पीएसयू बैंक की कमजोरी को थामा, अमेरिकी फेड के फैसले से पहले प्रमुख सूचकांक सपाट बंद

BY Our Business Correspondent

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को सतर्क रुख के बीच सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक लगभग बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट बंद हुए। निवेशकों ने चुनिंदा दिग्गज कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों और वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीति को लेकर आने वाले फैसलों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की।

बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 69.86 अंक या 0.09% की गिरावट के साथ 76,765.92 पर बंद हुआ। इसी तरह, व्यापक निफ्टी 50 (Nifty 50) सूचकांक 10.60 अंक या 0.04% टूटकर 23,985.35 पर बंद हुआ और महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर 24,000 के थोड़ा नीचे आ गया।

बाजार में मुख्य रूप से चुनिंदा दिग्गज शेयरों में बिकवाली हावी रही। हिंदुस्तान यूनिलीवर (7.11% की गिरावट), आईसीआईसीआई बैंक (1.94% की गिरावट) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (0.65% की गिरावट) निफ्टी के प्रमुख कमजोरी देने वाले शेयर रहे।

व्यापक बाजार में मिला-जुला रुझान दिखा। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.01% की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.47% की कमजोरी दर्ज की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर बाजार का रुख नकारात्मक रहा, जहां 1,528 शेयरों में तेजी आई और 2,740 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 169 शेयर अपरिवर्तित रहे। इस बीच, एनएसई का इंडिया विक्स (India VIX), जो बाजार की अस्थिरता का अनुमान लगाता है, 0.77% घटकर 12.56 पर आ गया।

प्रमुख वृहद आर्थिक संकेतक और जिंस बाजार (Commodities)

  • कच्चा तेल: सितंबर 2026 की डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड वायदा 1.93 डॉलर या 2.18% की भारी गिरावट के साथ 86.43 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जिससे भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को कुछ राहत मिली है।
  • विदेशी मुद्रा बाजार: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मामूली मजबूती के साथ 95.8875 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि पिछले सत्र में यह 95.9900 पर बंद हुआ था।
  • सरकारी बॉंड: भारत के 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉंड का यील्ड 0.03% बढ़कर 6.775% हो गया, जो पिछले सत्र में 6.773% था।
  • सर्राफा बाजार: 5 अगस्त 2026 को डिलीवरी वाले एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स में 1.17% की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,41,395 रुपये पर आ गया।
  • डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉंड: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.09% बढ़कर 101.62 पर पहुंच गया, जबकि अमेरिका का 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 0.47% घटकर 4.619% पर आ गया।

वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम

वॉल स्ट्रीट के वायदा कारोबार (Dow Jones futures) में 281 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जो अमेरिकी बाजारों में सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है। यूरोपीय शेयर बाजारों में मंगलवार को बढ़त देखने को मिली, जिसे उपभोक्ता वस्तुओं और औद्योगिक कंपनियों के मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों से समर्थन मिला, हालांकि ऊंचे बॉंड यील्ड ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।

अधिकांश एशियाई सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 10% से अधिक लुढ़क गया, क्योंकि निवेशक अमेज़न, मेटा प्लेटफॉर्म्स और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी तकनीकी दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजों तथा फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर टिकी हैं। दो दिवसीय बैठक के अंत में केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने की पूरी उम्मीद है। निवेशक अमेरिकी फेड चेयरमैन जेरोम पावेल के बयानों से यह अंदाजा लगाने की कोशिश करेंगे कि भविष्य में मौद्रिक नीति का रुख क्या रहेगा।

भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी तनाव और कूटनीति पर नजर बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों के चलते शत्रुता फिलहाल रुकी हुई है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रॉप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा तय है।

शेयरों और सेक्टरों का हाल

टेक शेयरों की जोरदार तेजी: निफ्टी आईटी इंडेक्स चमका

सत्र का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला सेक्टर टेक्नोलॉजी रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.32% की छलांग लगाकर 30,418.35 पर पहुंच गया, जिससे पिछले तीन सत्रों में इसकी कुल बढ़त 6.61% हो गई। एक प्रमुख विदेशी ब्रोकरेज फर्म द्वारा भारतीय आईटी सेक्टर को ‘अंडरवेट’ से बढ़ाकर ‘न्यूट्रल’ करने और इंफोसिस को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने से इस तेजी को बड़ा बल मिला।

