढ़ी हैं। इनमें मस्जिदों पर हमले, धार्मिक पहचान के आधार पर उत्पीड़न, मुस्लिम महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और सार्वजनिक विमर्श में इस्लाम विरोधी बयानबाज़ी शामिल है।

मोरातिनोस ने कहा कि यूरोप के कुछ हिस्सों में दक्षिणपंथी राजनीतिक आंदोलनों के उभार के साथ इस तरह की घटनाओं में वृद्धि विशेष रूप से चिंताजनक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समस्या केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि कई देशों में अलग-अलग रूपों में सामने आ रही है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक सम्मान के बीच संतुलन

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक आस्था के सम्मान के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने Universal Declaration of Human Rights की धाराओं 18 और 19 का उल्लेख किया, जिनमें विचार, अंतरात्मा, धर्म और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है। उनके अनुसार इन अधिकारों की रक्षा करते हुए यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि इनका दुरुपयोग किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए न किया जाए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और बढ़ती नफ़रत

मोरातिनोस ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने सूचना के प्रसार को तेज किया है, लेकिन इसके साथ-साथ यह नफरत फैलाने और गलत सूचनाएँ फैलाने का माध्यम भी बन गया है।

उनके अनुसार कुछ राजनीतिक और चरमपंथी समूह सोशल मीडिया का इस्तेमाल मुसलमानों के खिलाफ प्रचार और नफरत फैलाने के लिए कर रहे हैं। कई बार यह सामग्री बिना पर्याप्त निगरानी के व्यापक स्तर पर फैल जाती है।

शिक्षा और जागरूकता ही समाधान

मोरातिनोस ने कहा कि इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए शिक्षा और जनजागरूकता बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी समाजों में इस्लाम के बारे में व्यापक अज्ञानता है और कई लोग इस धर्म की मूल शिक्षाओं से परिचित नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि इस्लाम की वास्तविक शिक्षाएँ शांति, सहअस्तित्व और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं। इसलिए स्कूलों, विश्वविद्यालयों और मीडिया के माध्यम से सही जानकारी देना जरूरी है ताकि गलतफहमियों और पूर्वाग्रहों को दूर किया जा सके।

इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र की योजना

मोरातिनोस ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र इस्लामोफोबिया से निपटने के लिए एक व्यापक वैश्विक रणनीति तैयार कर रहा है, जिसे इस वर्ष जारी किए जाने की संभावना है।

इस योजना में इस्लामोफोबिया की स्पष्ट परिभाषा तय करना, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार, विभिन्न देशों में भेदभाव विरोधी कानूनों को मजबूत करना और मुसलमानों के खिलाफ नफरत से जुड़ी घटनाओं की निगरानी के लिए बेहतर तंत्र विकसित करना शामिल होगा।

विविधता में एकता का संदेश

अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मोरातिनोस ने कहा कि आज की दुनिया कई संस्कृतियों, धर्मों और सभ्यताओं से मिलकर बनी है और इस विविधता को स्वीकार करना ही मानवता की ताकत है।

उन्होंने कहा कि इस्लामी सभ्यता ने इतिहास में विज्ञान, संस्कृति और ज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसलिए किसी भी समाज को आगे बढ़ने के लिए पारस्परिक सम्मान, संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना होगा।

उन्होंने कहा कि इस्लामोफोबिया के खिलाफ संघर्ष केवल मुसलमानों की सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि यह मानव गरिमा, समानता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की रक्षा का भी मुद्दा है।