
AGENCIES / वाशिंगटन डी.सी
– अमेरिकी राजनीति के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सबसे भरोसेमंद सहयोगी मानी जाने वाली अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी के बीच का गठबंधन आखिरकार टूट गया है। हालांकि सार्वजनिक तौर पर इसे एक सामान्य विदाई का रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही बयां करती है।
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, पाम बोंडी इस पद से एक ‘गरिमापूर्ण विदाई’ (graceful exit) चाहती थीं और उन्होंने इसके लिए समय मांगा था। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर कुछ और ही थे—वे चाहते थे कि बोंडी तुरंत अपना पद छोड़ दें।
क्यों कम हुआ भरोसा?
पाम बोंडी की विदाई के पीछे सबसे बड़ा कारण राष्ट्रपति की उनके प्रति बढ़ती नाराजगी को माना जा रहा है। बोंडी ने न्याय विभाग (DOJ) की कमान संभालते समय ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। उन्होंने पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी और न्यूयॉर्क की एजी लेटिटिया जेम्स जैसे दिग्गजों के खिलाफ जांच भी शुरू की, लेकिन कानूनी तौर पर ये मामले टिक नहीं सके। साक्ष्यों के अभाव में अदालतों ने इन मामलों को खारिज कर दिया, जिससे ट्रंप काफी नाराज थे।
व्हाइट हाउस के एक सूत्र ने बताया, “राष्ट्रपति को ऐसे वकील की तलाश थी जो उन्हें परिणाम दे सके। जब कानूनी मोर्चे पर हार मिलने लगी, तो ट्रंप ने बोंडी को ‘कमजोर’ मानना शुरू कर दिया।”
एपस्टीन फाइलों का विवाद
बोंडी की विदाई की एक और बड़ी वजह कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों का प्रबंधन रहा। बोंडी ने सार्वजनिक रूप से एक ‘क्लाइंट लिस्ट’ का जिक्र कर सनसनी फैला दी थी, लेकिन बाद में न्याय विभाग को स्वीकार करना पड़ा कि ऐसी कोई सूची मौजूद नहीं है। इस घटना ने उन्हें विपक्ष और अपने ही खेमे, दोनों के निशाने पर ला खड़ा किया।
तत्काल बदलाव का फैसला
जब बोंडी ने सम्मानजनक तरीके से इस्तीफा देने की योजना बनाई, तो ट्रंप ने उसे स्वीकार करने के बजाय उन्हें तुरंत पद मुक्त करने का फैसला किया। हालांकि सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति ने उन्हें ‘महान देशभक्त’ बताया, लेकिन जमीनी हकीकत यह थी कि उन्होंने बोंडी की जगह अपने निजी बचाव पक्ष के वकील टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त कर दिया।
टॉड ब्लैंच की नियुक्ति यह साफ करती है कि राष्ट्रपति अब न्याय विभाग में किसी ऐसे व्यक्ति को चाहते हैं जो उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों के लिए और भी अधिक आक्रामक रुख अपना सके। पाम बोंडी का जाना यह दर्शाता है कि अमेरिकी राजनीति में ‘वफादारी’ की भी अपनी एक समय सीमा होती है, खासकर तब जब नतीजे उम्मीद के मुताबिक न हों।
