Last Updated on February 27, 2026 5:39 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / BIZ DESK

शुक्रवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए भारी गिरावट वाला रहा। बेंचमार्क सूचकांक, सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों में 1% से अधिक की बड़ी गिरावट देखी गई। अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में गतिरोध, लगातार विदेशी फंड की निकासी और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है।


भू-राजनीतिक तनाव का असर

बाजार में बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता में प्रगति न होना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव बढ़ने की आशंका है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, “वैश्विक संकेतों की कमजोरी और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण बाजार में सतर्कता का माहौल है।”


सेक्टरवार प्रदर्शन: आईटी ने थामी नैया

गिरावट चौतरफा थी, लेकिन कुछ सेक्टरों ने बाजार को थोड़ा सहारा देने की कोशिश की।

  • गिरावट वाले सेक्टर (Laggards): ऑटो और फार्मा सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार पड़ी। मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गजों में भारी बिकवाली देखी गई। सन फार्मा और भारती एयरटेल भी लाल निशान में बंद हुए।
  • बढ़त वाले सेक्टर (Resilient): आईटी क्षेत्र ने मजबूती दिखाई। इंफोसिस और एचसीएल टेक के शेयरों में खरीदारी देखी गई, जो निवेशकों के लिए सुरक्षित माने गए। इसके अलावा, रिटेल सेक्टर से ट्रेंट ने बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया।

संस्थागत निवेश का गणित

बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी निवेशकों का रवैया रहा।

  • विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs): गुरुवार को इन्होंने ₹3,465.99 करोड़ के शेयर बेचे।
  • घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs): इन्होंने बाजार को सहारा देने की कोशिश करते हुए ₹5,031.57 करोड़ के शेयर खरीदे, लेकिन वैश्विक बिकवाली के दबाव के आगे यह पर्याप्त नहीं रहा।

बाजार का संक्षिप्त विवरण

सूचकांकअंतिम क्लोजिंगअंक परिवर्तनप्रतिशत परिवर्तन
बीएसई सेंसेक्स81,287.19-961.42-1.17%
एनएसई निफ्टी25,178.65-317.90-1.25%

कच्चे तेल पर नजर: वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.26% उछलकर 71.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए चिंता का विषय है।

आगे की राह: विश्लेषकों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति में स्पष्टता नहीं आती, बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों की नजर अब सोमवार के बाजार खुलने पर होगी, जहां निफ्टी के 25,000 के स्तर को बचाने की चुनौती होगी।