BY Our Business Correspondent

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में बुधवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। टाटा समूह की कंपनियों में तेज बिकवाली, आईटी और एफएमसीजी शेयरों में कमजोरी तथा वैश्विक स्तर पर महंगाई और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। हालांकि, पीएसयू बैंक और मेटल शेयरों में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को कुछ हद तक सीमित किया।

एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 187.90 अंक यानी 0.24 प्रतिशत गिरकर 77,966.35 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 35.75 अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,435.95 पर बंद हुआ। लगातार दो कारोबारी सत्रों में निफ्टी में कुल 0.60 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार में व्यापक स्तर पर भी धारणा कमजोर रही। एनएसई पर 1,504 शेयर बढ़कर बंद हुए, जबकि 1,867 शेयरों में गिरावट रही और 105 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि, इंडिया वीआईएक्स, जो निकट अवधि में बाजार की संभावित अस्थिरता को मापता है, 3.73 प्रतिशत घटकर 11.79 पर आ गया। इससे संकेत मिलता है कि सूचकांकों में गिरावट के बावजूद बाजार में तत्काल बड़े उतार-चढ़ाव की आशंका बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है।

टाटा समूह के शेयरों पर दबाव

बुधवार के कारोबार में टाटा समूह की कंपनियां निवेशकों के निशाने पर रहीं। इसकी प्रमुख वजह टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद फरवरी 2027 के आगे दोबारा चेयरमैन पद के लिए नियुक्ति की मांग नहीं करने का फैसला रहा।

चंद्रशेखरन 20 फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल में चेयरमैन बने रहेंगे। इसके बाद समूह में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बाजार में अटकलें तेज हो गई हैं।

टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों में इस खबर के बाद व्यापक बिकवाली देखने को मिली। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 3.93 प्रतिशत गिरकर निफ्टी के प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहा। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स 1.49 प्रतिशत, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स 1.32 प्रतिशत, टाटा स्टील 1.09 प्रतिशत और टाइटन कंपनी 0.57 प्रतिशत नीचे रहे।

ट्रेंट में 0.43 प्रतिशत और टाटा पावर में 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

टाटा संस समूह की होल्डिंग कंपनी है और इसके नेतृत्व में बदलाव का असर समूह की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों की रणनीति, कॉरपोरेट गवर्नेंस, पूंजी आवंटन और भविष्य की कारोबारी दिशा पर पड़ सकता है। यही वजह है कि चंद्रशेखरन के फैसले को बाजार ने काफी गंभीरता से लिया।

आईटी और एफएमसीजी शेयरों ने बढ़ाया दबाव

आईटी क्षेत्र में भी बिकवाली जारी रही। टीसीएस में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट के अलावा इंफोसिस 1.23 प्रतिशत नीचे रहा। दोनों कंपनियों के शेयरों में कमजोरी का असर निफ्टी पर पड़ा।

महिंद्रा एंड महिंद्रा भी 1.63 प्रतिशत गिरा और निफ्टी में प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहा।

एफएमसीजी शेयरों पर भी दबाव रहा। घरेलू महंगाई, ऊर्जा कीमतों और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को लेकर बढ़ती चिंता ने निवेशकों को इस क्षेत्र में सतर्क बनाए रखा।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, रुपये की कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कंपनियों की लागत और मार्जिन पर संभावित दबाव को लेकर भी बाजार चिंतित है।

मेटल शेयरों में तेजी

जहां कई बड़े शेयरों में गिरावट रही, वहीं मेटल शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया।

नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO) 8.25 प्रतिशत उछला, जबकि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज 2.80 प्रतिशत मजबूत हुआ।

इन शेयरों में तेजी की प्रमुख वजह नॉर्वेजियन कंपनी Norsk Hydro की ब्राजील स्थित Alunorte एल्युमिना रिफाइनरी से जुड़ी खबर रही। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गैस की कमी के कारण कंपनी ने रिफाइनरी में एल्युमिना उत्पादन को उसकी क्षमता के लगभग 50 प्रतिशत तक घटा दिया है।

वैश्विक स्तर पर एल्युमिना की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान की आशंका से कीमतों और संबंधित कंपनियों के मार्जिन को लेकर सकारात्मक धारणा बनी। इसका फायदा भारतीय एल्युमिनियम कंपनियों के शेयरों को मिला।

मजबूत तिमाही नतीजों से कुछ शेयर चमके

बाजार की कमजोर धारणा के बावजूद कई कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने उनके शेयरों में तेजी को बढ़ावा दिया।