  • कोफोर्ज (Coforge) ने शानदार तिमाही नतीजों के दम पर 10.16% की जोरदार छलांग लगाई। 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का डॉलर-आधारित राजस्व 59.2 करोड़ डॉलर (33.3% YoY और 21.1% QoQ की वृद्धि) रहा। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 63.4% बढ़कर 518.60 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा, कंपनी ने चीन में कारोबार विस्तार के लिए एक नई इकाई स्थापित करने को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
  • टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) में 4.46% की तेजी आई। इसके अलावा एमफैसिस (3.57%), टेक महिंद्रा (3.49%), पर्सिस्टेंट सिस्टम्स (3.22%), इंफोसिस (2.39%), एचसीएल टेक्नोलॉजीज (1.93%) और विप्रो (1.41%) बढ़त के साथ बंद हुए।

एफएमसीजी और उपभोक्ता वस्तुओं पर दबाव

कमजोर नतीजों और लागत बढ़ने से उपभोक्ता वस्तुओं के शेयरों में भारी गिरावट आई:

  • हिंदुस्तान यूनिलीवर का समेकित शुद्ध लाभ Q1 FY27 में 3.01% घटकर 2,673 करोड़ रुपये रहने के कारण शेयर 7.11% लुढ़क गया।
  • वरुण बेवरेजेस का शेयर 7.53% गिर गया, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका के ट्विज़ा कारोबार के अधिग्रहण के चलते एबिटा मार्जिन में 76 आधार अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
  • गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया का शुद्ध लाभ 44.3% घटकर 198.39 करोड़ रुपये रहने से शेयर 7.80% तक टूट गया।

अन्य चुनिंदा कंपनियों के प्रदर्शन

  • आर आर केबल (R R Kabel) का समेकित शुद्ध लाभ 128.8% की जबरदस्त छलांग के साथ 205.20 करोड़ रुपये पर पहुंचने से शेयर में 2.36% की तेजी आई।
  • ओम इन्फ्रा को छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग से एक बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाला (L1) घोषित किए जाने के बाद शेयर 4.78% चढ़ गया।
  • टाटा केमिकल्स को तिमाही में 17 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जिससे शेयर 3.73% नीचे आया।

रुपये में हल्की मजबूती

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत हुआ। रुपया 95.8875 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.9900 पर बंद हुआ था।

भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड मामूली बढ़कर 6.775 प्रतिशत रही।

वहीं, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) लगभग 101.62 पर स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड घटकर लगभग 4.62 प्रतिशत पर आ गई।

वैश्विक बाजारों की नजर फेडरल रिजर्व पर

वैश्विक बाजारों में निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक पर केंद्रित रहा। व्यापक उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की टिप्पणियां आगे की मौद्रिक नीति का संकेत देंगी।

इसके अलावा निवेशकों की निगाहें अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा प्लेटफॉर्म्स जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी टिकी हुई हैं।

यूरोपीय शेयर बाजार सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करते रहे, जबकि अधिकांश एशियाई बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे अधिक दबाव में रहा।

अमेरिकी बाजारों में सोमवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला, जहां डॉव जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

तिमाही नतीजों पर शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव

दिनभर कई कंपनियों के तिमाही नतीजों के कारण उनके शेयरों में तेज हलचल देखी गई।

आरआर काबेल के शेयर मजबूत नतीजों के बाद 2.36 प्रतिशत चढ़ गए।

ओम इंफ्रा 4.78 प्रतिशत उछला क्योंकि कंपनी छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग की एक बड़ी परियोजना में सबसे कम बोलीदाता (L1) बनी।

दूसरी ओर गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया 7.80 प्रतिशत, इंडोको रेमेडीज 7.72 प्रतिशत, टाटा केमिकल्स 3.73 प्रतिशत, तेजस नेटवर्क्स 3.84 प्रतिशत, ऑरियनप्रो सॉल्यूशंस 11.79 प्रतिशत तथा इंडस टावर्स 1.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

आगे की राह

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करेगी—घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजे, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां।

यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता कम होती है, तो भारतीय बाजारों को समर्थन मिल सकता है। वहीं, आईटी क्षेत्र में लौट रही मजबूती बाजार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि स्थायी तेजी के लिए बैंकिंग, एफएमसीजी और औद्योगिक शेयरों की भागीदारी भी आवश्यक होगी।