मार्कसन्स फार्मा 11.02 प्रतिशत उछल गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया। समेकित आधार पर कंपनी का कर पश्चात लाभ (PAT) सालाना आधार पर 173.9 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर ₹159.4 करोड़ हो गया।

कंपनी का परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 35.6 प्रतिशत बढ़कर ₹840.8 करोड़ रहा, हालांकि तिमाही आधार पर इसमें 1.8 प्रतिशत की कमी आई। EBITDA 112.8 प्रतिशत सालाना और 9 प्रतिशत तिमाही आधार पर बढ़कर ₹213 करोड़ हो गया।

कंपनी का EBITDA मार्जिन वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के 16.1 प्रतिशत से बढ़कर 25.3 प्रतिशत हो गया। पिछली तिमाही में यह 22.8 प्रतिशत था।

टीडी पावर सिस्टम्स भी 16.34 प्रतिशत की तेज बढ़त के साथ बंद हुआ। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का समेकित PAT 72.3 प्रतिशत बढ़कर ₹86.29 करोड़ रहा। परिचालन राजस्व में 72.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई और यह ₹640.05 करोड़ पहुंच गया।

ESAB India का शेयर 2.93 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 37.13 प्रतिशत बढ़कर ₹56.14 करोड़ रहा, जबकि शुद्ध बिक्री 19.63 प्रतिशत बढ़कर ₹421.12 करोड़ हो गई।

बाटा इंडिया में भी 2.14 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 23 प्रतिशत बढ़कर ₹63.98 करोड़ हो गया, जबकि राजस्व 3.9 प्रतिशत बढ़कर ₹978.95 करोड़ रहा।

कैप्लिन पॉइंट में गिरावट

मजबूत तिमाही आंकड़े पेश करने के बावजूद कैप्लिन पॉइंट लेबोरेटरीज 6.45 प्रतिशत गिर गया।

कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 18.79 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 3.59 प्रतिशत बढ़कर ₹179.09 करोड़ रहा। परिचालन से राजस्व 19.62 प्रतिशत बढ़कर ₹610.36 करोड़ पहुंच गया।

शेयर में गिरावट यह बताती है कि बाजार में केवल लाभ और राजस्व वृद्धि ही पर्याप्त नहीं है। निवेशक भविष्य की वृद्धि, मूल्यांकन और अपेक्षाओं की तुलना में वास्तविक प्रदर्शन को भी देख रहे हैं।

सीईओ के इस्तीफे से Godrej Consumer में भारी गिरावट

Godrej Consumer Products (GCPL) का शेयर 11.22 प्रतिशत टूट गया।

कंपनी ने बताया कि उसके प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर सितापति ने 11 अगस्त 2026 से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

इसके बाद कंपनी के बोर्ड ने मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) आसिफ मल्बारी को अतिरिक्त निदेशक नियुक्त किया और उन्हें पांच साल की अवधि के लिए प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बनाया।

वरिष्ठ प्रबंधन में अचानक बदलाव ने निवेशकों को सतर्क किया और शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली।

DAM Capital में भी कमजोरी

DAM Capital Advisors 4.32 प्रतिशत गिरा। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 34.78 प्रतिशत घटकर ₹0.15 करोड़ रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में ₹0.23 करोड़ था।

कंपनी की कुल आय भी 2.95 प्रतिशत घटकर ₹29.97 करोड़ रह गई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹30.88 करोड़ थी।

खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45 प्रतिशत

बाजार के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम जुलाई की खुदरा महंगाई के आंकड़े रहे। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई जुलाई 2026 में बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई, जबकि जून में यह 4.38 प्रतिशत थी।

महंगाई में वृद्धि ऊर्जा कीमतों और खाद्य कीमतों से जुड़ी चिंताओं के बीच हुई है। हालांकि, 4.45 प्रतिशत की दर अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की सहनशीलता सीमा के भीतर है।

महंगाई में बढ़ोतरी का असर मौद्रिक नीति की दिशा, ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड और कंपनियों की उधारी लागत पर पड़ सकता है। इसलिए बाजार की नजर आने वाले महीनों में महंगाई के रुझान पर बनी रहेगी।

कच्चे तेल और रुपये पर नजर

कमोडिटी बाजार में अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 11 सेंट यानी 0.12 प्रतिशत गिरकर 88.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

हालांकि, तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी महंगाई, चालू खाते और रुपये की दिशा पर असर डाल सकती है।

भारत की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड पिछली बार के 6.779 प्रतिशत से घटकर 6.770 प्रतिशत रही।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर बना रहा और करीब ₹95.34 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार करता रहा।

वहीं, एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना वायदा 0.84 प्रतिशत बढ़कर ₹1,55,055 पर पहुंच गया।

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.02 प्रतिशत बढ़कर 99.84 रहा, जबकि अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.668 प्रतिशत पर आ गई।

वैश्विक बाजारों की नजर अमेरिकी महंगाई पर

वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर बनी हुई है। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति और ब्याज दरों की दिशा को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

अधिकांश एशियाई बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि यूरोपीय बाजारों में भी शुरुआती कारोबार में मजबूती रही। निवेशकों ने अमेरिका के महंगाई आंकड़ों के अलावा जर्मनी की महंगाई पर भी नजर रखी।

इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी अनिश्चितता भी ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

एक दिन पहले अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही थी। S&P 500 में 0.32 प्रतिशत की गिरावट, Nasdaq Composite में 0.60 प्रतिशत की गिरावट और Dow Jones Industrial Average में 184.13 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

आईपीओ बाजार में मजबूत मांग

दूसरी ओर, प्राथमिक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है।

Shiprocket IPO को 12 अगस्त शाम 5 बजे तक 9,14,37,346 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 9,44,36,030 शेयर बिक्री के लिए रखे गए थे। इस तरह इश्यू 0.97 गुना सब्सक्राइब हुआ। इश्यू का मूल्य दायरा ₹92-97 प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 154 शेयरों की है। इश्यू 14 अगस्त को बंद होगा।

Behari Lal Engineering IPO को 1,50,12,556 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 74,12,769 शेयर पेश किए गए थे। इश्यू 2.03 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा ₹271-285 प्रति शेयर है और न्यूनतम लॉट 52 शेयरों का है।

Milky Mist Dairy Food के आईपीओ को 17,77,82,747 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि 8,17,98,244 शेयर ऑफर किए गए थे। इश्यू 2.17 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा ₹133-140 प्रति शेयर और न्यूनतम लॉट 107 शेयरों का है। इश्यू 13 अगस्त को बंद होगा।

सबसे मजबूत प्रतिक्रिया Dhoot Transmission के आईपीओ को मिली। 12 अगस्त शाम 5 बजे तक इश्यू को 1,85,17,68,112 शेयरों के लिए बोलियां मिल चुकी थीं, जबकि ऑफर 2,49,56,363 शेयरों का था। इस तरह इश्यू 74.20 गुना सब्सक्राइब हुआ।

Molbio Diagnostics के आईपीओ को भी जबरदस्त मांग मिली। इसे 57,30,81,768 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जबकि ऑफर 81,58,529 शेयरों का था। इश्यू 70.24 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा ₹768-807 प्रति शेयर और न्यूनतम लॉट 18 शेयरों का है।

आईपीओ बाजार में इतनी मजबूत मांग यह संकेत देती है कि सेकेंडरी मार्केट में सावधानी के बावजूद चुनिंदा कंपनियों को लेकर निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

आगे बाजार की दिशा क्या होगी?

आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन, कंपनियों के तिमाही नतीजे, खुदरा महंगाई, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और अमेरिकी मौद्रिक नीति की उम्मीदें बाजार के प्रमुख संकेतक बने रहेंगे।

तकनीकी स्तर पर निफ्टी के लिए 24,300-24,250 का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस स्तर के नीचे टिकाऊ गिरावट दर्ज करता है तो बाजार में और बिकवाली का दबाव बन सकता है।

इसके विपरीत, 24,500 का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध बना हुआ है। इस स्तर के ऊपर निर्णायक बढ़त बाजार में सकारात्मक धारणा को मजबूत कर सकती है।

फिलहाल बाजार में व्यापक स्तर पर घबराहट की स्थिति नहीं है, लेकिन निवेशक स्पष्ट रूप से चयनात्मक रुख अपना रहे हैं। मजबूत तिमाही नतीजे देने वाली कंपनियों में खरीदारी जारी है, जबकि प्रबंधन में बदलाव, कमजोर प्रदर्शन या ऊंचे मूल्यांकन वाली कंपनियों में बिकवाली देखने को मिल रही है।

ऐसे माहौल में आने वाले दिनों में कॉरपोरेट आय, महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक ब्याज दरों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।